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Sonebhadra News: विधायकों की गोद में भी सुविधाओं के लिए सिसक रहे अस्पताल
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जिले की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए भाजपा विधायकों ने एक-एक अस्पताल गोद लिया था। उम्मीद थी कि विधायकों की गोद में जाने से इन अस्पतालों की सेहत सुधरेगी।
दो साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी अस्पतालों की बीमारी दूर नहीं हो पाई है। कहीं डॉक्टरों की कमी है तो कहीं जांच सेवाएं नदारद हैं। स्त्री रोग, बाल रोग जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं। अल्ट्रासाउंड सेवा ठप है।
चोपन में हाईवे पर ब्लैक स्पॉट के पास स्थित अस्पताल में ट्रामा सेंटर जैसी सुविधाओं की उपलब्धता दुर्घटनाओं में मौत के आंकड़ों को कम करने में बेहद जरूरी, लेकिन यह अस्पताल भी सिर्फ रेफरल रह गया है।
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यहां तक कि जनप्रतिनिधि अपने गोद लिए अस्पताल के नियमित निरीक्षण पर भी नहीं जाते। जिले के चार विधायकों के गोद लिए अस्पतालों की पड़ताल करती रिपोर्ट।
वैनी सीएचसी : पांच में से सिर्फ तीन डॉक्टर, जर्जर आवासों में नहीं रुकता कोई
रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के नगवां ब्लॉक के सीएचसी वैनी को विधायक भूपेश चौबे ने गोद लिया है। बिहार बॉर्डर पर स्थित नगवां ब्लॉक का यह अस्पताल में पहले से ही सेवाएं बदहाल हैं। अब भी वही हाल है। यहां डॉक्टरों के पांच पद हैं, जिसमें तीन पर तैनाती है।
इसमें भी डॉ. रोहित सिंह के अधीक्षक का चार्ज होने के चलते विभागीय कार्यों में ही उलझे रहते हैं। अन्य दो डॉक्टर शिफ्टवार ड्यूटी करते हैं। उन्हें दूसरे पीएचसी का भी चार्ज दिया गया है। आवास जर्जर होने के चलते अधीक्षक को छोड़ कोई डॉक्टर यहां नहीं रुकता। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को अक्सर रेफर होना पड़ता है। फार्मासिस्ट के दो में से एक पर तैनाती है।
दो स्टाफ नर्स और एक वार्ड ब्वाय के भरोसे यह अस्पताल है। मलेरिया, टाइफाइड, शुगर, टीबी जैसी जांच होती है। एक माह से एक्सरे भी शुरू हो गया है। अन्य जांच के लिए मरीज जिला अस्पताल जाते हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से गर्भवती को लंबी दूरी तय कर लोढ़ी जाना पड़ता है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. रोहित सिंह का कहना है कि स्टाफ की कमी दूर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सेवा देने का प्रयास रहता है।
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घोरावल : अल्ट्रासाउंड मशीन आई, चल नहीं पाई, विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य के गोद लिए घोरावल सीएचसी में न आर्थो सर्जन हैं और न ही जनरल सर्जरी के डॉक्टर। बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र सर्जन के पद भी खाली है। करीब दो साल पहले यहां अल्ट्रासाउंड मशीन आई थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट या टेक्निशियन के अभाव में इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर ही जांच करानी होती है।
अस्पताल में अधीक्षक समेत कुल 5 डॉक्टर कार्यरत हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों में सिर्फ महिला रोग, फिजिशियन और एनेस्थेटिक ही कार्यरत हैं। अल्ट्रासाउंड के साथ सीटी स्कैन व अन्य ज़रूरी जांच नहीं हो पाती। यहां से गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है अथवा वे निजी अस्पतालों के चंगुल में फंसकर शोषण का शिकार हो जाते हैं। कर्मचारियों के आवास जर्जर हैं।
बरसात में उनमें पानी घुस जाता है। आवासों की शौचालय व्यवस्था बदहाल है। स्वास्थ्यकर्मी भय के साये में रहते हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. नरेंद्र सरोज ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों व अल्ट्रासाउंड टेक्नीशियन के लिए विभागीय स्तर पर डिमांड की गई है। अभी कुल पांच डॉक्टर कार्यरत हैं।
