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सोनभद्र: मजिस्ट्रेट के सामने बयान बदलने पर राहत राशि की होगी वसूली, कोर्ट ने दिया एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने का आदेश

Sun, 31 Oct 2021 01:14 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 31 Oct 2021 01:14 PM IST
सार

सोनभद्र जिले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट खलीकुज्ज्मा की अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाया। एक में बयान बदलने पर महिला स राहत राशि की वसूली होगी। तो वहीं एक महिला से दुष्कर्म के मामले में पुलिस को एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

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Relief amount will be recovered after statement changed in front of magistrate court ordered to file a case in SC ST Act in sonbhadra
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

सोनभद्र जिले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट खलीकुज्ज्मा की अदालत ने शुक्रवार को घोरावल पुलिस के जरिए न्यायालय में दाखिल अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। वहीं महिला को मिली राहत राशि की वसूली के लिए डीएम को आदेश की प्रति भेज दी है।

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28 मार्च 2019 को तैयार हुई अंतिम रिपोर्ट को विवेचक ने न्यायालय में एक जुलाई 2019 को दाखिल किया था। इसके बाद महिला को नोटिस जारी किया गया था। महिला ने  एक अक्तूबर 2019 को न्यायालय में उपस्थित होकर शपथपत्र के साथ इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया था कि लोगों के बहकावे में आकर निशान अंगूठा बना दिया था। और उन्हीं लोगों के दबाव में आकर मजिस्ट्रेट के सामने बदलकर बयान भी दे दिया था।
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धारा 161 व 164 सीआरपीसी के बयान में घटना का समर्थन किया है। तभी  महिला ने प्रतिकर धनराशि प्राप्त की है। जिसे वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराया जाना आवश्यक है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने अधिवक्ता के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर यह आदेश दिया है।

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एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज करे पुलिस 

महिला के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट खलीकुज्ज्मा की अदालत ने घोरावल कोतवाल को एफआईआर दर्ज कर दो दिन के भीतर न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया। यह आदेश घोरावल कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की महिला द्वारा अधिवक्ता ओमप्रकाश दुबे के जरिए दाखिल धारा 156(3) सीआरपीसी के प्रार्थना पत्र को सुनने के बाद दिया है।

दिए प्रार्थना पत्र में महिला ने आरोप लगाया है कि वह 21 सितंबर को अपने मड़हे में पशुओं की निगरानी करने के लिए सोई थी। मध्यरात्रि में रमेश उर्फ मुंशी मड़हे में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। जाते समय जाति सूचक शब्दों से गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दी। थाने पर सूचना देने के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। जिस पर उसने एसपी को 28 सितंबर 5 अक्तूबर को रजिस्टर्ड डाक से सूचना दी। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अदालत ने अधिवक्ता के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने पर संज्ञेय अपराध मानते हुए घोरावल कोतवाल को एफआईआर दर्ज करने एवं दो दिन के भीतर न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है।

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