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गर्भवती महिलाओं को मिलेगा भोजन
सोनभद्र
Updated Sun, 03 Jul 2016 11:52 PM IST
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हौसला पोषण योजना के तहत जिले की 24223 गर्भवती महिलाओं को दोपहर का भोजन मुफ्त में मिलेगा। सप्ताह में एक दिन उन्हें दूध भी दिया जाएगा। ताकि महिलाएं और बच्चे स्वस्थ रहे। प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भोजन बनवाएंगी। इसके लिए मुख्य सचिव (उत्तर प्रदेश शासन) आलोक रंजन ने डीएम को निर्देश जारी किया है।
सूबे के एक छोर पर बसे अतिनक्सल प्रभावित सोनभद्र जिले में 1825 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 30 जून 2016 तक 24223 गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2005-06 के अनुसार प्रदेश में हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया (हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम) से ग्रसित है।
जबकि एक गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान 2600 ग्राम प्रोटी एवं 82 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। हालांकि कुपोषण के रोकथाम हेेतु गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर समेकित पोषण कार्यक्रम के तहत दैनिक रूप से निर्धारित मानकों के अनुसार पका-पकाया भोजन खिलाया जाएगा। ताकि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार कर नवजात शिशु को कुपोषण से मुक्त रखा जा सकें।
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भोजन पकवाने और गर्भवती महिलाओं को भोजन कराने का उत्तरदायित्व ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की होगी। कार्यक्रम के संचालन हेतु प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र के लिए समीपवर्ती सीबीएस बैंक (कोर बैकिंग सिस्टम) ब्रांच में एक बचत खाता खोला जाएगा, जिसका संचालन प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा किया जाएगा। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि जुलाई माह के अंत तक सभी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को भोजन मिलने लगेगा। प्रतिदिन प्रत्येक गर्भवती महिला के डायट के लिए 18 रुपये निर्धारित किया गया है।
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सूबे के एक छोर पर बसे अतिनक्सल प्रभावित सोनभद्र जिले में 1825 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 30 जून 2016 तक 24223 गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2005-06 के अनुसार प्रदेश में हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया (हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम) से ग्रसित है।
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जबकि एक गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान 2600 ग्राम प्रोटी एवं 82 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। हालांकि कुपोषण के रोकथाम हेेतु गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर समेकित पोषण कार्यक्रम के तहत दैनिक रूप से निर्धारित मानकों के अनुसार पका-पकाया भोजन खिलाया जाएगा। ताकि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार कर नवजात शिशु को कुपोषण से मुक्त रखा जा सकें।
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भोजन पकवाने और गर्भवती महिलाओं को भोजन कराने का उत्तरदायित्व ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की होगी। कार्यक्रम के संचालन हेतु प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र के लिए समीपवर्ती सीबीएस बैंक (कोर बैकिंग सिस्टम) ब्रांच में एक बचत खाता खोला जाएगा, जिसका संचालन प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा किया जाएगा। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि जुलाई माह के अंत तक सभी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को भोजन मिलने लगेगा। प्रतिदिन प्रत्येक गर्भवती महिला के डायट के लिए 18 रुपये निर्धारित किया गया है।