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मिल जाए बजट तो दौड़ पड़े कनहर परियोजना के सुरंग का काम
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सोनभद्र। जनपद और सीमा से सटे झारखंड के कई गांवों के लिए वरदान मानी जा रही कनहर सिंचाई परियोजना से जुड़े जलसेतु और सुरंग के कार्य को लेकर फंसा पेच दूर होने की स्थिति में आ गया है। करीब 2600 मीटर सुरंग के निर्माण के लिए वन विभाग से सैद्धांतिक सहमति तो मिल गई है लेकिन इसके लिए वन विभाग को दी जाने वाली धनराशि न मिल पाने के कारण सुरंग निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उधर, जलसेतु का निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए रेलवे की तरफ से मिलने वाले क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।
वर्ष 1976 से चल रहे कनहर परियोजना के निर्माण कार्य में अक्सर कोई न कोई पेच फंसता रहता है। वर्ष 2016 से तत्कालीन सपा सरकार की पहल के बाद परियोजना का निर्माण कार्य जोरशोर से शुरू किया गया। वर्ष 2017 में आई योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी इसे तेजी दी। दिसंबर 2020 तक कार्य पूर्ण करने की समयसीमा भी तय कर दी गई। बांध के मुख्य हिस्से का निर्माण कार्य भी जारी है। परियोजना का पानी जिले के 108 गांवों व झारखंड के सौ से अधिक गांवों तक पहुंचाने के लिए 1775 मीटर लंबे जलसेतु और 2600 मीटर लंबे सुरंग का भी निर्माण किया जाना है। इसका कार्य भी कराया गया है लेकिन वन विभाग से क्लीयरेंस न मिलने के कारण सुरंग का निर्माण कार्य लटका हुआ है। उधर, कार्यदायी संस्था एचईएस के महाप्रबंधक संजीव कुमार का कहना है कि कुछ माह पूर्व अधिकारियों के साथ हुई बैठक में वन विभाग की तरफ से सुरंग के निर्माण कार्य के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। इसके एवज में 53 करोड़ रुपये वन विभाग को देना है। प्रदेश सरकार को धनराशि आवंटन के लिए प्रस्ताव जा चुका है। धनराशि मिलते ही वन विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा। जलसेतु निर्माण कार्य के बारे में उनका कहना है कि रेलवे से क्लीयरेंस मिलना है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही यह प्रक्रिया भी पूरी हो जाने की उम्मीद है।
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वर्ष 1976 से चल रहे कनहर परियोजना के निर्माण कार्य में अक्सर कोई न कोई पेच फंसता रहता है। वर्ष 2016 से तत्कालीन सपा सरकार की पहल के बाद परियोजना का निर्माण कार्य जोरशोर से शुरू किया गया। वर्ष 2017 में आई योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी इसे तेजी दी। दिसंबर 2020 तक कार्य पूर्ण करने की समयसीमा भी तय कर दी गई। बांध के मुख्य हिस्से का निर्माण कार्य भी जारी है। परियोजना का पानी जिले के 108 गांवों व झारखंड के सौ से अधिक गांवों तक पहुंचाने के लिए 1775 मीटर लंबे जलसेतु और 2600 मीटर लंबे सुरंग का भी निर्माण किया जाना है। इसका कार्य भी कराया गया है लेकिन वन विभाग से क्लीयरेंस न मिलने के कारण सुरंग का निर्माण कार्य लटका हुआ है। उधर, कार्यदायी संस्था एचईएस के महाप्रबंधक संजीव कुमार का कहना है कि कुछ माह पूर्व अधिकारियों के साथ हुई बैठक में वन विभाग की तरफ से सुरंग के निर्माण कार्य के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। इसके एवज में 53 करोड़ रुपये वन विभाग को देना है। प्रदेश सरकार को धनराशि आवंटन के लिए प्रस्ताव जा चुका है। धनराशि मिलते ही वन विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा। जलसेतु निर्माण कार्य के बारे में उनका कहना है कि रेलवे से क्लीयरेंस मिलना है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही यह प्रक्रिया भी पूरी हो जाने की उम्मीद है।
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