फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   More than three thousand TB patients in the district, only 500 could be adopted

Sonebhadra News: जिले में तीन हजार से अधिक टीबी रोगी, सिर्फ 500 को ही लिया जा सका है गोद

Sun, 15 Sep 2024 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2024 12:22 AM IST
विज्ञापन
More than three thousand TB patients in the district, only 500 could be adopted
आदिवासी बहुल जिले में सामाजिक कार्यों का दावा करने वाली संस्थाएं तो खूब हैं, मगर टीबी उन्मूलन के लिए रोगियों को गोद लेने में कुछ ने ही रुचि दिखाई है। हाल यह है कि तीन हजार से अधिक टीबी रोगियों वाले जिले में महज 500 मरीजों को ही गोद लिया जा सका है।
विज्ञापन

सामाजिक संस्थाओं के अलावा राजनीतिक दल और सरकारी अधिकारी भी टीबी मरीजों को गोद लेने में उदासीन हैं। इससे न सिर्फ बीमारी का दायरा बढ़ रहा है, बल्कि मरीजों का बीमारी से उबरने का इंतजार भी लंबा होता जा रहा है।
विज्ञापन

गिट्टी, बालू और कोयला खदानों के साथ अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले बेतहाशा प्रदूषण के चलते सोनभद्र का चोपन से शक्तिनगर तक का क्षेत्र प्रदेश के उच्च प्रदूषित क्षेत्र में सूचीबद्ध है। जल, वायु और मिट्टी में प्रदूषण के चलते ही यहां टीबी के मरीजों की संख्या भी अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्ष 2023 में 3789 टीबी मरीज चिह्नित किए गए थे। इस वर्ष मरीजों की संख्या करीब तीन हजार तक हो चुकी है। सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान निरंतर जारी भी है।
पीएम मोदी के वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प के तहत टीबी रोगियों को सक्षम लोगों की ओर से गोद लेकर उनके पोषणयुक्त खानपान और समुचित देखभाल की पहल की गई थी।
विडंबना है कि तमाम सामाजिक संस्थाओं, संगठनों, औद्योगिक इकाइयों के बावजूद जिले में इस साल अब तक बमुश्किल पांच सौ मरीजों को ही गोद लिया जा सका है।
शेष मरीज खुद के भरोसे या विभाग से मिलने वाले पांच सौ रुपये के मासिक मदद राशि के सहारे पोषण युक्त खान-पान और दवा-उपचार की व्यवस्था कर बीमारी से उबरने में लगे हुए हैं।

इन संस्थाओं ने ही गोद लेने में दिखाई है रुचि
सबसे ज्यादा रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से टीबी रोगियों को गोद लिया गया है। संस्था ने अकेले 190 मरीजों की जिम्मेदारी ली है। इसके अलावा एनटीपीसी की ओर से 100 मरीजों को गोद लिया गया है। अन्य संस्थाओं में हिंडाल्को, लायंस क्लब, इनरव्हील क्लब ने भी रुचि दिखाई है। छह वर्ष से कम उम्र के 28 बच्चे बाल विकास विभाग की निगरानी में हैं। इनके अलावा अन्य संस्था मरीजों को गोद लेने में पीछे है। पिछले वर्ष राजनीतिक दलों की ओर से भी मरीजों को गोद लिया गया था। व्यापारी संगठन, एनजीओ, वरिष्ठ अधिकारियों, क्रशर प्लांट, कंपनियाें के सीएसआर की मदद से भी टीबी मरीजों का स्वास्थ्य सुधारा जा सकता है।

गोद लेकर बस करनी है निगरानी
टीबी मरीजों को गोद लेने की योजना के तहत सिर्फ उनके स्वास्थ्य की निगरानी का ही जिम्मा दिया जाता है। सामान्य टीबी के मरीजों को सरकार की ओर से निशुल्क दवा दी जाती है। इस दौरान गोद लेने वाला व्यक्ति मरीज की निगरानी करेगा कि उसने समय पर दवा खाई है या नहीं। समय-समय पर मरीजों को पौष्टिक भोजन से संबंधित खाद्य पदार्थ, कुछ आवश्यक चीज अपने स्तर से मुहैया करा सकता है।


चार दिन में मिले 20 नए मरीज
जिले में नौ सितंबर से सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान शुरू है। अभियान के दौरान शुरुआती चार दिनों में 20 नए मरीज चिह्नित किए गए हैं। इसमें ज्यादा मरीज फेफड़े की टीबी वाले ही हैं। मरीजों को ढूंढने के लिए विभाग की ओर से सभी स्वास्थ्य इकाइयों व निजी अस्पतालों पर निगरानी की व्यवस्था की गई है। सूचना देने वालों को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्था है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed