{"_id":"5f9c549a8ebc3e9bfd3f8787","slug":"increasing-air-pollution-from-vehicles-running-on-roads-sonbhadra-news-vns5557023190","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर दिन सड़क पर दौड़ रहे हजारों वाहन बढ़ा रहे वायु प्रदूषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर दिन सड़क पर दौड़ रहे हजारों वाहन बढ़ा रहे वायु प्रदूषण
विज्ञापन
सोनभद्र। जिले में औद्योगिक एवं इससे जुड़ी गतिविधियां वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण तो हैं ही, सड़क पर हर दिन दौड़ते हजारों वाहन भी हवा में प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। जिले में पंजीकृत वाहनों की संख्या 3.14 लाख पहुंच गई है। यहां दूसरे जनपदों एवं गैर प्रांतों में पंजीकृत वाहनों की भी बड़ी संख्या है। इसमें दस साल से अधिक उम्र वाले वाहनों की संख्या एक लाख के लगभग है। प्रतिदिन जिले में यहां पंजीकृत वाहनों के अलावा दूसरे जनपदों-राज्यों से आने वाले हजारों वाहन भी आवागमन करते हैं।
प्रदूषण के लिहाज से जिले की गतिविधियां काफी संवेदनशील हैं। सोनभद्र और इससे सटे सिंगरौली में जहां 21 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन के लिए रोजाना तीन लाख टन से अधिक कोयला जलाया जाता है। वहीं जिले के बिजली परियोजनाओं से लेकर चंदासी मंडी तक प्रतिदिन ढाई से तीन हजार कोयला लदे वाहनों का आवागमन होता है। डेढ़ से दो हजार ट्रक बालू-गिट्टी लेकर परिवहन कर रहे हैं। यात्री और निजी वाहनों की भी अच्छी खासी तादाद सड़क पर दिखती है। ओवरलोड वाहनों का भी जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर खासा आवागमन है। अत्यधिक लोड वाले प्रदूषण भी अत्यधिक उगलते हैं। यहीं कारण है कि औद्योगिक गतिविधियों के साथ वाहनों का आवागमन भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण माना जाने लगा है। पर्यावरण विशेषज्ञ सीमा कहती हैं कि जिस तरह से लोगों में निजी वाहनों से आवागमन की प्रवृत्ति बढ़ी है, उसने स्थिति को और खराब बना दिया है। इसको लेकर संजीदगी से सोचने की जरूरत है।
कोट
वाहनों के प्रदूषण की जांच और ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जो वाहन चलने योग्य नहीं होते, उन्हें खराब घोषित कर उनका परमिट, पंजीयन रद्द कर दिया जाता है।- अनिल मिश्र, एआरटीओ प्रशासन।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदूषण के लिहाज से जिले की गतिविधियां काफी संवेदनशील हैं। सोनभद्र और इससे सटे सिंगरौली में जहां 21 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन के लिए रोजाना तीन लाख टन से अधिक कोयला जलाया जाता है। वहीं जिले के बिजली परियोजनाओं से लेकर चंदासी मंडी तक प्रतिदिन ढाई से तीन हजार कोयला लदे वाहनों का आवागमन होता है। डेढ़ से दो हजार ट्रक बालू-गिट्टी लेकर परिवहन कर रहे हैं। यात्री और निजी वाहनों की भी अच्छी खासी तादाद सड़क पर दिखती है। ओवरलोड वाहनों का भी जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर खासा आवागमन है। अत्यधिक लोड वाले प्रदूषण भी अत्यधिक उगलते हैं। यहीं कारण है कि औद्योगिक गतिविधियों के साथ वाहनों का आवागमन भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण माना जाने लगा है। पर्यावरण विशेषज्ञ सीमा कहती हैं कि जिस तरह से लोगों में निजी वाहनों से आवागमन की प्रवृत्ति बढ़ी है, उसने स्थिति को और खराब बना दिया है। इसको लेकर संजीदगी से सोचने की जरूरत है।
विज्ञापन
कोट
वाहनों के प्रदूषण की जांच और ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जो वाहन चलने योग्य नहीं होते, उन्हें खराब घोषित कर उनका परमिट, पंजीयन रद्द कर दिया जाता है।- अनिल मिश्र, एआरटीओ प्रशासन।
विज्ञापन