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बिजली चोरी रोकने के लिए 40 गांवों में लगेगा पीवीसी
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जिले में बिजली की चोरी रोकने के लिए बिजली विभाग की तरफ से कवायद तेज कर दी गई है। गांव के जर्जर तारों को बदलते हुए प्लास्टिक कोटेड तार (पीवीसी) लगाए जाएंगे। पहले चरण में जिले के 300 से अधिक गांव और मजरों का चयन किया गया है। जल्द ही अन्य गांवों में भी काम शुरू होगा। इससे जहां घटनाएं रुकेंगी, वहीं बिजली चोरी पर भी लगाम कसेगा।
जिले के अधिकांश गांवों में जर्जर तार व खंभों के सहारे बिजली की सप्लाई हो रही है। किसी गांव में पांच दशक पूर्व तो कहीं चार दशक पूर्व खंभे व तार लगाए गए हैं। कई गांवों में बिजली के खंभे टेढ़े हो गए हैं और तार कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं। पूर्व में सदर ब्लॉक के बरकरा, नरखोरिया सहित अन्य गांवों में तार टूटने और करंट की चपेट में आकर कई घटनाएं भी हो चुकी है। जर्जर खंभों और तारों को बदलने के लिए पूर्व में कई स्थानों पर धरना प्रदर्शन भी हुए थे। समस्या को ध्यान में रखते हुए बिजली विभाग की तरफ से सर्वे कराया गया था। सर्वे में पाया गया कि करीब 406 गांवों में लगे तार जर्जर हो गए हैं। इसमें से 300 से अधिक गांव और मजरों में जर्जर तारों को बदलने की कवायद शुरू हो गई है। 85 गांवों में जर्जर तार बदले जाएंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जर्जर तारों को बदलने के लिए मध्य प्रदेश की एक एजेंसी नामित की गई है। एजेंसी के माध्यम से जिले में अलग-अलग तीन स्थानों पर जर्जर तार बदलने का काम चल रहा है। जर्जर तार खंभों से उतारकर उसके स्थान पर (पीवीसी) प्लास्टिक कोटेड तार लगाए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो गांवों में पीवीसी लगाए जाने से घटनाएं तो रुकेगी ही, साथ ही कटियामारी पर रोक लगने से बिजली की खपत भी कम होगी।
जर्जर तारों को बदलने के लिए पूर्व में सर्वे कराया गया था। सर्वे में 406 गांव और मजरों के तार जर्जर मिले थे। इनमें से 300 से अधिक गांवों में पीवीसी लगाने का काम चल रहा है। - एसके सिंह, एक्सईएन-राबर्ट्सगंज।
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जिले के अधिकांश गांवों में जर्जर तार व खंभों के सहारे बिजली की सप्लाई हो रही है। किसी गांव में पांच दशक पूर्व तो कहीं चार दशक पूर्व खंभे व तार लगाए गए हैं। कई गांवों में बिजली के खंभे टेढ़े हो गए हैं और तार कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं। पूर्व में सदर ब्लॉक के बरकरा, नरखोरिया सहित अन्य गांवों में तार टूटने और करंट की चपेट में आकर कई घटनाएं भी हो चुकी है। जर्जर खंभों और तारों को बदलने के लिए पूर्व में कई स्थानों पर धरना प्रदर्शन भी हुए थे। समस्या को ध्यान में रखते हुए बिजली विभाग की तरफ से सर्वे कराया गया था। सर्वे में पाया गया कि करीब 406 गांवों में लगे तार जर्जर हो गए हैं। इसमें से 300 से अधिक गांव और मजरों में जर्जर तारों को बदलने की कवायद शुरू हो गई है। 85 गांवों में जर्जर तार बदले जाएंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जर्जर तारों को बदलने के लिए मध्य प्रदेश की एक एजेंसी नामित की गई है। एजेंसी के माध्यम से जिले में अलग-अलग तीन स्थानों पर जर्जर तार बदलने का काम चल रहा है। जर्जर तार खंभों से उतारकर उसके स्थान पर (पीवीसी) प्लास्टिक कोटेड तार लगाए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो गांवों में पीवीसी लगाए जाने से घटनाएं तो रुकेगी ही, साथ ही कटियामारी पर रोक लगने से बिजली की खपत भी कम होगी।
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जर्जर तारों को बदलने के लिए पूर्व में सर्वे कराया गया था। सर्वे में 406 गांव और मजरों के तार जर्जर मिले थे। इनमें से 300 से अधिक गांवों में पीवीसी लगाने का काम चल रहा है। - एसके सिंह, एक्सईएन-राबर्ट्सगंज।
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