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Sonebhadra News: मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन में गडबड़ी की होगी जांच
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सोनभद्र। जिले में स्वास्थ्य विभाग की कई योजनाएं कागजों में ही सिमट गई है। इस बीच अब मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन में गड़बड़ी की जांच होगी।
आदिवासी बहुल सोनभद्र जिला डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, डायरिया सहित कई अन्य बीमारियों के लिए अति संवेदनशील है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कई संंस्थाओं से जागरूकता अभियानों में सहयोग ले रहा है। इसी क्रम में एक संस्था को मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें संस्था की ओर से एंबुलेंस पर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी की टीम तैयार कर नगवां, घोरावल, म्योरपुर और दुद्धी में काम करना था। किसी भी बीमारी की सूचना मिलने पर टीम को मौके पर पहुंच जांच और उपचार शुरू करना होता है। जिलाधिकारी की ओर से समीक्षा और सीएम डैश बोर्ड के आंकड़ों में सामने आया कि चार मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन में सिर्फ एक ही का संचालन हो रहा था। पोर्टल पर भी एक का ही डाटा फिड हो रहा था। प्रगति रिपोर्ट 25 फीसदी थी। ऐसे में गड़बड़ी पर डीएम की ओर से स्पष्टीकरण तलब किया गया था। इस संस्था ने बृहस्पतिवार को अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हालांकि नोडल अधिकारी संस्था के तर्क से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने संस्था मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन के दौरान उपचार से संबंधित कई दस्तावेज तलब किए हैं। जिसके आधार पर गड़बड़ी की जांच की जाएगी।
मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन में गड़बड़ी मिली थी। इसकी जांच के लिए दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। - एसके वर्मा, नोडल अधिकारी।
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आदिवासी बहुल सोनभद्र जिला डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, डायरिया सहित कई अन्य बीमारियों के लिए अति संवेदनशील है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कई संंस्थाओं से जागरूकता अभियानों में सहयोग ले रहा है। इसी क्रम में एक संस्था को मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें संस्था की ओर से एंबुलेंस पर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी की टीम तैयार कर नगवां, घोरावल, म्योरपुर और दुद्धी में काम करना था। किसी भी बीमारी की सूचना मिलने पर टीम को मौके पर पहुंच जांच और उपचार शुरू करना होता है। जिलाधिकारी की ओर से समीक्षा और सीएम डैश बोर्ड के आंकड़ों में सामने आया कि चार मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन में सिर्फ एक ही का संचालन हो रहा था। पोर्टल पर भी एक का ही डाटा फिड हो रहा था। प्रगति रिपोर्ट 25 फीसदी थी। ऐसे में गड़बड़ी पर डीएम की ओर से स्पष्टीकरण तलब किया गया था। इस संस्था ने बृहस्पतिवार को अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हालांकि नोडल अधिकारी संस्था के तर्क से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने संस्था मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन के दौरान उपचार से संबंधित कई दस्तावेज तलब किए हैं। जिसके आधार पर गड़बड़ी की जांच की जाएगी।
मेडिकल मोबाइल यूनिट के संचालन में गड़बड़ी मिली थी। इसकी जांच के लिए दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। - एसके वर्मा, नोडल अधिकारी।