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Ramdular Gond: भाजपा विधायक बोला- झूठा फंसाया... कोर्ट ने कहा- कोई पिता अपनी बेटी की इज्जत दांव पर नहीं लगाएगा
Sat, 16 Dec 2023 09:12 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 16 Dec 2023 09:12 AM IST
सार
Sonebhadra Rape Case Judgement BJP MLA: नाबालिग से दुष्कर्म में भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को कोर्ट ने 25 साल का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दस लाख का जुर्माना भी लगाया है। सोनभद्र की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दुद्धी से विधायक को यह सजा सुनाई है। गोंड की विधानसभा की सदस्यता जानी तय है। जुर्माना न देने पर दोषी विधायक को तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पूरी जुर्माना राशि पीड़िता को मिलेगी।
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Ramdular Gond
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नाबालिग से दुष्कर्म में सोनभद्र की दुद्धी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को 25 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही दस लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना न देने पर दोषी विधायक को तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इसी तरह दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने के मामले में दो वर्ष की सजा सुनाई गई। पांच हजार रुपये जुर्माना ठोंका गया है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई है। जुर्माने की पूरी राशि दुष्कर्म पीड़िता को दी जाएगी। अदालत के आदेश के बाद रामदुलार गोंड की विधानसभा की सदस्यता जानी तय है।
नवंबर 2014 में म्योरपुर थाने में नाबालिग से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें रामदुलार गोंड को मुख्य आरोपी बनाया गया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में रामदुलार को भाजपा से टिकट मिला और वह जीत गया, फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर दुष्कर्म मामले की सुनवाई एमएपी-एमएलए कोर्ट में शुरू हुई।
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एमपी-एमएलए कोर्ट के प्रभारी और अपर जिला जज एहसानुल्लाह खां ने मामले की सुनवाई करते हुए गत 12 दिसंबर को रामदुलार गोंड को दोषी करार दिया था। साथ ही न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। अदालत ने आदेश के लिए शुक्रवार की तिथि तय की थी। शुक्रवार की दोपहर एक बजे मामले की सुनवाई हुई और अदालत ने कुछ देर में आदेश सुना दिया। जब आदेश सुनाया गया, तब दोषी विधायक को जेल से अदालत लाया गया था।
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इसी तरह दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने के मामले में दो वर्ष की सजा सुनाई गई। पांच हजार रुपये जुर्माना ठोंका गया है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई है। जुर्माने की पूरी राशि दुष्कर्म पीड़िता को दी जाएगी। अदालत के आदेश के बाद रामदुलार गोंड की विधानसभा की सदस्यता जानी तय है।
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नवंबर 2014 में म्योरपुर थाने में नाबालिग से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें रामदुलार गोंड को मुख्य आरोपी बनाया गया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में रामदुलार को भाजपा से टिकट मिला और वह जीत गया, फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर दुष्कर्म मामले की सुनवाई एमएपी-एमएलए कोर्ट में शुरू हुई।
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एमपी-एमएलए कोर्ट के प्रभारी और अपर जिला जज एहसानुल्लाह खां ने मामले की सुनवाई करते हुए गत 12 दिसंबर को रामदुलार गोंड को दोषी करार दिया था। साथ ही न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। अदालत ने आदेश के लिए शुक्रवार की तिथि तय की थी। शुक्रवार की दोपहर एक बजे मामले की सुनवाई हुई और अदालत ने कुछ देर में आदेश सुना दिया। जब आदेश सुनाया गया, तब दोषी विधायक को जेल से अदालत लाया गया था।
