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Sonebhadra News: नगवां के मयंक भूषण को मिली यूपीएससी में 804वीं रैंक
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शैक्षणिक सुविधाओं के लिहाज से अति पिछड़े नगवां ब्लॉक के मयंक भूषण सिंह पटेल ने सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल की है। उन्हें 804वीं रैंक प्राप्त हुई है। उन्हें छठवें प्रयास में यह सफलता हासिल हुई है। मंगलवार को परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद परिवार खुशी से झूम उठा।
नगवां ब्लॉक के डोरिया गांव निवासी मयंक भूषण सिंह पटेल शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई सेंट्रल हिंदू स्कूल वाराणसी से की। इसके बाद रुड़की आईआईटी से अप्लाईड मैथ मैटिक्स में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की।
वर्ष 2018 से वह सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। तीन बार मेंस और दो बार इंटरव्यू में असफलता के बाद इस बार उन्हें 804वीं रैंक प्राप्त हुई है। परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद दोस्तों, परिजनों ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी।
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मयंक भूषण के पिता स्व. कृष्णकांत सिंह का काफी पहले निधन हो चुका है। उनकी मां कुसुमलता देवी ने ही उनकी परवरिश की। खेती के अलावा वैनी में उनका पेट्रोल पंप भी संचालित है। मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और खास तौर से मां को दिया।
बताया कि शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य था। इसी उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित कर तैयारी की। असफलताओं से अपनी कमियों को पहचाना। फिर उसे दूर करते हुए तैयारी जारी रखी।
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नगवां ब्लॉक के डोरिया गांव निवासी मयंक भूषण सिंह पटेल शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई सेंट्रल हिंदू स्कूल वाराणसी से की। इसके बाद रुड़की आईआईटी से अप्लाईड मैथ मैटिक्स में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की।
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वर्ष 2018 से वह सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। तीन बार मेंस और दो बार इंटरव्यू में असफलता के बाद इस बार उन्हें 804वीं रैंक प्राप्त हुई है। परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद दोस्तों, परिजनों ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी।
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मयंक भूषण के पिता स्व. कृष्णकांत सिंह का काफी पहले निधन हो चुका है। उनकी मां कुसुमलता देवी ने ही उनकी परवरिश की। खेती के अलावा वैनी में उनका पेट्रोल पंप भी संचालित है। मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और खास तौर से मां को दिया।
बताया कि शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य था। इसी उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित कर तैयारी की। असफलताओं से अपनी कमियों को पहचाना। फिर उसे दूर करते हुए तैयारी जारी रखी।