घोरावल सीएचसी को गोद लेने के बाद यहां अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाया गया। महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई। ब्लड स्टोरेज केंद्र स्थापित किया गया है। बंद पड़े एक्स रे मशीन को चालू कराया गया। कायाकल्प के तहत कई कार्य कराए गए। अल्ट्रासाउंड जांच शुरू कराने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी यहां लगाने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार मौर्या, विधायक, घोरावल।
चोपन : हाईवे पर ब्लैक स्पॉट के पास अस्पताल, फिर भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं
सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर चोपन क्षेत्र में होती हैं। इस कारण ही महज 10 किमी के बीच सलखन, पटवध, चोपन बैरियर, चोपन कस्बा, डाला में पांच ब्लैक स्पॉट हैं। हाईवे के अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने पर सड़क हादसों में होने वाली मौत को कम करने के सुझाव लगातार आते रहते हैं। इसमें चोपन सीएचसी का नाम सबसे ऊपर है।
ओबरा विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड ने इसे गोद भी लिया है, बावजूद यहां कोई ऐसी सुविधा नहीं है, जिससे किसी घायल की जान बच सके। सिर्फ प्राथमिक उपचार ही हो पाता है। यहां सात डॉक्टरों के पद हैं, जबकि तैनाती सिर्फ दो की है। संविदा चिकित्सकों के भरोसे जैसे-तैसे अस्पताल चल रहा है। रेडियोलॉजिस्ट व टेक्निशियन के अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच ठप है। ऐसे में मरीज जिला अस्पताल रेफर हो जाते हैं। व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जैन का कहना है कि चोपन सीएचसी में पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो तो यह आदिवासी क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ा मददगार हो सकता है।
चोपन सीएचसी को गोद लेने के बाद वहां बुनियादी सुविधाओं के साथ डॉक्टरों की व्यवस्था सुदृढ़ की गई है। सीएचसी के ही डाॅक्टरों को जुगैल व गुरमुरा के अस्पतालों से संबद्ध किए जाने से दिक्कत रहती है। इसे जल्द ही दूर किया जाएगा। पिछले एक साल में दो-तीन बार अस्पताल का निरीक्षण किया हूं। जल्द ही फिर निरीक्षण कर जो कमियां होंगी उसे दूर करूंगा। हाईवे का अस्पताल होने के कारण यहां ट्रामा सुविधाओं का भी विस्तार कराया जाएगा। -संजीव सिंह गोंड, समाज कल्याण राज्य मंत्री
दुद्धी सीएचसी : नहीं बढ़ सका बेड, गैलरी और बरामदे में भर्ती होते हैं मरीज
झारखंड और छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित दुद्धी सीएचसी को पूर्व विधायक रामदुलार गोंड ने गोद लिया था। अस्पताल में मरीजों की भीड़ को देखते हुए यहां 20 बेड अतिरिक्त लगाकर क्षमता 50 बेड करने के लिए सीएमओ, डिप्टी सीएम सहित अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा था। दुष्कर्म के मामले में पूर्व विधायक के जेल जाने के बाद सीएचसी को उसके हाल पर छोड़ दिया गया।
करीब डेढ़ साल बाद भी बेड नहीं बढ़ सके हैं। ऐसे में मरीजों को अक्सर गैलरी व बरामदे में स्ट्रेचर पर लेटाकर उपचार करना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टर-कर्मचारियों की कमी है। सफाई कर्मी भी नहीं है। इससे अक्सर गंदगी पसरा रहता है। परिसर के पिछले हिस्से में गंदगी की भरमार है। अल्ट्रासाउंड सेवा यहां भी उपलब्ध नहीं है, जिसका लाभ निजी केंद्र संचालक उठा रहे हैं।
अधीक्षक डॉ. शाह आलम ने बताया कि बेड बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। डॉक्टर भी पहले से बढ़े हैं। कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए पत्र नियमित भेजा जा रहा है।
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दो साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी अस्पतालों की बीमारी दूर नहीं हो पाई है। कहीं डॉक्टरों की कमी है तो कहीं जांच सेवाएं नदारद हैं। स्त्री रोग, बाल रोग जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं। अल्ट्रासाउंड सेवा ठप है।
