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Sonebhadra News: कहीं डॉक्टर नदारद, कहीं बिना जांच किए दे दी गईं दवाएं
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सलखन स्थित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के दाैरान पसरा सन्नाटा
- फोटो : संवाद
सोनभद्र/विंढमगंज/केकराही/बीजपुर। मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ से उपचार, जांच व दवाओं की सुविधा मुहैया कराने के लिए जन आरोग्य मेला आयोजित किया जाता है।
जिले में यह मेला महज खानापूर्ति तक सीमित है। सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल आरोग्य मेले में आम दिनाें की तरह ही अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। कहीं जांच की व्यवस्था नहीं है तो कहीं डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी भारी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर रविवार को जिले के 29 से अधिक स्थानों पर जन आरोग्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिम्मेदारों की लापरवाही से इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा। यहां रोस्टर वार विशेषज्ञ भी नहीं पहुंचते हैं। राॅबर्ट्सगंज नगरीय पीएचसी पर रविवार को मेले में कुल 30 से अधिक मरीज पहुंचे।
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ज्यादातर मरीजों को लक्षण के आधार पर दवा दी गई। अस्पताल पर गर्भवतियों की जांच और उपचार के इंतजाम नदारद हैं। पीएचसी बीजपुर में डाॅ. राणा रणधीर की मौजूदगी में 67 मरीजों का उपचार हुआ। टायफाइड, मलेरिया, डेंगू, शुगर की जांच तक ही मेला सीमित है। चेतवां में डाॅ. जेपी आजाद ने 32 मरीजों को दवा दी।
अधिकांश मरीजों को लक्षण के आधार पर ही दवाएं दी गई। केकराही पीएचसी पर डॉ. राकेश मौर्य ने 26 मरीजों का उपचार किया। ज्यादातर अस्पतालों में आम दिनों के तरह महज ओपीडी का संचालन कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि पूर्व में रोस्टर के तहत आंख, हड्डीरोग, त्वचा रोग सहित अन्य विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई जाती थी।
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जिले में यह मेला महज खानापूर्ति तक सीमित है। सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल आरोग्य मेले में आम दिनाें की तरह ही अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। कहीं जांच की व्यवस्था नहीं है तो कहीं डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी भारी पड़ रही है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर रविवार को जिले के 29 से अधिक स्थानों पर जन आरोग्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिम्मेदारों की लापरवाही से इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा। यहां रोस्टर वार विशेषज्ञ भी नहीं पहुंचते हैं। राॅबर्ट्सगंज नगरीय पीएचसी पर रविवार को मेले में कुल 30 से अधिक मरीज पहुंचे।
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ज्यादातर मरीजों को लक्षण के आधार पर दवा दी गई। अस्पताल पर गर्भवतियों की जांच और उपचार के इंतजाम नदारद हैं। पीएचसी बीजपुर में डाॅ. राणा रणधीर की मौजूदगी में 67 मरीजों का उपचार हुआ। टायफाइड, मलेरिया, डेंगू, शुगर की जांच तक ही मेला सीमित है। चेतवां में डाॅ. जेपी आजाद ने 32 मरीजों को दवा दी।
अधिकांश मरीजों को लक्षण के आधार पर ही दवाएं दी गई। केकराही पीएचसी पर डॉ. राकेश मौर्य ने 26 मरीजों का उपचार किया। ज्यादातर अस्पतालों में आम दिनों के तरह महज ओपीडी का संचालन कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि पूर्व में रोस्टर के तहत आंख, हड्डीरोग, त्वचा रोग सहित अन्य विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई जाती थी।