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एक डॉक्टर के कंधे पर 45 हजार बच्चों के इलाज की जिम्मदारी

Wed, 02 Jun 2021 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 10:21 PM IST
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Responsibility of treating 45 thousand children on the shoulder of a doctor
सोनभद्र। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सभी को बच्चों की सेहत की चिंता सताने लगी है। केंद्र और प्रदेश सरकार बीमारी से निबटने के लिए तैयारियां मुकम्मल होने का दावा कर रही हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिले के अधिकांश राजकीय अस्पतालों में बच्चों के डाक्टर हैं ही नही। यहां वर्तमान में करीब दो लाख 25 हजार बच्चे हैं जिसके सापेक्ष सिर्फ पांच बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। इसमें एक डॉक्टर संविदा पर हैं। ऐसे में एक डॉक्टर के जिम्मे करीब 45 हजार बच्चों की जिम्मेदारी है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर से ही देश में हाहाकार मचा हुआ है और इसी बीच तीसरी लहर की बात ने सबको डरा दिया है। तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा होने की आशंका जताई जा रही है। तीसरी लहर आने के मद्देनजर जिला अस्पताल परिसर में स्थित बर्न यूनिट और ट्रामा सेंटर भवन में बच्चों के इलाज के लिए 50 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। यहां ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित कर दिया गया है। वार्डों में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है। बच्चों को बचाने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर समेत अन्य कर्मियों की टीम भी बनाई जा रही है। बच्चों के डॉक्टरों की कमी होने के चलते मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में कठिनाई हो रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 190 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष सिर्फ महज 126 तैनात है। इनमें से भी लगभग 36 डॉक्टर पीजी करने चले गए है या बीमार होने के कारण अवकाश पर चल रहे हैं। वर्तमान में सीएचसी, पीएचसी पर महज चार बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। वहीं जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 34 पद स्वीकृत है, जिसके सापेक्ष 27 डॉक्टर कार्यरत है। यहां संविदा पर एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर है। अगर बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की डयूटी बच्चों के लिए बन रहे कोविड अस्पताल में लग जाएगी तो राजकीय अस्पतालों में विभिन्न रोगों से पीड़ित बच्चों का उपचार कैसे होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्तमान में राबट्र्सगंज, ओबरा, दुद्वी और घोरावल तहसील क्षेत्र में शून्य से छह साल तक आयु के करीब दो लाख 25 हजार बच्चे हैं।
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