अभियोजन के मुताबिक नाबालिग के भाई ने चार नवंबर 2014 को म्योरपुर थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। तब पीड़िता की उम्र 14 साल थी और आरोपी रामदुलार गोंड की पत्नी गांव की प्रधान थी। इस मामले में रामदुलार को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। बाद में उसे जमानत मिल गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील सत्यप्रकाश त्रिपाठी, विकास शाक्य और राम जियावन यादव ने बहस की।
एक साल में छह बार किया दुष्कर्म, जान से मारने की दी धमकी
अभियोजन के मुताबिक रामदुलार गोंड ने नाबालिग से छह बार दुष्कर्म किया था। पुलिस को दी गई तहरीर और फिर मजिस्ट्रेट को दिए बयान में पीड़िता ने इसकी पुष्टि की थी। बताया था कि जब वह धान काटने गई थी, तब पहली बार उसके साथ दुष्कर्म हुआ। इसके बाद छह बार दुष्कर्म हुआ था। रामदुलार उसे धमकाता था कि अगर किसी से कुछ कहा तो जान से मार देंगे। परिवार को भी जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
अभियोजन के मुताबिक रामदुलार गोंड ने नाबालिग से छह बार दुष्कर्म किया था। पुलिस को दी गई तहरीर और फिर मजिस्ट्रेट को दिए बयान में पीड़िता ने इसकी पुष्टि की थी। बताया था कि जब वह धान काटने गई थी, तब पहली बार उसके साथ दुष्कर्म हुआ। इसके बाद छह बार दुष्कर्म हुआ था। रामदुलार उसे धमकाता था कि अगर किसी से कुछ कहा तो जान से मार देंगे। परिवार को भी जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
दुष्कर्म से गर्भवती हुई थी नाबालिग
अभियोजन के मुताबिक नाबालिग दुष्कर्म से गर्भवती हुई थी। इसके साक्ष्य भी अदालत में दिए गए थे, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। सभी साक्ष्य सही पाए गए। दुष्कर्म पीड़िता के पेट में 15 सप्ताह का गर्भ पाया गया। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के साथ तमाम साक्ष्य उपलब्ध कराए गए थे। इसी वजह से मुकदमा दर्ज कराने वाले भाई ने दुष्कर्म पीड़िता की बेटी के लिए अतिरिक्त पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। बेटी आठ साल की है।
अभियोजन के मुताबिक नाबालिग दुष्कर्म से गर्भवती हुई थी। इसके साक्ष्य भी अदालत में दिए गए थे, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। सभी साक्ष्य सही पाए गए। दुष्कर्म पीड़िता के पेट में 15 सप्ताह का गर्भ पाया गया। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के साथ तमाम साक्ष्य उपलब्ध कराए गए थे। इसी वजह से मुकदमा दर्ज कराने वाले भाई ने दुष्कर्म पीड़िता की बेटी के लिए अतिरिक्त पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। बेटी आठ साल की है।
विवेचना सतही, फिर भी अभियुक्त को लाभ नहीं दे सकते
अदालत ने सुनवाई की दौरान पुलिस की विवेचना को सतही करार दिया। अदालत ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता का डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया, जो विवेचक की त्रुटि को दर्शाता है, लेकिन विवेचना की इस त्रुटि का लाभ अभियुक्त को नहीं दिया जा सकता है। 12 जनवरी 2015 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के मुताबिक दुष्कर्म पीड़िता के पेट में 15 सप्ताह का गर्भ था। लिहाजा, सतही विवेचना को आधार बनाकर साक्षियों के साक्ष्य को तिरस्कृत नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने सुनवाई की दौरान पुलिस की विवेचना को सतही करार दिया। अदालत ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता का डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया, जो विवेचक की त्रुटि को दर्शाता है, लेकिन विवेचना की इस त्रुटि का लाभ अभियुक्त को नहीं दिया जा सकता है। 12 जनवरी 2015 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के मुताबिक दुष्कर्म पीड़िता के पेट में 15 सप्ताह का गर्भ था। लिहाजा, सतही विवेचना को आधार बनाकर साक्षियों के साक्ष्य को तिरस्कृत नहीं किया जा सकता है।
डॉक्टर और पुलिस कर्मियों को दिखाया आईना
अदालत ने मामले में गवाही देने वाली महिला डॉक्टर गीता जैसवार, इंस्पेक्टर देवेंद्र बहादुर सिंह और निरीक्षक भूपेंद्र सिंह यादव को आईना दिखाया है। अदालत ने कहा कि अल्ट्रासाउंड सहित अन्य रिपोर्ट से साफ है कि दुष्कर्म पीड़िता गर्भवती थी, लेकिन महिला डॉक्टर ने गुमराह करने का प्रयास किया। विवेचना के दौरान गलत तथ्य बताए।
