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खाद की बंदरबांट : पिछले साल से 45 हजार क्विंटल ज्यादा बांटी गई, फिर भी किसानों को नहीं मिली
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अमवार में यूरिया खाद वितरण कराते नायब तहसीलदार व लेखपाल।
- फोटो : संवाद
सोनभद्र। बदइंतजामी और खाद वितरण में मनमानी से किसान परेशान हैं खरीफ सीजन में पिछले साल 31 अगस्त तक जिले में 297410 क्विंटल खाद का वितरण हुआ था।
इस बार अगस्त के पहले पखवाड़े तक ही 3.40 लाख क्लिंटल से ज्यादा खाद बांटी जा चुकी है, बावजूद इसके किसानों के हाथ खाली हैं। समितियों पर रोज यूरिया, डीएपी के लिए लंबी कतारें लग रही हैं लेकिन भी खाद नहीं मिल रही।
बदइंतजामी और खाद वितरण में मनमानी किसानों पर भारी पड़ रही है। हालांकि विभाग समय से बारिश और खेती का रकबा बढ़ने को भी कारण बता रहा है।
खरीफ सीजन में धान जिले की मुख्य फसल है। इसके अलावा किसान मिर्च, टमाटर सहित अन्य फसलों की भी खेती करते हैं। बोवाई के वक्त डीएपी, एनपीके और अब यूरिया की के छिड़काव को फसलों की वृद्धि के लिए बेहतर माना जाता है।
इसी कारण किसान सहकारी समितियों से खाद लेने पहुंच रहे हैं। किसानों को सस्ते दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए जिले में 62 समितियां क्रियाशील हैं।
अधिकांश समितियों पर पहले डीएपी की किल्लत थी और अब यूरिया के लिए मारामारी मची हुई है। कई दिनों तक भटकने के बाद भी किसान समितियों से खाद नहीं ले पा रहे।
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इस बार अगस्त के पहले पखवाड़े तक ही 3.40 लाख क्लिंटल से ज्यादा खाद बांटी जा चुकी है, बावजूद इसके किसानों के हाथ खाली हैं। समितियों पर रोज यूरिया, डीएपी के लिए लंबी कतारें लग रही हैं लेकिन भी खाद नहीं मिल रही।
बदइंतजामी और खाद वितरण में मनमानी किसानों पर भारी पड़ रही है। हालांकि विभाग समय से बारिश और खेती का रकबा बढ़ने को भी कारण बता रहा है।
खरीफ सीजन में धान जिले की मुख्य फसल है। इसके अलावा किसान मिर्च, टमाटर सहित अन्य फसलों की भी खेती करते हैं। बोवाई के वक्त डीएपी, एनपीके और अब यूरिया की के छिड़काव को फसलों की वृद्धि के लिए बेहतर माना जाता है।
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इसी कारण किसान सहकारी समितियों से खाद लेने पहुंच रहे हैं। किसानों को सस्ते दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए जिले में 62 समितियां क्रियाशील हैं।
अधिकांश समितियों पर पहले डीएपी की किल्लत थी और अब यूरिया के लिए मारामारी मची हुई है। कई दिनों तक भटकने के बाद भी किसान समितियों से खाद नहीं ले पा रहे।
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