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जल क्रांति अभियान से सुधरेगी सिंचाई व्यवस्था
ब्यूरो/ अमर उजाला / भारतेंदु मिश्र
Updated Thu, 19 Nov 2015 11:19 PM IST
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जिले के अधिकांश क्षेत्र में पहाड़ और वन हैं। यहां कृषि योग्य भूमि कम है और सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण किसान बदहाल रहते हैं।
इस समस्या के निराकरण के लिए किए गए सतत प्रयास के बाद केंद्र सरकार ने ‘जल क्रांति अभियान’ के तहत सोनभद्र को जिला सिंचाई परियोजना के लिए चयनित किया है। सोनभद्र सूबे का अकेला जिला है, जिसे इस अभियान में केंद्र सरकार ने शामिल किया, ताकि जिले की कृषि योग्य भूमि को सिंचाई की समस्या से उबारा जा सके।
7388.80 वर्ग किमी के क्षेत्रफल फैले इस जिले का 2.5 फीसदी हिस्सा कृषि योग्य है। शेष भाग जंगल और पहाड़ों से घिरा है। सिंचाई के नाम पर यहां एकमात्र लघु डाल नहर है। पानी की समस्या को देखते हुए जिले के घोरावल तहसील क्षेत्र कोेडार्क जोन घोषित किया जा चुका है। जबकि खेती योग्य अधिकांश भूमि घोरावल क्षेत्र में हैं।
सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण यहां लगभग हर सीजन की फसलें बर्बाद होती हैं। ऐसे में ‘जल क्रांति अभियान’ के तहत जिले में तैयार की जा रही जिला सिंचाई परियोजना किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी। इसके तहत जिले में कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के लिए योजना तैयार की जाएगी।
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केंद्र सरकार की इस योजना को फलीभूत करने के लिए प्रमुख सचिव सिंचाई टी. वेंकटेश ने मुख्य अभियंता सोन सिंचाई विभाग वाराणसी ओपी श्रीवास्तव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ओपी श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र की सेंट्रल वाटर कमीशन और सूबे की सिंचाई विभाग मिलकर इस प्रोजेक्ट के लिए सोनभद्र में काम करेंगे।
शासन के आदेश पर योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। अभी जिले का डाटा आदि जुटाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य है कि जिले की कोई भूमि असिंचित न रहे। इस परियोजना में कनहर परियाेजना की नहरों से भी पानी लिया जाएगा। इस वर्ष बेहतर बरसात न होने के कारण सोनभद्र जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
जिले के घोरावल क्षेत्र के विधायक रमेश दूबे ने बताया कि जल क्रांति अभियान परियोजना की जानकारी होने पर उन्होंने निदेशक केंद्रीय जल आयोग को सुझाव भेजा है। इसमें उन्होंने बताया है कि जिले में कौन से साधन मौजूद है, जिसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
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इस समस्या के निराकरण के लिए किए गए सतत प्रयास के बाद केंद्र सरकार ने ‘जल क्रांति अभियान’ के तहत सोनभद्र को जिला सिंचाई परियोजना के लिए चयनित किया है। सोनभद्र सूबे का अकेला जिला है, जिसे इस अभियान में केंद्र सरकार ने शामिल किया, ताकि जिले की कृषि योग्य भूमि को सिंचाई की समस्या से उबारा जा सके।
7388.80 वर्ग किमी के क्षेत्रफल फैले इस जिले का 2.5 फीसदी हिस्सा कृषि योग्य है। शेष भाग जंगल और पहाड़ों से घिरा है। सिंचाई के नाम पर यहां एकमात्र लघु डाल नहर है। पानी की समस्या को देखते हुए जिले के घोरावल तहसील क्षेत्र कोेडार्क जोन घोषित किया जा चुका है। जबकि खेती योग्य अधिकांश भूमि घोरावल क्षेत्र में हैं।
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सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण यहां लगभग हर सीजन की फसलें बर्बाद होती हैं। ऐसे में ‘जल क्रांति अभियान’ के तहत जिले में तैयार की जा रही जिला सिंचाई परियोजना किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी। इसके तहत जिले में कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के लिए योजना तैयार की जाएगी।
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केंद्र सरकार की इस योजना को फलीभूत करने के लिए प्रमुख सचिव सिंचाई टी. वेंकटेश ने मुख्य अभियंता सोन सिंचाई विभाग वाराणसी ओपी श्रीवास्तव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ओपी श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र की सेंट्रल वाटर कमीशन और सूबे की सिंचाई विभाग मिलकर इस प्रोजेक्ट के लिए सोनभद्र में काम करेंगे।
शासन के आदेश पर योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। अभी जिले का डाटा आदि जुटाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य है कि जिले की कोई भूमि असिंचित न रहे। इस परियोजना में कनहर परियाेजना की नहरों से भी पानी लिया जाएगा। इस वर्ष बेहतर बरसात न होने के कारण सोनभद्र जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
जिले के घोरावल क्षेत्र के विधायक रमेश दूबे ने बताया कि जल क्रांति अभियान परियोजना की जानकारी होने पर उन्होंने निदेशक केंद्रीय जल आयोग को सुझाव भेजा है। इसमें उन्होंने बताया है कि जिले में कौन से साधन मौजूद है, जिसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है।