Nikay Chunav Result: विधानसभा चुनाव में जहां मिली थी प्रचंड जीत, उसी क्षेत्र में हार गई भाजपा
यूपी नगर निकाय चुनाव में भाजपा को सोनभद्र जिले की पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। यह वह इलाके हैं, जहां एक वर्ष पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। महज एक साल में ही इस परिणाम पर पार्टी में मंथन शुरू हो गया है।
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यूपी नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने गहरे सबक दिए हैं। कई दिग्गजों को धराशाई कर दिया तो नए चेहरों को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। सत्ताधारी दल के लिए भी यह चुनाव चुनौतीपूर्ण रहा है। भाजपा को सोनभद्र जिले की पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इनमें से चार सीटें राज्यमंत्री संजीव सिंह गोंड के विधानसभा क्षेत्र की हैं, जबकि एक घोरावल की है। यह वह इलाके हैं, जहां एक वर्ष पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। महज एक साल में ही इस परिणाम पर पार्टी में मंथन शुरू हो गया है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की चारों सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया था। इसमें से घोरावल और ओबरा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को बड़ी जीत मिली थी, जबकि राबर्ट्सगंज और दुद्धी सीट पर अंतिम राउंड तक चले संघर्षपूर्ण मुकाबले के बाद भाजपा ने जीत हासिल की थी।
निकाय चुनाव का परिणाम इससे ठीक उलट आया है। राबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र में निकाय की दो सीटें हैं। नगर पालिका सोनभद्र से भाजपा ने अब तक के सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी को 15 हजार से अधिक मत मिले, वहीं निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही प्रत्याशी 8 हजार वोटों तक सिमट गईं।
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पार्टी के अंदरखाने में मंथन जारी
इसी विधानसभा क्षेत्र की चुर्क नगर पंचायत में भी भाजपा प्रत्याशी को बड़ी जीत मिली है। दुद्धी नगर पंचायत का परिणाम भी भाजपा के पक्ष में एकतरफा ही रहा। इनके अलावा पिपरी में भाजपा और चोपन में सहयोगी दल के प्रत्याशी जीते हैं। यह दोनों निकाय ओबरा विधानसभा क्षेत्र में हैं, जहां के विधायक सूबे की सरकार में राज्य मंत्री भी हैं। इसी क्षेत्र में आने वाले डाला, ओबरा, रेणुकूट और अनपरा नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशियों को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसमें डाला राज्यमंत्री का गृह नगर है, जबकि ओबरा भी उससे सटा है।
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घोरावल में भी दो बार से भाजपा विधायक को जीत मिली है। लोकसभा में भी यहां पार्टी का दबदबा रहा, लेकिन निकाय चुनाव में यहां बसपा का झंडा बुलंद हुआ है। महज एक साल में आए बदलावों पर पार्टी के अंदरखाने में मंथन जारी है। हार के कारणों को लेकर जनप्रतिनिधि अलग-अलग तर्क दे रहे हैं।
फूलवंती सबसे युवा चेयरमैन और विश्राम सबसे अनुभवी
सोनभद्र जिले की निकायों को इस बार युवा और ग्रेजुएट चेयरमैन मिले हैं। दस में से आठ निकायों के अध्यक्ष के पास स्नातक की डिग्री है। वहीं छह चेयरमैन ऐसे हैं, जिनकी उम्र 45 से कम है। डाला की फूलवंती सबसे युवा हैं तो अनपरा के विश्राम सबसे वरिष्ठ और अनुभवी हैं। नगर पालिका से निर्वाचित रूबी प्रसाद पहली चेयरमैन हैं, जिन्होंने विधानसभा में भी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।
निर्वाचन आयोग ने चेयरमैन का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु की सीमा 30 वर्ष निर्धारित की थी। नवसृजित डाला नगर पंचायत से निर्वाचित हुईं फूलवंती की उम्र भी ठीक 30 वर्ष ही है। इसी तरह जिले की सबसे बड़ी निकाय अनपरा ने चेयरमैन चुनने में भी उम्र और अनुभव का ध्यान रखा है। यहां से निर्वाचित हुए विश्राम बैसवार सबसे उम्रदराज चेयरमैन होंगे। उनकी आयु 61 वर्ष है।
दुद्धी से विधायक रह चुकीं रूबी अब नगर पालिका अध्यक्ष