आश्चर्य लेकिन सत्य: लापता बेटे के लौटने की छोड़ चुके थे उम्मीद,15 साल बाद अचानक लौटा , परिजनों के छलके आंसू
सोनभद्र के बहुआर निवासी अमर सिंह गोंड का बड़ा पुत्र मुलायम 15 साल पहले अचानक घर से लापता हो गया था। इतने वर्षों में लोग उसे भूल भी गए थे। अचानक रविवार को वह अपने घर पहुंचा तो सभी हैरान रह गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूपी के सोनभद्र जिले के बहुआर गांव के आदिवासी अमर सिंह गोंड के लिए पंजाब पुलिस के एएसआई सुखविंदर सिंह बदेसा किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। 15 साल पहले लापता हुए जिस बेटे की अमर सिंह ने वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी, वह सुखविंदर सिंह की पहल से सकुशल घर लौट आया है।
लापता बेटे को अपने सामने पाकर अमर और उनकी पत्नी फफक पड़े। लाल को गले से लगाकर उनकी आंखों से निर्झर अश्रुधार बहती रही। वह सुखविंदर सिंह का आभार जताते रहे तो कभी ईश्वर का शुक्रिया अदा करते। इस भावुक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर कोई भाव विह्वल हो गया।
घर से ही गायब हुआ था मुलायम
बहुआर के चरघरवा टोला निवासी अमर सिंह गोंड का बड़ा पुत्र मुलायम 15 साल पहले अचानक घर से लापता हो गया। वह किसी तरह पंजाब के अमृतसर पहुंचा। वहां ठेकेदार के माध्यम से वह दिहाड़ी मजदूरी करने लगा। उधर, बेटे के लापता होने के बाद अमर सिंह उसकी तलाश में जुटे रहे। हर संभावित स्थानों पर तलाश के बाद भी कहीं कोई जानकारी न मिलने पर वह हिम्मत हार चुके थे।
साल दर साल बीतने के साथ बेटे के घर लौटने की हर उम्मीद टूटती गई। इस बीच रविवार को जब अचानक बेटा उनके सामने आया तो वह हैरान रह गए। उनकी खुशियों का कोई ठिकाना ही नहीं था। मां-बाप अपने बेटे को गले लगाकर चूमते रहे।
बेटा भी अपने मां-बाप को पाकर आह्लादित हो उठा। बचपन की पुरानी यादें उनकी आंखों के सामने ताजा हो गई। मां-बाप और बेटे के मिलन का यह दृश्य भावुक करने वाला था। मौके पर नगवां ब्लाक प्रमुख आलोक सिंह, प्रधान सुरेश शुक्ल, राजकुमार, गिरीश पांडेय, सूर्यकांत चौबे, मनोज दुबे आदि ने सुखविंदर सिंह बदेसा को साधुवाद दिया।
ऐसे घर तक पहुंचा मुलायम
पंजाब से मुलायम को अपने साथ लेकर पहुंचे एएसआई सुखविंदर सिंह बदेसा ने बताया कि 10 फरवरी को मुलायम ठेकेदार के माध्यम से उनके अमृतसर घर पर काम करने आया। काम करते हुए मोबाइल पर वह सैड सांग सुनता था। सुखविंदर ने मुलायम से उसकी तकलीफ जानने की कोशिश की तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।
मुलायम ने बताया कि उसके पिता का नाम अमर सिंह है। वह झारखंड, सोनभद्र तो बता रहा था लेकिन गांव का नाम भूल चुका था। उसे टोला चरघरवा का नाम याद था। इसी आधार पर सुखविंदर सिंह ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर कई लोगों से बात की। बेहतर रिस्पांस नहीं मिला, मगर वह हार नहीं माने।
सोशल मीडिया पर सोनभद्र मे चरघरवा की तलाश करते हुए पूर्वांचल नव निर्माण मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गिरीश पांडेय का नंबर निकाला और उनसे बात की और पूरा वाकया बताया। इसे गंभीरता से लेते हुए मंच के गिरीश ने मुलायम के घरवालों की तलाश शुरू की। इसमें वरिष्ठ पत्रकार विनय सिंह चंदेल की भूमिका भी सराहनीय रही।
अमौली के प्रधान सुरेश शुक्ला और बसौली के प्रधान अवधेश गुप्ता से बात करने पर जानकारी हुई कि बहुआर गांव में चरघरवा टोला है। फिर क्या था प्रधान सुरेश शुक्ला मुलायम के घर पहुंचे और मुलायम के गायब होने की पुष्टी की। वीडियो के आधार पर अपने परिजनों की पहचान मुलायम ने कर ली। इसके बाद सुखविंदर सिंह बदेसा ने खुद मुलायम को लेकर 12 मार्च की रात राबर्ट्सगंज पहुंचे।