अदालत ने मामले में गवाही देने वाली महिला डॉक्टर गीता जैसवार, इंस्पेक्टर देवेंद्र बहादुर सिंह और निरीक्षक भूपेंद्र सिंह यादव को आईना दिखाया है। अदालत ने कहा कि अल्ट्रासाउंड सहित अन्य रिपोर्ट से साफ है कि दुष्कर्म पीड़िता गर्भवती थी, लेकिन महिला डॉक्टर ने गुमराह करने का प्रयास किया। विवेचना के दौरान गलत तथ्य बताए।
उम्र में उलझाने का प्रयास, लेकिन अभियोजन सही साबित हुआ
विधायक की तरफ से दुष्कर्म पीड़िता की उम्र को लेकर उलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन अभियोजन ने साक्ष्यों को मजबूती से सामने रखा। यह साबित किया कि दुष्कर्म के दौरान पीड़िता नाबालिग थी। विधायक की तरफ से उसे बालिग बताने का प्रयास किया जा रहा था। इसके लिए प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय की अलग-अलग मार्कशीट रखी जा रही थी। बाद में अदालत ने प्राथमिक विद्यालय की जन्मतिथि को सही माना और पीड़िता की उम्र 15 से 16 वर्ष के बीच बताया।
विधायक की तरफ से दुष्कर्म पीड़िता की उम्र को लेकर उलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन अभियोजन ने साक्ष्यों को मजबूती से सामने रखा। यह साबित किया कि दुष्कर्म के दौरान पीड़िता नाबालिग थी। विधायक की तरफ से उसे बालिग बताने का प्रयास किया जा रहा था। इसके लिए प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय की अलग-अलग मार्कशीट रखी जा रही थी। बाद में अदालत ने प्राथमिक विद्यालय की जन्मतिथि को सही माना और पीड़िता की उम्र 15 से 16 वर्ष के बीच बताया।
सोनभद्र में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी भाजपा विधायक रामदुलार गोंड के खिलाफ पीड़ित परिवार ने लंबी कानूनी लड़ी है। करीब नौ साल तक मामला अदालत में चला। इस दौरान 300 से अधिक तारीखें पड़ीं। आरोपी पक्ष की ओर से कई बार अदालत को गुमराह करने की भी कोशिश हुई।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर पीड़िता को बालिग साबित करने का प्रयास हुआ तो विवेचना के दौरान भी कई त्रुटियां बरती गईं, जिससे संदेह का लाभ आरोपी को मिल जाए। हालांकि सत्य की कसौटी पर कोई भी दलील खरी नहीं उतरी। अदालत ने सभी को खारिज करते हुए दोषी विधायक को सख्त सजा सुनाई।
दुष्कर्म के मामले में किसी विधायक को 25 वर्ष की सजा जिले में अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। दरअसल, चार नवंबर 2014 को जब म्योरपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था, तब आरोपी रामदुलार की पत्नी गांव की प्रधान थी। बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि मारपीट के एक मामले में पंचायत करने के कारण रंजिशन प्रधान के पति के विरुद्ध झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।
इसके माध्यम से वैमनस्यता साधने की कोशिश हुई। पूर्व में उनकी ओर से एससी-एसटी का मुकदमा भी पीड़ित परिवार पर दर्ज कराया था। अदालत ने इस तर्क के साथ दलील खारिज कर दी कि भारतीय समाज में कोई भी पिता सिर्फ एक विवाद के कारण अपनी बेटी की इज्जत को दांव नहीं लगाएगा और किसी के खिलाफ झूठा मुकदमा नहीं दर्ज कराएगा। भारतीय परिवेश में स्त्री की इज्जत ही सर्वोपरी है और कोई स्त्री भी सिर्फ अपने पिता की रंजिश के लिए किसी पर ऐसे आरोप नहीं लगाएगी।
अदालत ने अनिल राय बनाम बिहार राज्य और धारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मुकदमों में दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर साक्ष्य विश्ववसनीय और संदेह से परे है तो इसे दोषसिद्धी का आधार माना जाएगा। इस दलील के बाद बचाव पक्ष की ओर से एक निजी स्कूल में किशोरी के दाखिले के वक्त प्रस्तुत जन्मतिथि का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसके जरिए किशोरी को बालिग ठहराया गया।
दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से गांव के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और जूनियर हाईस्कूल में प्रवेश के वक्त अंकित कराए पीड़िता की जन्मतिथि का ब्योरा देते हुए घटना के वक्त उम्र 14 वर्ष होना बताया गया। प्रधानाचार्य ने भी इसके पक्ष में गवाही दी। कोर्ट ने सरकारी रिकाॅर्ड को विश्वसनीय माना। मार्जिन ऑफ एरर के सिद्धांत के आधार पर भी पीड़िता की उम्र 16 वर्ष पाई गई। इसके अलावा विवेचक की ओर से घटनास्थल का मानचित्र न बनाने सहित अन्य त्रुटियों को भी खारिज करते हुए कोर्ट ने आरोपी को लाभ देने से इन्कार कर दिया।