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सोनभद्र: प्रदूषण से प्रभावित लोगों को मुआवजा, एनजीटी ने गठित की हाईपावर कमेटी, गांव-गांव जाकर लिए जाएंगे दावे

Fri, 09 Oct 2026 09:49 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 09 Oct 2026 09:49 AM IST
सार

सोनभद्र में प्रदूषण से प्रभावित लोगों को मुआवजे के लिए एनजीटी ने हाईपावर कमेटी गठित की। मामले में 22 सितंबर को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव वाली प्रधान पीठ ने सुनवाई की थी। पांच अक्तूबर को आदेश जारी हुआ। 
 

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People affected by pollution in Sonbhadra to receive compensation NGT constitutes high-powered committee
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोनभद्र जिले के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण के पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के मामले में दाखिल याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर उच्चस्तरीय (हाईपावर) कमेटी गठित की गई है। 22 सितंबर को प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की प्रधान पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। पीठ ने सोनभद्र में प्रदूषण से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य नुकसान के लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था। यह आदेश पांच अक्तूबर को सामने आया।

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एनजीटी के आदेश के क्रम केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। कमेटी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), एम्स भोपाल, राष्ट्रीय व्यावसायिक स्वास्थ्य संस्थान (एनआईओएच), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) और एमओईएफएंडसीसी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

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कमेटी गांव-गांव जाकर प्रदूषण से प्रभावित लोगों से दावे लेगी और बीमारी की गंभीरता के आधार पर क्षतिपूर्ति तय करने की प्रक्रिया पूरी करेगी। एनजीटी ने प्रभावित आबादी के लिए आसानी से पहुंच योग्य स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से युक्त मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आयुष्मान कार्ड के साथ प्रभावित आबादी को सरकारी अस्पतालों और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसलिए क्षतिपूर्ति की आवश्यकता नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि यह रुख स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव झेल रहे लोगों को मुआवजा देने से इन्कार करने जैसा है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।

वर्ष 2024 में सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर सोनभद्र में स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रदूषण के प्रभाव का अध्ययन कराने, प्रभावित लोगों को राहत देने और वर्ष 2018 में पारित आदेश में दिए गए सुझावों का सख्ती से अनुपालन कराने की मांग की थी। इसके बाद एम्स भोपाल की टीम ने अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें प्रदूषण प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर बताई गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने एम्स की रिपोर्ट को अपर्याप्त बताया था।
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10 लाख की आबादी प्रदूषण से प्रभावित
सोनभद्र जिले में लगभग 10 लाख की आबादी प्रदूषण से प्रभावित है। विभिन्न जांच रिपोर्ट के अनुसार, कोन, बभनी, म्योरपुर और दुद्धी ब्लॉक के लगभग 276 गांवों की दो लाख से अधिक आबादी गंभीर रूप से प्रदूषण की चपेट में है। वायु, जल और मृदा तीनों में गंभीर प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए सोनभद्र और इससे सटे सिंगरौली क्षेत्र को देश के अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। एनजीटी की ओर से गठित कोर कमेटी ने वर्ष 2014-15 के अध्ययन में माना था कि सोनभद्र के 276 गांवों की दो लाख से अधिक आबादी गंभीर संकट (अत्यधिक फ्लोराइड व अन्य भारी धातुओं के प्रदूषण) का सामना कर रही है।

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ऐसे तय होगी क्षतिपूर्ति
कमेटी की उप समिति प्रत्येक प्रभावित गांव में शिविर लगाएगी। शिविर की तारीख, समय और स्थान की पूर्व सूचना दी जाएगी। ग्रामीण अपने दावे और उनके समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज या अन्य सामग्री समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके लिए निर्धारित प्रारूप होगा। हालांकि, किसी पीड़ित के निर्धारित प्रारूप में दावा प्रस्तुत नहीं करने पर केवल इसी आधार पर उसका आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आवेदक की स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी की जांच चिकित्सा विशेषज्ञों से कराई जाएगी। 

दावे पर राज्य के अधिकारियों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। उपलब्ध दस्तावेजों और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के आधार पर स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता तय की जाएगी। मामलों को गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा। क्षतिपूर्ति तय करते समय बीमारी की गंभीरता, उसका अस्थायी या स्थायी स्वरूप, पीड़ित की आयु और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।

प्रभावितों के लिए स्थापित होगा मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल
कमेटी की गांववार रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर राज्य के अधिकारी चार सप्ताह के भीतर अपनी प्रतिक्रिया दे सकेंगे। इस बीच प्रभावित लोगों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को प्रभावित गांवों के लोगों की पहुंच वाले स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से युक्त मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने का निर्देश दिया है।

अधिकारी बोले

एनजीटी के आदेश के इस संबंध में दिशा-निर्देश अभी आना बाकी है। उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलते ही उप समिति के गठन सहित अन्य प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। -इं. आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

वर्षों से प्रदूषण का दुष्प्रभाव झेल रहे सोनभद्र के लोगों के लिए एनजीटी का यह निर्देश महत्वपूर्ण है। एनजीटी और संबंधित समिति के सामने देश के नामचीन विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हमारी टीम समिति के सहयोग के लिए तत्पर है। -रामेश्वर प्रसाद, संयोजक, सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी

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