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Sonebhadra News: सरकारी अस्पतालों से मरीजों की चोरी, दलाल बरगलाकर पहुंचा रहे निजी अस्पताल
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सोनभद्र। जिले के सरकारी अस्पतालों में दवा-उपचार कराने आने वाले मरीजों की चोरी हो रही है। कहीं भर्ती होने वाले मरीजों को दलालों का नेटवर्क गुपचुप तरीके से निजी अस्पताल पहुंचा रहा है तो कहीं उन्हें सरकारी अस्पताल की खराब सेवा का हवाला देकर चिह्नित अस्पतालों में भेजा जा रहा है। पिछले तीन दिनों में ही ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जिसमें मरीजों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई है। इन मामलों में सीसी टीवी फुटेज भी भर्ती मरीजों को गुपचुप तरीके से सरकारी अस्पताल से ले जाने की कहानी बयां कर रहे हैं।
कोन में 18 दिन पूर्व अवैध अस्पताल में प्रसव के लिए लाई गई आशा की मौत और डीएम के कड़े निर्देश के बाद भी मानकों-चिकित्सा व्यवस्थाओं की अनदेखी कर संचालित हो रहे अस्पतालों के प्रति उदासीनता बनी हुई है। अब दुद्धी में सीसी टीवी फुटेज में कैद हुई सीएचसी से मरीज की चोरी और मौत के बाद शव लाकर सीएचसी के मत्थे मढ़ने की कोशिश के मामले में भी तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।
पहले मरीज को ले गए, फिर मौत के बाद लाकर लिटा दिया
दुद्धी में सीएचसी अधीक्षक के तहरीर देने के बाद भी अवैध अस्पतालों का संचालन का सिलसिला थम नहीं रहा है। गत मार्च में नेशनल अस्पताल के संचालक से इसी मसले पर सीएचसी अधीक्षक की झड़प हुई थी। प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जेल भी भेजा था। लेकिन नए नाम से रजिस्ट्रेशन पाए अस्पताल के लोगों की पहुंचे सीएचसी में बनी रही। उसी अस्पताल में 15 जून को रामविचार (26) की मौत के बाद अस्पताल का सीसी टीवी फुटेज सामने आया है। रात लगभग पौने तीन बजे मरीज को कार से ले जाना और मौत के बाद सुबह छह बजे बाइक से सीएचसी लाकर स्ट्रेचर पर लिटाकर चले जाना दिख रहा है। लोगों का दावा है कि अंधेरा गहराते ही एक निजी एंबुलेंस सीएचसी गेट के पास खड़ी हो जाती है। किसी न किसी मरीज को यहां से उठा लिया जाता है। प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह के मुताबिक नोडल और सीएचसी अधीक्षक की तहरीर पर एमके हॉस्पिटल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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सरकारी प्रसव केंद्र गए, वहां से भेज दिया गया निजी अस्पताल
एक मामला केकराही में भी सामने आया है। प्रसूता संतोषी के पति रामजी ने करमा पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि वह पत्नी को प्रसव के लिए 17 जून को जड़ेरुआ स्थित प्रसव केंद्र ले गए थे। वहां ड्यूटी पर तैनात नर्स चिंता ने मेडिसिटी हॉस्पिटल केकराही फोन कर एंबुलेंस बुलाया। वहां पहुंचने पर जैसे ही ऑपरेशन किया गया, हालत बिगड़ने लगी। ऑपरेशन में लापरवाही के चलते 18 जून को जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। प्रभारी निरीक्षक सूर्यभान ने बताया कि लापरवाही से ऑपरेशन-उपचार के चलते मौत के आरोप में मेडिसिटी हॉस्पिटल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
18 दिनों में 4 की मौत, फिर भी बनी हुई है चुप्पी
कहीं ऑन काल डॉक्टर तो कहीं बगैर डिग्री वाले कथित डॉक्टरों की लापरवाही के चलते अक्सर निजी अस्पतालों में जान जा रही है। महज 18 दिन के भीतर कोन-केकराही में एक-एक प्रसूता, दुद्धी में युवक और मुख्यालय पर वृद्धा की मौत हो चुकी है। पिछले दो माह के भीतर भी मुख्यालय पर उपचार के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष भी मुख्यालय पर महज दो माह के भीतर प्रसूता सहित दो की मौत, कोन में अवैध अस्पताल में बालक की मौत, दुद्धी में दो प्रसूता सहित जिले के अन्य हिस्सों में मरीजों की मौत का मामला सामने आ चुका है। अवैध अस्पताल का मामला सामने आने के बाद नए नाम से रजिस्ट्रेशन के चलते मौत का यह खेल लगातार बना हुआ है।
प्राथमिकी के बाद साध लेते हैं चुप्पी :
