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Sonebhadra News: अनिद्रा और अकेलापन भी बढ़ा रहा मानसिक रोग

Wed, 09 Oct 2024 11:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2024 11:03 PM IST
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Insomnia and loneliness are also increasing mental illness.
अगर आप रोजाना 6-7 घंटे से कम नींद ले रहे हैं तो आप मानसिक रोगों की चपेट में आ सकते हैं। नींद पूरी न होने से मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जो कई तरह की बीमारियों का कारण बनता है।
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जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले 30 फीसदी केस अनिद्रा से जुड़े हुए हैं। अनियमित दिनचर्या और भागदौड़ में लोग इस कदर उलझे हैं कि उन्हें भरपूर नींद लेने का भी मौका नहीं मिल रहा।
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ऐसे में वह धीरे-धीरे तनाव, एंजाइटी सहित अन्य मानसिक रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। पिछले कुछ समय में मोबाइल पर निर्भरता बड़ी है और दूसरों से मिलना-जुलना भी कम हुआ है। ऐसे में लोग अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हुए हैं।
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जिला अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा पांडेय बताती हैं कि ज्यादातर लोग मानसिक रोगों से अनभिज्ञ हैं। सिर्फ साइकेट्रिक डिसआर्डर (पागलपन) ही मानसिक रोग नहीं है। अगर मन में लगातार नकारात्मक विचार आ रहे हाें, व्यवहार में अचानक से परिवर्तन हो, किसी काम को लेकर मन में संशय रहता हो और बार-बार एक ही चीज को दोहराया जाना भी मानसिक रोगाें के प्रकार हैं।
इन समस्याओं के पीछे नींद पूरी न होना भी बड़ी वजह है। बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद लेना और नियमित व्यायाम या शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बेहद जरूरी है।
रात में दस बजे तक सो जाएं और सुबह 5 बजे तक जग जाएं। खानपान में पौष्टिक वस्तुओं का उपयोग करें। अगर किसी में भी मानसिक रोगों के लक्षण हों तो वह उसे अनदेखा न करें। दवाओं और काउंसिलिंग की मदद से वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

अकेलापन और नशे से भी बढ़ रही बीमारी
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में औसतन 45-50 मरीज रोज आ रहे हैं। इनमें ऐसे मरीज भी बड़ी संख्या में है, जो नशे के कारण मानसिक रोग की गिरफ्त में आए हैं। छोटी-छोटी समस्याओं से लड़ने की बजाय वह उससे बचने के लिए नशे की ओर जाते हैं और फिर उसकी गिरफ्त में आकर मनोरोग के शिकार हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी से भी लोग मानसिक रोगों को जादू-टोना के रूप में मानते हैं। इसका लाभ झोलाछाप या ओझा-सोखा उठाते हैं।
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