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कागजों तक सिमट कर रह गई जसौली परियोजना
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लगातार सूखे की मार झेल रहे नगवां ब्लॉक के तीन दर्जन से अधिक गांवों में सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए कर्मनाशा नदी पर प्रस्तावित सेमरिया पंप कैनाल परियोजना बजट के अभाव में परवान नहीं चढ़ सकी है। यह परियोजना अब तक केवल कागजी खानापूर्ति तक ही सिमट कर रह गई है। इसे मूर्त रूप देने के लिए करीब दो सौ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन में भेजा गया है। लंबे समय बाद भी परियोजना के लिए धन न मिलने से किसानों में नाराजगी है। यह मुद्दा एक बार फिर से जोर शोर से उठ रहा है।
क्षेत्र के किसानों की मानें तो वर्ष 2015 में नगवां ब्लॉक में सेमरिया गांव में 50 क्यूसेक क्षमता की जसौली पंप नहर निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इस परियोजना के सर्वे की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए सिंचाई विभाग की तरफ से करीब 176 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी शासन में भेजा जा चुका है। ये प्रस्ताव अभी तक शासन में अटका हुआ है। परियोजना के तहत सेमरिया मुहान से रइयां भैरामपुर तक पाइपलाइन बिछाई जानी है। इसके बाद नहर के जरिये किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाना है। इस परियोजना को मूर्त रूप देने के पश्चात नगवां ब्लॉक के सेमरिया, बिजवार, चकया, पवनी, वैनी, दूबेपुर, कन्हौरा, नगांव, सोहदवल, पटवध, खलियारी, नंदना, पड़री, डोरिया, सरईडाड़, आमडीह समेत 40 गांव के किसानों को फसल सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा लेकिन छह वर्ष बाद भी परियोजना को फूटी कौड़ी नहीं मिल सकी है। इससे परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि जब इस परियोजना का सर्वे किया गया था तो किसानों में खुशी देखी गई थी लेकिन अब तक परियोजना परवान न चढ़ने से किसान मायूस हैं।
पिछले चुनाव में भी उठा था मुद्दा
वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में किसानों ने सिंचाई परियोजना का मुद्दा उठाया था। एक बार फिर से चुनाव में मुद्दा उठाया जाने लगा है। किसानों का कहना है कि प्रत्याशियों के समक्ष इस परियोजना को शुरू कराए जाने का पक्ष रखा जाएगा। इसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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क्षेत्र के किसानों की मानें तो वर्ष 2015 में नगवां ब्लॉक में सेमरिया गांव में 50 क्यूसेक क्षमता की जसौली पंप नहर निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इस परियोजना के सर्वे की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए सिंचाई विभाग की तरफ से करीब 176 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी शासन में भेजा जा चुका है। ये प्रस्ताव अभी तक शासन में अटका हुआ है। परियोजना के तहत सेमरिया मुहान से रइयां भैरामपुर तक पाइपलाइन बिछाई जानी है। इसके बाद नहर के जरिये किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाना है। इस परियोजना को मूर्त रूप देने के पश्चात नगवां ब्लॉक के सेमरिया, बिजवार, चकया, पवनी, वैनी, दूबेपुर, कन्हौरा, नगांव, सोहदवल, पटवध, खलियारी, नंदना, पड़री, डोरिया, सरईडाड़, आमडीह समेत 40 गांव के किसानों को फसल सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा लेकिन छह वर्ष बाद भी परियोजना को फूटी कौड़ी नहीं मिल सकी है। इससे परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि जब इस परियोजना का सर्वे किया गया था तो किसानों में खुशी देखी गई थी लेकिन अब तक परियोजना परवान न चढ़ने से किसान मायूस हैं।
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पिछले चुनाव में भी उठा था मुद्दा
वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में किसानों ने सिंचाई परियोजना का मुद्दा उठाया था। एक बार फिर से चुनाव में मुद्दा उठाया जाने लगा है। किसानों का कहना है कि प्रत्याशियों के समक्ष इस परियोजना को शुरू कराए जाने का पक्ष रखा जाएगा। इसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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