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Sonebhadra News: बिरसा मुंडा वनवासी विद्यापीठ केंद्र प्रमुख को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया आरोपों को खारिज

Thu, 20 Aug 2026 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:42 PM IST
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Major relief for the head of the Birsa Munda Vanvasi Vidyapeeth; court dismisses the charges
सोनभद्र। आरएसएस से जुड़े बभनी क्षेत्र के कारीडाड़ (चपकी) स्थित बिरसा मुंडा वनवासी विद्यापीठ सेवा कुंज आश्रम के केंद्र प्रमुख पर लगाए गए आरोपों को न्यायालय ने खारिज करते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। प्रकरण में आश्रम में पढ़ने वाले एक बच्चे ने अश्लील हरकत का आरोप लगाया था। न्यायालय से पारित आदेश पर बभनी पुलिस ने नौ अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान आरोप साबित न होने पर 25 मई 2025 को अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। वादी पक्ष की आपत्ति के बाद लगभग एक साल सुनवाई चली। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओंकार शुक्ला की अदालत ने पाया कि जांच में जो तथ्य सामने आए वह सही हैं। बभनी क्षेत्र के एक नाबालिग की मां का आरोप था कि केंद्र प्रमुख कृष्ण गोपाल ने उनके 12 वर्षीय बेटे को बुलाकर अश्लील हरकत की। धमकी भी दी थी कि अगर उसने किसी से बताया तो जान से मार दिया जाएगा। दावा किया गया कि घटना 5 जनवरी 2025 की है। प्रकरण में क्षेत्रीय विधायक के कहने पर पुलिस अधीक्षक से मिलकर शिकायत का जिक्र भी किया था। बावजूद इसके कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली थी। पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच की। पीड़ित, उसकी मां के साथ नाबालिग के साथ पढ़ने वाले अन्य बच्चों के भी बयान दर्ज किए गए। जिसके मोबाइल से मां को घटना की जानकारी देने की बात कही गई, उसका सीडीआर निकाला गया। आरोप साबित न होने पर अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में भेज दी गई। वादी पक्ष के प्रोटेस्ट (आपत्ति पत्र) पर मामले की सुनवाई की गई। अदालत ने पाया कि पीड़ित ने एक व्यक्ति का फोन लेकर अपनी मां को कॉल करने की बात कही थी लेकिन सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) से यह साबित नहीं हो पाया कि पीड़ित की मां से कोई बातचीत हुई हो। अन्य साक्षियों ने आरोप को गलत बताया। कहा कि पीड़ित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह छुट्टी मांगने के बहाने बना रहा था। जिस समय की घटना का जिक्र किया गया है कि उस समय आरोपी बताए जा रहे व्यक्ति की तबीयत खराब थी और बच्चे स्वेच्छा से मालिश कर रहे थे। उनकी पत्नी भी वहां मौजूद थीं। अदालत ने पाया कि प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र के समर्थन में कोई ऐसा नवीन तथ्य या साक्ष्य सामने नहीं आया, जो विवेचना को त्रुटिपूर्ण ठहराता हो। न्यायालय ने कहा कि जिस तरह के साक्ष्य-जानकारियां सामने आई हैं उससे आरोपी के विरुद्ध संज्ञान लेने योग्य कोई अपराध नहीं बनता न ही विवेचना में कोई नहीं पाई गई। इसलिए प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को निरस्त करते हुए अंतिम रिपोर्ट स्वीकार की जाती है।
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