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Sonebhadra News: मच्छर जनित बीमारियों पर अध्ययन करेगी आईसीएमआर की टीम
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म्योरपुर। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गठित इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम मलेरिया पर अध्ययन के लिए जिले में पहुंची है। टीम ने मंगलवार को म्योरपुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों में जाकर मच्छरों एवं मलेरिया से प्रभावित गांवों में जानकारी जुटाई। टीम विभिन्न पहलुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर मंत्रालय को सौंपेगी।
टीम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गौरव द्विवेदी, डॉ. बृजरंजन मिश्र और डॉ. नलिनी शामिल हैं। टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. गौरव द्विवेदी ने बताया कि अगले साल फरवरी से मलेरिया पर अध्ययन का कार्य आरंभ होगा। इसमें टेक्नीशियन, दो रिसर्च अस्सिटेंट सहित आठ-नौ लोग रहेंगे। फिलहाल प्रारंभिक जानकारी एकत्र की जा रही है। कहा कि जनपद की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां कई तरह के मच्छर होंगे। ऐसे में किस क्षेत्र में किस तरह के मच्छर पाए जाते हैं, इसका अध्ययन होगा। टीम सिचुएशन एनालिसिस भी करेगी। इसमें जिले में पाए जाने वाले मच्छरों की प्रजाति, उन्हें संरक्षण देने वाली चीजें, मच्छरों के प्रजनन और उनके पैदा होने के स्रोत, उन्हें नियंत्रित करने के उपाय आदि अध्ययन में शामिल होगा। इसकी रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को दी जाएगी। इसमें अभी एक वर्ष तक का समय लग सकता है। बातचीत के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव व मलेरिया निरीक्षक अभिषेक पांडेय मौजूद रहे।
जागरूकता गोष्ठी का हुआ आयोजन
म्योरपुर। स्थानीय कस्बे में मंगलवार को मलेरिया और मच्छर जनित रोगों के बारे में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें म्योरपुर, दुद्धी व बभनी के ग्राम प्रधानों ने प्रतिभाग किया। जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव ने मच्छरों से होने वाली आठ तरह की बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. गौरव द्विवेदी ने भी जागरुक करते हुए मच्छरों के नियंत्रण में सहयोग की अपेक्षा की। कार्यक्रम में चिकित्सक डॉ. संजय बिंद, एडीओ पंचायत काशीराम ठाकुर, ग्राम प्रधान रामनारायण, जगतनारायण, रामदयाल आदि मौजूद रहे।
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टीम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गौरव द्विवेदी, डॉ. बृजरंजन मिश्र और डॉ. नलिनी शामिल हैं। टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. गौरव द्विवेदी ने बताया कि अगले साल फरवरी से मलेरिया पर अध्ययन का कार्य आरंभ होगा। इसमें टेक्नीशियन, दो रिसर्च अस्सिटेंट सहित आठ-नौ लोग रहेंगे। फिलहाल प्रारंभिक जानकारी एकत्र की जा रही है। कहा कि जनपद की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां कई तरह के मच्छर होंगे। ऐसे में किस क्षेत्र में किस तरह के मच्छर पाए जाते हैं, इसका अध्ययन होगा। टीम सिचुएशन एनालिसिस भी करेगी। इसमें जिले में पाए जाने वाले मच्छरों की प्रजाति, उन्हें संरक्षण देने वाली चीजें, मच्छरों के प्रजनन और उनके पैदा होने के स्रोत, उन्हें नियंत्रित करने के उपाय आदि अध्ययन में शामिल होगा। इसकी रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को दी जाएगी। इसमें अभी एक वर्ष तक का समय लग सकता है। बातचीत के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव व मलेरिया निरीक्षक अभिषेक पांडेय मौजूद रहे।
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जागरूकता गोष्ठी का हुआ आयोजन
म्योरपुर। स्थानीय कस्बे में मंगलवार को मलेरिया और मच्छर जनित रोगों के बारे में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें म्योरपुर, दुद्धी व बभनी के ग्राम प्रधानों ने प्रतिभाग किया। जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव ने मच्छरों से होने वाली आठ तरह की बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. गौरव द्विवेदी ने भी जागरुक करते हुए मच्छरों के नियंत्रण में सहयोग की अपेक्षा की। कार्यक्रम में चिकित्सक डॉ. संजय बिंद, एडीओ पंचायत काशीराम ठाकुर, ग्राम प्रधान रामनारायण, जगतनारायण, रामदयाल आदि मौजूद रहे।
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