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रामायण काल की थाती संजोए हैं माड़ा की गुफाएं
sonbhadra
Updated Wed, 07 Jun 2017 10:40 PM IST
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रावण माड़ा गुफा।
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प्राकृतिक सुषमा से भरपूर सोनभद्र और सिंगरौली में पर्यटन कारीडोर बनाकर महत्वपूर्ण स्थलों को विकसित करने की मांग उठने लगी है। जिले से सटे सिंगरौली के माड़ा में रामायण काल की थाती संजोए माड़ा की गुफाओं का प्रमुखता से जिक्र करते हुए केंद्रीय पर्यटन संस्कृति राज्य मंत्री डा. महेश शर्मा को पत्र भेजकर पहल की मांग की गई है। कहा है कि माड़ा को केंद्र बनाते हुए पहल को मूर्त रूप दिया जाए तो न केवल ऊर्जांचल की पर्यटन के मानचित्र पर अलग पहचान बनेगी बल्कि इससे सोनभद्र-सिंगरौली दोनों को लाभ होगा।
सोनभद्र और सीमावर्ती राज्यों की एरिया धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से काफी समृद्ध है। इसको देखते हुए अनपरा से महज चालीस से पचास किमी की दूरी पर रामायण काल के जीवंतता की जीती-जागती प्रमाण माड़ा की गुफाओं को केंद्र बनाकर सोनभद्र और सिंगरौली में पर्यटन कारीडोर विकसित करने की मांग उठाई जा रही है। मान्यता है कि रावण ने मंदोदरी के साथ इन्हीं गुफाओं में गंधर्व विवाह रचाया था। रावण माड़ा नामक गुफा में नटराजन की नृत्य करती मूर्ति, पत्थर ढोते वानरों के चित्र, देवी देवताओं के चित्र के साथ बने रहन सहन कक्ष भी प्राचीन सभ्यता की कहानी कहते नजर आते हैं।
माड़ा से चंद किमी की दूरी पर झिग्गा झरिया पर्यटन स्थल भी मन मोह लेता है। अखिल भारतीय उच्च तकनीकी शिक्षा एवं विकास समिति के अध्यक्ष एसके गौतम कहते हैं कि अगर पर्यटन कारीडोर विकसित कर दिया जाए तो जहां इसका सीधा वाराणसी से जुड़ाव हो जाएगा। वहीं ऐसे समय, जब बड़े शहरों में (बारिश के समय) पर्यटन उद्योग मंदी की मार झेलने होता है। उस समय यह बेहतर विकल्प साबित होगा।अजंता और एलोरा की गुफाओं से होती है माड़ा की तुलनाः माड़ा की गुफाएं सातवीं-आठवीं सदी की शैलोत्कीर्ण रॉक कट गुफाएं हैं जिनकी तुलना अजंता और एलोरा की गुफाओं से की जाती है। यह राक कट गुफाएं भारत की प्राचीन धरोहर है।
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सोनभद्र और सीमावर्ती राज्यों की एरिया धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से काफी समृद्ध है। इसको देखते हुए अनपरा से महज चालीस से पचास किमी की दूरी पर रामायण काल के जीवंतता की जीती-जागती प्रमाण माड़ा की गुफाओं को केंद्र बनाकर सोनभद्र और सिंगरौली में पर्यटन कारीडोर विकसित करने की मांग उठाई जा रही है। मान्यता है कि रावण ने मंदोदरी के साथ इन्हीं गुफाओं में गंधर्व विवाह रचाया था। रावण माड़ा नामक गुफा में नटराजन की नृत्य करती मूर्ति, पत्थर ढोते वानरों के चित्र, देवी देवताओं के चित्र के साथ बने रहन सहन कक्ष भी प्राचीन सभ्यता की कहानी कहते नजर आते हैं।
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माड़ा से चंद किमी की दूरी पर झिग्गा झरिया पर्यटन स्थल भी मन मोह लेता है। अखिल भारतीय उच्च तकनीकी शिक्षा एवं विकास समिति के अध्यक्ष एसके गौतम कहते हैं कि अगर पर्यटन कारीडोर विकसित कर दिया जाए तो जहां इसका सीधा वाराणसी से जुड़ाव हो जाएगा। वहीं ऐसे समय, जब बड़े शहरों में (बारिश के समय) पर्यटन उद्योग मंदी की मार झेलने होता है। उस समय यह बेहतर विकल्प साबित होगा।अजंता और एलोरा की गुफाओं से होती है माड़ा की तुलनाः माड़ा की गुफाएं सातवीं-आठवीं सदी की शैलोत्कीर्ण रॉक कट गुफाएं हैं जिनकी तुलना अजंता और एलोरा की गुफाओं से की जाती है। यह राक कट गुफाएं भारत की प्राचीन धरोहर है।
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