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UP Politics: सात बार जीते विजय, फिर भी नहीं लगा सके हैट्रिक; इनके नाम दर्ज हैं ये रिकॉर्ड
Sat, 27 Apr 2024 11:54 AM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sat, 27 Apr 2024 11:54 AM IST
सार
UP Politics: सोनभद्र के दुद्धी विधानसभा के उपचुनाव की सरगर्मी जोरों पर है। मतदाता इस बार दुद्धी का 19वां विधायक चुनने के लिए वोट करेंगे। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर वैसे तो सभी दलों ने जीत दर्ज की है, लेकिन सबसे लंबे समय तक विधायक रहने का रिकॉर्ड विजय सिंह गोंड के नाम है। वह लगातार सात बार जीते, मगर किसी भी एक दल से नहीं।
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दुद्धी सीट
- फोटो : प्रतीकात्मक
विस्तार
प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित दुद्धी सीट 1952 के पहले चुनाव में ही अस्तित्व में थी। तब इसका नाम दुद्धी सह रॉबर्ट्सगंज था और यहां दो विधायक चुने जाते थे। पहली जीत कांग्रेस की झोली में आई और बृजभूषण व रामस्वरूप विधायक बने।
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वर्ष 1957 के चुनाव में सीट का नाम रॉबर्ट्सगंज से दुद्धी हो गया और जनसंघ ने यहां विजयश्री पाई। आनंद ब्रह्मशाह और शोभनाथ विधायक बने थे। 1962 के नए परिसीमन में स्वतंत्र रूप से दुद्धी विधानसभा बनी और यह चुनाव कांग्रेस के रामप्यारे पनिका ने जीता।
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अगले ही चुनाव 1967 में अयोध्या प्रसाद ने यह सीट फिर से जनसंघ की झोली में डाल दी। वर्ष 1969 में फिर से कांग्रेस के टिकट पर रामप्यारे पनिका निर्वाचित हुए, लेकिन 1974 में सीट पर जनसंघ के शिव संपत राम विधायक बने।
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इमरजेंसी के बाद 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के ईश्वर प्रसाद ने जीत हासिल की। वर्ष 1980 में कांग्रेस ने रामप्यारे पनिका को लोकसभा का प्रत्याशी बनाया तो उनके शिष्य विजय सिंह गोंड को विधानसभा में उतार दिया। दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। इसके साथ ही विजय सिंह की जीत का क्रम भी शुरू हो गया।
इसके बाद 1985 में भी वह कांग्रेस से चुनाव जीते, लेकिन 1989 में मौका भांपते हुए निर्दलीय मैदान में उतरे और लगातार तीसरी जीत हासिल कर हैट्रिक लगाई। विजय सिंह गोंड को 1991, 1993 में जनता दल और 1996 और 2002 में सपा के टिकट पर जीत हासिल हुई।
इस तरह वह सात बार लगातार निर्वाचित हुए लेकिन किसी एक दल से हैट्रिक नहीं लगा पाए। वर्ष 2007 में आरक्षण का पेंच फंसा तो विजय सिंह गोंड मैदान से ही बाहर हो गए। इस चुनाव में सीएम प्रसाद ने जीत दर्ज कर पहली बार बसपा का परचम लहराया। वर्ष 2012 में भी विजय सिंह आरक्षण के चलते एन वक्त पर चुनाव लड़ने से अयोग्य हुए तो निर्दलीय रूबी प्रसाद ने जीत दर्ज की।