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वैध की आड़ में बालू का अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Tue, 13 Jun 2017 11:39 PM IST
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अवैध खनन में ट्रक
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बालू की नई साइट शुरू होते ही बालू कारोबारियों की दबंगई शुरू हो गई है। खान अधिकारी की मिलीभगत से दुद्धी तहसील के पिपरडीह और राबर्ट्सगंज तहसील के खेवंधा में वैध की आड़ में बालू का अवैध खनन शुरू हो गया है। पोकलेन और नाव पर मोटर लगाकर नदी की बीच धारा से ट्रकों पर बालू की लोडिंग कराई जा रही है। जबकि यह इलाका सेंचुरी एरिया से चंद किमी की दूरी पर है।
इन साइटों पर लाठी डंडे से लैस दर्जनों की संख्या में लोग बैठे हुए हैं। पूर्व में खेवंधा के ठेकेदार धर्मेंद्र तिवारी पर अवैध खनन के न सिर्फ मामले दर्ज हो चुके हैं बल्कि रात में अवैध खनन करने के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई होने पर बालू साइट पर जमकर पथराव भी हुआ था।
बताते चलें कि सितंबर में हाईकोर्ट ने जिले में बालू खनन पर रोक लगाई थी। भाजपा की सरकार बनने के बाद अप्रैल माह में खनन की नई नीति बनाई गई। छह माह के लिए बालू की नई साइट के आन लाइन टेंडर डाले गए। मई में ई टेंडरिंग के जरिये 26 में से छह खंड पर बोली लगाई गई। इनमें से दुद्धी तहसील के पिपरडीह बालू साइट को शिवा कंस्ट्रक्शन तो राबर्ट्सगंज तहसील के खेवंधा खंड एक की साइट पर सबसे अधिक सुधाकर पांडेय ने बोली लगाई।
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बिहार के शिवा कांस्ट्रक्शन को 60 हजार घन मीटर तो सुधाकर पांडेय को 80 हजार घन मीटर बालू लादने का परमिट मिला। इन लोगों को एक जून से 30 जून तक खनन की इजाजत मिली है। बरसात के नाते एक जुलाई से 30 सितंबर तक खनन पर पूरी तरह से रोक लगी रहती है। समय कम होने और भंडारण करने के चक्कर में नियमों की अनदेखी शुरू कर दी गई है।
कोई अवरोध न बने, इसके लिए कारिंदों को लाठी डंडे से लैस कराकर नदी के किनारे बैठा दिया है। नदी की बीच धारा से बालू निकालने के लिए चार पोकलेन मशीन भी लगा दी गई हैं। जबकि अलग से चार नाव लगाई गई हैं। नाव में मोटर फिट है जो पानी के साथ ही बढिय़ा बालू किनारे पर फेंक रही हैं। सेंचुरी इलाका होने के नाते जिले में पोकलेन से खनन पर पूरी तरह से रोक है।
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इन साइटों पर लाठी डंडे से लैस दर्जनों की संख्या में लोग बैठे हुए हैं। पूर्व में खेवंधा के ठेकेदार धर्मेंद्र तिवारी पर अवैध खनन के न सिर्फ मामले दर्ज हो चुके हैं बल्कि रात में अवैध खनन करने के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई होने पर बालू साइट पर जमकर पथराव भी हुआ था।
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बताते चलें कि सितंबर में हाईकोर्ट ने जिले में बालू खनन पर रोक लगाई थी। भाजपा की सरकार बनने के बाद अप्रैल माह में खनन की नई नीति बनाई गई। छह माह के लिए बालू की नई साइट के आन लाइन टेंडर डाले गए। मई में ई टेंडरिंग के जरिये 26 में से छह खंड पर बोली लगाई गई। इनमें से दुद्धी तहसील के पिपरडीह बालू साइट को शिवा कंस्ट्रक्शन तो राबर्ट्सगंज तहसील के खेवंधा खंड एक की साइट पर सबसे अधिक सुधाकर पांडेय ने बोली लगाई।
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बिहार के शिवा कांस्ट्रक्शन को 60 हजार घन मीटर तो सुधाकर पांडेय को 80 हजार घन मीटर बालू लादने का परमिट मिला। इन लोगों को एक जून से 30 जून तक खनन की इजाजत मिली है। बरसात के नाते एक जुलाई से 30 सितंबर तक खनन पर पूरी तरह से रोक लगी रहती है। समय कम होने और भंडारण करने के चक्कर में नियमों की अनदेखी शुरू कर दी गई है।
कोई अवरोध न बने, इसके लिए कारिंदों को लाठी डंडे से लैस कराकर नदी के किनारे बैठा दिया है। नदी की बीच धारा से बालू निकालने के लिए चार पोकलेन मशीन भी लगा दी गई हैं। जबकि अलग से चार नाव लगाई गई हैं। नाव में मोटर फिट है जो पानी के साथ ही बढिय़ा बालू किनारे पर फेंक रही हैं। सेंचुरी इलाका होने के नाते जिले में पोकलेन से खनन पर पूरी तरह से रोक है।