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Sonebhadra News: नाबालिग से छेड़खानी और धमकी के मामले में मां-बेटे को मिली जमानत
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घोरावल थाना क्षेत्र में नाबालिग से मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपी मां-बेटे को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ओमकार शुक्ला की अदालत ने जमानत दे दी। सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की दो-दो जमानतें दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत मामले के अनुसार घोरावल थाना क्षेत्र की एक महिला ने गत 17 मई को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 17 वर्षीय बेटी को आजाद वर्ष 2023 में बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। इसकी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में युवक दोबारा उसकी बेटी से बातचीत करने लगा। इसकी जानकारी होने पर 16 मई को वह अपनी बेटी को लेकर युवक के घर पहुंची, जहां आरोपी आजाद के भाई अनिल और उसकी मां मीना ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। मामले में पुलिस ने अनिल व मीना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की गाली-गलौज, धमकी देने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। उनकी ओर से दाखिल जमानत अर्जी का अभियोजन ने विरोध करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया है और अभियोजन की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि अंतरिम जमानत के दौरान आरोपियों ने उसका दुरुपयोग किया। अदालत ने यह भी माना कि आरोपित धाराओं में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। ऐसे में उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए सशर्त जमानत दी।
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अदालत के समक्ष प्रस्तुत मामले के अनुसार घोरावल थाना क्षेत्र की एक महिला ने गत 17 मई को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 17 वर्षीय बेटी को आजाद वर्ष 2023 में बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। इसकी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में युवक दोबारा उसकी बेटी से बातचीत करने लगा। इसकी जानकारी होने पर 16 मई को वह अपनी बेटी को लेकर युवक के घर पहुंची, जहां आरोपी आजाद के भाई अनिल और उसकी मां मीना ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। मामले में पुलिस ने अनिल व मीना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की गाली-गलौज, धमकी देने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। उनकी ओर से दाखिल जमानत अर्जी का अभियोजन ने विरोध करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया है और अभियोजन की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि अंतरिम जमानत के दौरान आरोपियों ने उसका दुरुपयोग किया। अदालत ने यह भी माना कि आरोपित धाराओं में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। ऐसे में उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए सशर्त जमानत दी।
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