दुद्धी में देव हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। राधारानी हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद तहरीर दी गई थी। कोन में भारत हॉस्पिटल में भी मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कोन के बाद दुद्धी और अब केकराही में भी मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई लेकिन अवैध व मानक विहीन अस्पतालों के संचालन पर अंकुश का मामला अनसुलझा पड़ा है।
कलेक्ट्रेट में पहुंचकर किया प्रदर्शन
केकराही मामले को लेकर लोगों में गुस्से की स्थिति रही। जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान तो लोगों ने नाराजगी तो जताई ही कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन भी किया। कहा कि लगातार जिले में मौतें हो रही है लेकिन स्वास्थ्य महकमा उदासीनता बरत रहा है। जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप उदासीनता बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई।
मेडिसिटी हॉस्पिटल पहुंची टीम तो नदारद मिला स्टाफ, दूसरे अस्पताल में बिना डॉक्टर के भर्ती थे मरीज :
डीएम के निर्देश पर शुक्रवार की दोपहर डिप्टी सीएमओ डॉ. गुरु प्रसाद और प्रभारी निरीक्षक करमा सूर्यभान की अगुवाई वाली टीम केकराही के मेडिसिटी हॉस्पिटल पहुंची तो डॉक्टर-स्टाफ नदारद मिले। ताला जड़ने के साथ ही प्रसूता की मौत मामले में नोटिस चस्पा करते हुए जवाब मांगा गया। यहां के बाद टीम न्यू उपकार हॉस्पिटल पहुंची यहां भी काेई चिकित्सक नहीं मिला। लेकिन तीन मरीज भर्ती किए गए थे। एक नर्स मौजूद मिली। डॉ. प्रसाद ने बताया कि अस्पताल संचालक को नोटिस दिया गया है। कार्रवाई के आख्या सीएमओ को दी जाएगी।
दोनों अस्पतालों को सील कर दिया गया है। प्राथमिकी भी दर्ज कराई जा चुकी है। नोडल को ऐसे अस्पतालों के खिलाफ लगातार अभियान-कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. रमेश कुमार मिश्र, सीएमओ
स्टाफ की कमी और सुरक्षा गार्ड न होने से निजी अस्पताल के लोग कब आते हैं कब मरीज को लेकर चले जाते हैं पता ही नहीं चल पाता। एक निजी एंबुलेंस भी बीच-बीच में गेट के पास खड़ी दिखती है। इस पर अंकुश के लिए वह पूर्व में पत्र लिख चुके हैं। सुरक्षा के लिए गार्ड की भी मांग की गई थी। स्टॉफ की कमी दूर करने और गार्ड उपलब्ध कराने के लिए दोबारा पत्र लिखा जा रहा है। - डॉ. शाहआलम अंसारी, अधीक्षक सीएचसी दुद्धी।
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कोन में 18 दिन पूर्व अवैध अस्पताल में प्रसव के लिए लाई गई आशा की मौत और डीएम के कड़े निर्देश के बाद भी मानकों-चिकित्सा व्यवस्थाओं की अनदेखी कर संचालित हो रहे अस्पतालों के प्रति उदासीनता बनी हुई है। अब दुद्धी में सीसी टीवी फुटेज में कैद हुई सीएचसी से मरीज की चोरी और मौत के बाद शव लाकर सीएचसी के मत्थे मढ़ने की कोशिश के मामले में भी तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।
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पहले मरीज को ले गए, फिर मौत के बाद लाकर लिटा दिया
दुद्धी में सीएचसी अधीक्षक के तहरीर देने के बाद भी अवैध अस्पतालों का संचालन का सिलसिला थम नहीं रहा है। गत मार्च में नेशनल अस्पताल के संचालक से इसी मसले पर सीएचसी अधीक्षक की झड़प हुई थी। प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जेल भी भेजा था। लेकिन नए नाम से रजिस्ट्रेशन पाए अस्पताल के लोगों की पहुंचे सीएचसी में बनी रही। उसी अस्पताल में 15 जून को रामविचार (26) की मौत के बाद अस्पताल का सीसी टीवी फुटेज सामने आया है। रात लगभग पौने तीन बजे मरीज को कार से ले जाना और मौत के बाद सुबह छह बजे बाइक से सीएचसी लाकर स्ट्रेचर पर लिटाकर चले जाना दिख रहा है। लोगों का दावा है कि अंधेरा गहराते ही एक निजी एंबुलेंस सीएचसी गेट के पास खड़ी हो जाती है। किसी न किसी मरीज को यहां से उठा लिया जाता है। प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह के मुताबिक नोडल और सीएचसी अधीक्षक की तहरीर पर एमके हॉस्पिटल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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सरकारी प्रसव केंद्र गए, वहां से भेज दिया गया निजी अस्पताल
