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Sonebhadra News: मलिया नदी सूखी, तटीय गांवों में गहराया पानी का संकट
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महुली। विंढमगंज थाना क्षेत्र में दर्जन भर गांवों के लिए लाइफलाइन माने जाने वाली मलिया नदी के पूरी तरह सूख जाने से तटीय गांवों में पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। फुलवार, महुली, पतरिहा, जोरुखाड़, घिवही, कोलीनडूबा, डूमरा आदि गांवों में हैंडपंप व कूंओं का जलस्तर नीचे खिसक जाने से मवेशियों के लिए भी पानी की स्थिति बड़ी भयावह हो गई है। पहाड़ों की तलहटी में स्थित नाले एवं पोखरों में पानी नहीं होने से वन्य जीव भी पानी की टोह में बस्तियों तक दस्तक देने लगे हैं, जिससे ग्रामीण भयभीत हैं।
जोरुखाड़ ग्राम प्रधान विमल यादव ने बताया कि जंगल व पहाड़ों के बीच करीब डेढ़ सौ की आबादी वाले सोन नगर बस्ती में कोई हैंडपंप नहीं होने से यहां प्रतिदिन टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है। सामान्य दिनों में यहां लोग पहाड़ी नाले व नदी के पानी का सेवन करते हैं। पतरिहा ग्राम के क्षेत्र पंचायत सदस्य राम नरेश सिंह पठारी ने कहा कि मलिया नदी का जल प्रवाह सूख जाने के कारण मवेशियों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। डूमरा गांव में कुआं एवं बोरिंग सूख जाने के बाद ग्रामीणों ने मलिया नदी में जेसीबी से जगह-जगह गहरे गड्ढ़े खोदकर सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था की है। महुली में मलिया नदी पर स्थापित पेयजल संयंत्र से आधा दर्जन गांवों में होने वाली पेयजल सप्लाई की व्यवस्था चरमरा जाने से ग्रामीणों को बमुश्किल दो से चार बाल्टी पानी ही मयस्सर हो पा रहा है। इससे बस्तियों में हैंडपंप पर पानी लेने के लिए प्राय: किचकिच मची रहती है। महुली ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल ने बताया कि मलिया नदी में पानी टंकी के पास गड्ढ़ा खोदकर पेयजल सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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जोरुखाड़ ग्राम प्रधान विमल यादव ने बताया कि जंगल व पहाड़ों के बीच करीब डेढ़ सौ की आबादी वाले सोन नगर बस्ती में कोई हैंडपंप नहीं होने से यहां प्रतिदिन टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है। सामान्य दिनों में यहां लोग पहाड़ी नाले व नदी के पानी का सेवन करते हैं। पतरिहा ग्राम के क्षेत्र पंचायत सदस्य राम नरेश सिंह पठारी ने कहा कि मलिया नदी का जल प्रवाह सूख जाने के कारण मवेशियों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। डूमरा गांव में कुआं एवं बोरिंग सूख जाने के बाद ग्रामीणों ने मलिया नदी में जेसीबी से जगह-जगह गहरे गड्ढ़े खोदकर सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था की है। महुली में मलिया नदी पर स्थापित पेयजल संयंत्र से आधा दर्जन गांवों में होने वाली पेयजल सप्लाई की व्यवस्था चरमरा जाने से ग्रामीणों को बमुश्किल दो से चार बाल्टी पानी ही मयस्सर हो पा रहा है। इससे बस्तियों में हैंडपंप पर पानी लेने के लिए प्राय: किचकिच मची रहती है। महुली ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल ने बताया कि मलिया नदी में पानी टंकी के पास गड्ढ़ा खोदकर पेयजल सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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