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संभल कर जलाएं पटाखा, 159 पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
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दीपावली पर दीया जलाएं, खुशियां मनाएं, धूम-धड़ाका भी करें लेकिन इन सबके बीच पर्यावरण का भी थोड़ा ध्यान रखें। पटाखों के उपयोग के बाद जिले में वायु गुणवत्ता की स्थिति में तेजी से गिरावट आई है। बुधवार की शाम राबर्ट्सगंज नगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 159 पहुंच गया। जिले की सीमा से सटे मप्र के सिंगरौली में भी वायु गुणवत्ता की स्थिति खतरनाक रही। यह हाल तब था, जब पटाखों का उपयोग गिने-चुने लोग ही कर रहे हैं। दीपावली पर पटाखे का इस्तेेमाल बढ़ने पर स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
प्रदूषण के लिहाज से सोनभद्र को देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में रखा गया है। इसमें भी सोन नदी के दक्षिण की ओर बसे चोपन, डाला, ओबरा, रेणुकूट, अनपरा, शक्तिनगर और सिंगरौली परिक्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। इसी इलाके में तमाम क्रशर प्लांट, पावर प्लांट, एनसीएल की कोयला परियोजनाएं व अन्य औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। सर्दियों में यहां की वायु गुणवत्ता बेहद खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाती है। शासन ने इस क्षेत्र में पटाखा जलाने पर रोक लगाई थी हालांकि बाद में कोर्ट के आदेश पर ग्रीन पटाखा जलाने की छूट मिली है। कड़े निर्देशों के कारण इन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की स्थिति तो कुछ ठीक बनी हुई है लेकिन लोगों ने संयम नहीं रखा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उधर, राबर्ट्सगंज व आसपास इलाकों में पटाखा की दुकानें पहले ही सज चुकी हैं। लिहाजा यहां लोग खूब पटाखा जला रहे हैं। इसका सीधा असर प्रदूषण के स्तर पर पड़ रहा है। बुधवार की शाम वायु गुणवत्ता 159 दर्ज किया गया। मौसम साफ होने के बाद भी पूरे दिन वायु गुणवत्ता 100 के ऊपर बना रहा।
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प्रदूषण के लिहाज से सोनभद्र को देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में रखा गया है। इसमें भी सोन नदी के दक्षिण की ओर बसे चोपन, डाला, ओबरा, रेणुकूट, अनपरा, शक्तिनगर और सिंगरौली परिक्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। इसी इलाके में तमाम क्रशर प्लांट, पावर प्लांट, एनसीएल की कोयला परियोजनाएं व अन्य औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। सर्दियों में यहां की वायु गुणवत्ता बेहद खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाती है। शासन ने इस क्षेत्र में पटाखा जलाने पर रोक लगाई थी हालांकि बाद में कोर्ट के आदेश पर ग्रीन पटाखा जलाने की छूट मिली है। कड़े निर्देशों के कारण इन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की स्थिति तो कुछ ठीक बनी हुई है लेकिन लोगों ने संयम नहीं रखा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उधर, राबर्ट्सगंज व आसपास इलाकों में पटाखा की दुकानें पहले ही सज चुकी हैं। लिहाजा यहां लोग खूब पटाखा जला रहे हैं। इसका सीधा असर प्रदूषण के स्तर पर पड़ रहा है। बुधवार की शाम वायु गुणवत्ता 159 दर्ज किया गया। मौसम साफ होने के बाद भी पूरे दिन वायु गुणवत्ता 100 के ऊपर बना रहा।
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