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खनन क्षेत्र में अब नहीं सूखेंगे लगाए गए पौधे

Thu, 09 Jul 2020 10:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 10:33 PM IST
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Plants planted will no longer dry in the mining sector
एनसीएल निगाही में ग्रेविटी ड्रीप सिंचाई प्रणाली को स्थापित करने में जुटे कर्मी। - फोटो : SONBHADRA
शक्तिनगर। भारत सरकार की मिनी रत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने कोल निकासी के निमित मिट्टी और वनस्पति को हटाने से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाली हानि से बचाने के लिए एक नवाचारी योजना पर कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है 7
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पहले चरण में परिक्षण के तहत ग्रेविटी ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के उपयोग से कोयले के खनन के कारण हटाए गए ओवर बर्डन डंप की ढलान पर स्थानीय प्रजातियों के रोपण के साथ निगाही (सिंगरौली) क्षेत्र के मूल फ्लोरा और फॉना को पुनर्रस्थापित किया गया है । अभी तक परिणाम सुखद हैं और दूसरे चरण में इस प्रणाली का परीक्षण पास की दूसरी एनसीएल की खदान में शीघ्र होगा। पूर्व के अनुभवों से पता चलता है , मानसून के दौरान डंप स्लोप पर लगाए गए वृक्ष स्लोप, ढीली मिट्टी तथा मृदा क्षरण के चलते अच्छी तरह से जड़ पकड़ने में कम से कम तीन से पांच वर्ष का समय लेते हैं तथा इसी बीच कई वृक्ष सूख जाते हैं। समय पर पौधों को निर्धारित मात्रा में पोषक तत्व व सिंचाई न होने सें भी इनकी बढ़ोतरी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसको ध्यान मे रखते हुए एनसीएल द्वारा जैव पुनर्विकास की इस ग्रेविटी ड्रिप इरिगेशन आधारित प्रणाली पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य प्रारम्भ किय है ताकि पौधे एक वर्ष के भीतर, अगले मॉनसून के आने से पहले ही जड़ पकड़ लें तथा पौधों में भारी बारिश कि स्थिति में भी मिट्टी को बांध कर रखने कि क्षमता विकसित हो सके। एनसीएल निगाही क्षेत्र में यह कार्य एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अधिभार हटाव डंप पर दो से तीन- हेक्टेयर क्षेत्र पर किया गया है। इसके लिए पौधों की ऐसी प्रजातियों का रोपण किया गया है जो निगाही क्षेत्र की पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल हैं ताकि स्थानीय फ़्लोरा और फॉना में कोई बदलाव न हो और साथ ही ये प्रजातियां मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकें।
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