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Sonebhadra News: 40 दिन में सिर्फ 20 फीसदी हुई गेहूं की खरीद, केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
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सरकारी केंद्रों पर गेहूं खरीद इस बार जोर नहीं पकड़ पा रही। तमाम कोशिशों के बाद भी 40 दिनों में महज 20 फीसदी ही खरीद हो पाई है। गेहूं बेचने के लिए 8191 किसानों ने पंजीकरण कराया, मगर अब तक सिर्फ 1241 ही पहुंचे हैं।
धीमी गति के पीछे विभाग बाजार मूल्य अधिक होने को कारण बता रहा है। सरकारी केंद्रों पर गेहूं 2425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है, जबकि बाजार में किसानों को इससे 100 से 150 रुपये अधिक मिल रहा है।
किसानों काे उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में 78 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर 15 मार्च से खरीद आरंभ है। शासन की ओर से जिले को साढ़े 33 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है।
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पंजीकरण के बाद सत्यापन की बाध्यता खत्म कर दी गई है। गेहूं बिक्री के 72 घंटे के अंदर सीधे बैंक खाते में भुगतान दिया जा रहा है। मोबाइल केंद्रों के माध्यम से घर तक पहुंचकर गेहूं खरीदने का इंतजाम है। इन सुविधाओं के बावजूद क्रय केंद्राें पर किसान नहीं पहुंच रहे।
हाल यह है कि खरीद को 40 दिन बाद भी लक्ष्य का महज 20 फीसदी ही गेहूं खरीदा जा सका है। ज्यादातर क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। गोदाम खाली पड़े हुए हैं। केंद्र प्रभारी गांवों में जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं, बावजूद किसान सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने को राजी नहीं है।
बड़े किसान भी बस नाम मात्र का गेहूं सरकारी केंद्र पर दे रहे हैं। शेष मात्रा बाजार में बेच रहे हैं। जिले के 50 फीसदी से ज्यादा केंद्र पर 10 प्रतिशत भी गेहूं खरीद नहीं हो पाई है।
पड़ोसी राज्यों में भी ज्यादा रेट
सरकारी केंद्रों पर गेहूं न आने की बड़ी वजह बाजार भाव से रेट में अंतर को माना जा रहा है। केंद्रों पर 2425 रुपये प्रति क्विंटल का भाव है, जबकि बाजार में वही गेहूं 2500-2600 रुपये में बिक रहा है। यहां तक कि सीमावर्ती छत्तीसगढ़, झारखंड, मप्र में सरकार गेहूं के एमएसपी पर अतिरिक्त बोनस भी दे रही है, जिससे वहां का रेट यूपी से भी ज्यादा है। ऐसे में कारोबारी सीधे किसानों से गेहूं खरीदकर दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं।
जिले में अब तक 6600 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। यह आवंटित लक्ष्य का करीब 20 फीसदी है। सभी केंद्र प्रभारियों को किसानों से संपर्क कर खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बाजार रेट अधिक होने के कारण किसानों का रुझान उस ओर ज्यादा है। कालाबाजारी रोकने के लिए सभी तहसीलों में टीम गठित की गई है, जो लगातार जांच कर कार्रवाई भी कर रही है। -अमित चौधरी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी।
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धीमी गति के पीछे विभाग बाजार मूल्य अधिक होने को कारण बता रहा है। सरकारी केंद्रों पर गेहूं 2425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है, जबकि बाजार में किसानों को इससे 100 से 150 रुपये अधिक मिल रहा है।
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किसानों काे उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में 78 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर 15 मार्च से खरीद आरंभ है। शासन की ओर से जिले को साढ़े 33 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है।
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पंजीकरण के बाद सत्यापन की बाध्यता खत्म कर दी गई है। गेहूं बिक्री के 72 घंटे के अंदर सीधे बैंक खाते में भुगतान दिया जा रहा है। मोबाइल केंद्रों के माध्यम से घर तक पहुंचकर गेहूं खरीदने का इंतजाम है। इन सुविधाओं के बावजूद क्रय केंद्राें पर किसान नहीं पहुंच रहे।
हाल यह है कि खरीद को 40 दिन बाद भी लक्ष्य का महज 20 फीसदी ही गेहूं खरीदा जा सका है। ज्यादातर क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। गोदाम खाली पड़े हुए हैं। केंद्र प्रभारी गांवों में जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं, बावजूद किसान सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने को राजी नहीं है।
बड़े किसान भी बस नाम मात्र का गेहूं सरकारी केंद्र पर दे रहे हैं। शेष मात्रा बाजार में बेच रहे हैं। जिले के 50 फीसदी से ज्यादा केंद्र पर 10 प्रतिशत भी गेहूं खरीद नहीं हो पाई है।
पड़ोसी राज्यों में भी ज्यादा रेट
सरकारी केंद्रों पर गेहूं न आने की बड़ी वजह बाजार भाव से रेट में अंतर को माना जा रहा है। केंद्रों पर 2425 रुपये प्रति क्विंटल का भाव है, जबकि बाजार में वही गेहूं 2500-2600 रुपये में बिक रहा है। यहां तक कि सीमावर्ती छत्तीसगढ़, झारखंड, मप्र में सरकार गेहूं के एमएसपी पर अतिरिक्त बोनस भी दे रही है, जिससे वहां का रेट यूपी से भी ज्यादा है। ऐसे में कारोबारी सीधे किसानों से गेहूं खरीदकर दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं।
जिले में अब तक 6600 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। यह आवंटित लक्ष्य का करीब 20 फीसदी है। सभी केंद्र प्रभारियों को किसानों से संपर्क कर खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बाजार रेट अधिक होने के कारण किसानों का रुझान उस ओर ज्यादा है। कालाबाजारी रोकने के लिए सभी तहसीलों में टीम गठित की गई है, जो लगातार जांच कर कार्रवाई भी कर रही है। -अमित चौधरी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी।