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माडा इको पार्क की वादियां उर्जांचल वासियों को कर रही आकर्षित

Fri, 01 Jan 2021 10:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2021 10:59 PM IST
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Mada Eco Park's attractions attract Urjunchal residents
अनपरा। प्राचीन काल की गुफाओं और आसपास के प्राकृतिक सौंदर्यता से परिपूर्ण सिंगरौली जिले के माड़ा जंगलों में स्थित माड़ा इको पार्क सिंगरौली और सोनभद्र के पर्यटकों को काफी आकर्षित कर रहा है। पर्यटकों के रुख करने से महज चंद महीनों में वन विभाग को लाखों रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।
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गौरतलब है कि माड़ा गुफा व आस-पास के इलाके को विकसित करने के साथ ही वन विभाग ने जुलाई 2019 में पर्यटकों के लिए इसे खोल दिया था। सोनभद्र के सीमावर्ती राज्यों के क्षेत्र धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक तीनों ही दृष्टि से काफी समृद्ध हैं। अनपरा से महज 65 किमी की दूरी पर रामायण काल के जीवंतता का जीता जागता प्रमाण माड़ा की गुफाएं हैं। मान्यता है कि रावण ने मंदोदरी के साथ इन्हीं गुफाओं में गंधर्व विवाह रचाया था। रावण माड़ा नामक गुफा में नटराजन की नृत्य करती मूर्ति, पत्थर ढोते वानरों के चित्र, देवी देवताओं के चित्र के साथ बने रहन सहन कक्ष भी प्राचीन सभ्यता की कहानी कहते नजर आते हैं। माड़ा से चंद किमी की दूरी पर झिग्गा झरिया भी पर्यटकों का मन मोह लेता है। अखिल भारतीय उच्च तकनीकी शिक्षा एवं विकास समिति के अध्यक्ष एस के गौतम कहते हैं कि अगर पर्यटन कारीडोर विकसित कर दिया जाए तो इसका सीधा जुड़ाव वाराणसी से हो जाएगा। वहीं ऐसे समय जब बड़े शहरों में (बारिश के समय) पर्यटन उद्योग मंदी की मार झेल रहे होते हैं, उस समय यह बेहतर विकल्प साबित होगा।
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अजंता और एलोरा की गुफाओं से होती है माड़ा की तुलना
माड़ा की गुफाएं सातवीं-आठवीं सदी की शैलोत्कीर्ण रॉक कट गुफाएं हैं जिनकी तुलना अजंता और एलोरा की गुफाओं से की जाती है। यह रॉक कट गुफाएं भारत की प्राचीन धरोहर हैं। वन अधिकारियों की मानें तो यहां कोरोना आपदा से पहले हर रोज 200 या इससे अधिक लोग पहुंचते रहे हैं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह में फिर से पर्यटन स्थल पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। तब से अब तक विभाग को 30 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है। जबकि मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के अंतिम सप्ताह तक चार महीने पर्यटन स्थल पूरी तरह से बंद रहा। जिससे वन विभाग को छह लाख से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ है। यह पैसा वन विभाग आसपास के पर्यटन स्थलों के विकास के रूप में खर्च कर रहा है।
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