एक मामला केकराही में भी सामने आया है। प्रसूता संतोषी के पति रामजी ने करमा पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि वह पत्नी को प्रसव के लिए 17 जून को जड़ेरुआ स्थित प्रसव केंद्र ले गए थे। वहां ड्यूटी पर तैनात नर्स चिंता ने मेडिसिटी हॉस्पिटल केकराही फोन कर एंबुलेंस बुलाया। वहां पहुंचने पर जैसे ही ऑपरेशन किया गया, हालत बिगड़ने लगी। ऑपरेशन में लापरवाही के चलते 18 जून को जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। प्रभारी निरीक्षक सूर्यभान ने बताया कि लापरवाही से ऑपरेशन-उपचार के चलते मौत के आरोप में मेडिसिटी हॉस्पिटल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
18 दिनों में 4 की मौत, फिर भी बनी हुई है चुप्पी
कहीं ऑन काल डॉक्टर तो कहीं बगैर डिग्री वाले कथित डॉक्टरों की लापरवाही के चलते अक्सर निजी अस्पतालों में जान जा रही है। महज 18 दिन के भीतर कोन-केकराही में एक-एक प्रसूता, दुद्धी में युवक और मुख्यालय पर वृद्धा की मौत हो चुकी है। पिछले दो माह के भीतर भी मुख्यालय पर उपचार के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष भी मुख्यालय पर महज दो माह के भीतर प्रसूता सहित दो की मौत, कोन में अवैध अस्पताल में बालक की मौत, दुद्धी में दो प्रसूता सहित जिले के अन्य हिस्सों में मरीजों की मौत का मामला सामने आ चुका है। अवैध अस्पताल का मामला सामने आने के बाद नए नाम से रजिस्ट्रेशन के चलते मौत का यह खेल लगातार बना हुआ है।
प्राथमिकी के बाद साध लेते हैं चुप्पी :
दुद्धी में देव हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। राधारानी हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद तहरीर दी गई थी। कोन में भारत हॉस्पिटल में भी मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कोन के बाद दुद्धी और अब केकराही में भी मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई लेकिन अवैध व मानक विहीन अस्पतालों के संचालन पर अंकुश का मामला अनसुलझा पड़ा है।
कलेक्ट्रेट में पहुंचकर किया प्रदर्शन
केकराही मामले को लेकर लोगों में गुस्से की स्थिति रही। जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान तो लोगों ने नाराजगी तो जताई ही कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन भी किया। कहा कि लगातार जिले में मौतें हो रही है लेकिन स्वास्थ्य महकमा उदासीनता बरत रहा है। जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप उदासीनता बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई।
मेडिसिटी हॉस्पिटल पहुंची टीम तो नदारद मिला स्टाफ, दूसरे अस्पताल में बिना डॉक्टर के भर्ती थे मरीज :
डीएम के निर्देश पर शुक्रवार की दोपहर डिप्टी सीएमओ डॉ. गुरु प्रसाद और प्रभारी निरीक्षक करमा सूर्यभान की अगुवाई वाली टीम केकराही के मेडिसिटी हॉस्पिटल पहुंची तो डॉक्टर-स्टाफ नदारद मिले। ताला जड़ने के साथ ही प्रसूता की मौत मामले में नोटिस चस्पा करते हुए जवाब मांगा गया। यहां के बाद टीम न्यू उपकार हॉस्पिटल पहुंची यहां भी काेई चिकित्सक नहीं मिला। लेकिन तीन मरीज भर्ती किए गए थे। एक नर्स मौजूद मिली। डॉ. प्रसाद ने बताया कि अस्पताल संचालक को नोटिस दिया गया है। कार्रवाई के आख्या सीएमओ को दी जाएगी।
दोनों अस्पतालों को सील कर दिया गया है। प्राथमिकी भी दर्ज कराई जा चुकी है। नोडल को ऐसे अस्पतालों के खिलाफ लगातार अभियान-कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. रमेश कुमार मिश्र, सीएमओ
स्टाफ की कमी और सुरक्षा गार्ड न होने से निजी अस्पताल के लोग कब आते हैं कब मरीज को लेकर चले जाते हैं पता ही नहीं चल पाता। एक निजी एंबुलेंस भी बीच-बीच में गेट के पास खड़ी दिखती है। इस पर अंकुश के लिए वह पूर्व में पत्र लिख चुके हैं। सुरक्षा के लिए गार्ड की भी मांग की गई थी। स्टॉफ की कमी दूर करने और गार्ड उपलब्ध कराने के लिए दोबारा पत्र लिखा जा रहा है। - डॉ. शाहआलम अंसारी, अधीक्षक सीएचसी दुद्धी।