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Sonebhadra News: समय से जांच और सही उपचार के बिना दम तोड़ रहे नवजात
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सोनभद्र। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित योजनाएं जिले में बेअसर साबित हो रही हैं। अस्पतालों में नवजात की मौत के आंकड़े कम नहीं हो रहे। इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान गर्भवतियों को समय से जांच न होने, आयरन की कमी आदि को जिम्मेदार माना जा रहा है।
आदिवासी बहुल जिले में स्वास्थ्य विभाग शासन से गर्भवतियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उन्हें मिल पा रहा। गर्भवतियों का समय से अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहा। स्वास्थ्य विभाग के दावों से इतर एनीमिया ग्रसित गर्भवती महिलाओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में समय पूर्व प्रसव और कमजोरी के कारण काफी संख्या में शिशुओं की मौत हो रही है।
जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रबंधक कार्यालय की एक रिपोर्ट बताती है कि जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी के एसएनसीयू में गत अप्रैल से नवंबर के बीच यहां 536 बच्चों को भर्ती कराया गया। इसमें में 117 बच्चों की मौत हो गई थी। तीन माह बाद ये आंकड़ा बढ़कर अधिक हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक एसएनसीयू में काफी कम ही बच्चे पहुंच पाते हैं। इनसे पहले ही जिले के विभिन्न इलाकों में बच्चे दम तोड़ देते हैं।
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लोढ़ी स्थित एमसीएच विंग, सीएचसी, पीएचसी के साथ ही उपकेंद्रों पर हर साल हजारों की संख्या में मौत हो रही है। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा शिशुओं के मौत पर गंभीर नहीं है। शिशुओं की मौत के पीछे मुख्य कारण जन्म समय से पहले या फिर जन्म के समय उनका वजन कम होना माना जा रहा है। प्रभारी सीएमओ डॉ. आरजी यादव ने कहा कि गर्भवतियों के स्वास्थ्य की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।
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आदिवासी बहुल जिले में स्वास्थ्य विभाग शासन से गर्भवतियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उन्हें मिल पा रहा। गर्भवतियों का समय से अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहा। स्वास्थ्य विभाग के दावों से इतर एनीमिया ग्रसित गर्भवती महिलाओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में समय पूर्व प्रसव और कमजोरी के कारण काफी संख्या में शिशुओं की मौत हो रही है।
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जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रबंधक कार्यालय की एक रिपोर्ट बताती है कि जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी के एसएनसीयू में गत अप्रैल से नवंबर के बीच यहां 536 बच्चों को भर्ती कराया गया। इसमें में 117 बच्चों की मौत हो गई थी। तीन माह बाद ये आंकड़ा बढ़कर अधिक हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक एसएनसीयू में काफी कम ही बच्चे पहुंच पाते हैं। इनसे पहले ही जिले के विभिन्न इलाकों में बच्चे दम तोड़ देते हैं।
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लोढ़ी स्थित एमसीएच विंग, सीएचसी, पीएचसी के साथ ही उपकेंद्रों पर हर साल हजारों की संख्या में मौत हो रही है। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा शिशुओं के मौत पर गंभीर नहीं है। शिशुओं की मौत के पीछे मुख्य कारण जन्म समय से पहले या फिर जन्म के समय उनका वजन कम होना माना जा रहा है। प्रभारी सीएमओ डॉ. आरजी यादव ने कहा कि गर्भवतियों के स्वास्थ्य की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।