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कोर्ट का फैसला: भूत-प्रेत के शक में ससुर की जान लेने वाली बहू को उम्रकैद, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका

Tue, 23 Jul 2024 04:17 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Tue, 23 Jul 2024 04:17 PM IST
सार

सोनभद्र जिले में भूत- प्रेत के चक्कर में ससुर की हत्या करने वाली बहू को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। 

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Life imprisonment to daughter-in-law who killed her father-in-law on suspicion of ghosts in sonbhadra
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब तीन वर्ष पूर्व भूत- प्रेत के शक में ससुर की हत्या करने वाली महिला को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सुनवाई करते हुए 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

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सुनवाई के दौरान महिला खुद को निर्दोष और साजिशन फंसाए जाने की दलील देती रही। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। हत्या जैसे जघन्य अपराध में दोषी के प्रति किसी प्रकार की उदारता व सहानुभूति प्रकट करने से इंकार करते हुए कहा कि इससे सामान्य जन का विश्वास प्रभावित होगा।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक हाथीनाला थाना अंतर्गत हथवानी के साओडीह गांव निवासी राम हुलास ने 28 अगस्त 2021 को थाने तहरीर देकर पिता हरी प्रसाद की हत्या का आरोप लगाया था। बताया था कि उसके छोटे भाई देवलाल की पत्नी सुखवंती ने भूत प्रेत के शक में उसके पिता पर कुल्हाड़ी से प्रहार कर सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें पहुंचाई।

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उपचार के लिए ले जाते समय पिता की मौत हो गई। इस तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर उच्चतम न्यायालय की विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि दंडादेश कठोर होना चाहिए।

अनुचित उदारता एवं सहानुभूति न्याय को अपेक्षाकृत अधिक क्षति पहुंचाते हैं। दोषसिद्ध हो जाने के बाद दोषी को उसे पर्याप्त दंड से दंडित न करने से न्याय की घोर क्षति होती है। सहानुभूति प्रकट करके अगर अभियुक्त को विधि की ओर से प्रावधानित सम्यक दंड से पर्याप्त रूप से दंडित न किया जाए तो इससे सामान्य जन का विश्वास भी प्रभावित होता है।

इसका अनुपालन करते हुए कोर्ट ने दोषी बहू सुखवंती को उम्रकैद व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।

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