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चोपन में हाईवे पर ब्लैक स्पॉट के पास स्थित अस्पताल में ट्रामा सेंटर जैसी सुविधाओं की उपलब्धता दुर्घटनाओं में मौत के आंकड़ों को कम करने में बेहद जरूरी, लेकिन यह अस्पताल भी सिर्फ रेफरल रह गया है।
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वैनी सीएचसी : पांच में से सिर्फ तीन डॉक्टर, जर्जर आवासों में नहीं रुकता कोई
रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के नगवां ब्लॉक के सीएचसी वैनी को विधायक भूपेश चौबे ने गोद लिया है। बिहार बॉर्डर पर स्थित नगवां ब्लॉक का यह अस्पताल में पहले से ही सेवाएं बदहाल हैं। अब भी वही हाल है। यहां डॉक्टरों के पांच पद हैं, जिसमें तीन पर तैनाती है।
इसमें भी डॉ. रोहित सिंह के अधीक्षक का चार्ज होने के चलते विभागीय कार्यों में ही उलझे रहते हैं। अन्य दो डॉक्टर शिफ्टवार ड्यूटी करते हैं। उन्हें दूसरे पीएचसी का भी चार्ज दिया गया है। आवास जर्जर होने के चलते अधीक्षक को छोड़ कोई डॉक्टर यहां नहीं रुकता। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को अक्सर रेफर होना पड़ता है। फार्मासिस्ट के दो में से एक पर तैनाती है।
दो स्टाफ नर्स और एक वार्ड ब्वाय के भरोसे यह अस्पताल है। मलेरिया, टाइफाइड, शुगर, टीबी जैसी जांच होती है। एक माह से एक्सरे भी शुरू हो गया है। अन्य जांच के लिए मरीज जिला अस्पताल जाते हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से गर्भवती को लंबी दूरी तय कर लोढ़ी जाना पड़ता है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. रोहित सिंह का कहना है कि स्टाफ की कमी दूर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सेवा देने का प्रयास रहता है।
घोरावल : अल्ट्रासाउंड मशीन आई, चल नहीं पाई, विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य के गोद लिए घोरावल सीएचसी में न आर्थो सर्जन हैं और न ही जनरल सर्जरी के डॉक्टर। बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र सर्जन के पद भी खाली है। करीब दो साल पहले यहां अल्ट्रासाउंड मशीन आई थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट या टेक्निशियन के अभाव में इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर ही जांच करानी होती है।
अस्पताल में अधीक्षक समेत कुल 5 डॉक्टर कार्यरत हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों में सिर्फ महिला रोग, फिजिशियन और एनेस्थेटिक ही कार्यरत हैं। अल्ट्रासाउंड के साथ सीटी स्कैन व अन्य ज़रूरी जांच नहीं हो पाती। यहां से गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है अथवा वे निजी अस्पतालों के चंगुल में फंसकर शोषण का शिकार हो जाते हैं। कर्मचारियों के आवास जर्जर हैं।
बरसात में उनमें पानी घुस जाता है। आवासों की शौचालय व्यवस्था बदहाल है। स्वास्थ्यकर्मी भय के साये में रहते हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. नरेंद्र सरोज ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों व अल्ट्रासाउंड टेक्नीशियन के लिए विभागीय स्तर पर डिमांड की गई है। अभी कुल पांच डॉक्टर कार्यरत हैं।
घोरावल सीएचसी को गोद लेने के बाद यहां अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाया गया। महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई। ब्लड स्टोरेज केंद्र स्थापित किया गया है। बंद पड़े एक्स रे मशीन को चालू कराया गया। कायाकल्प के तहत कई कार्य कराए गए। अल्ट्रासाउंड जांच शुरू कराने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी यहां लगाने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार मौर्या, विधायक, घोरावल।
चोपन : हाईवे पर ब्लैक स्पॉट के पास अस्पताल, फिर भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं
सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर चोपन क्षेत्र में होती हैं। इस कारण ही महज 10 किमी के बीच सलखन, पटवध, चोपन बैरियर, चोपन कस्बा, डाला में पांच ब्लैक स्पॉट हैं। हाईवे के अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने पर सड़क हादसों में होने वाली मौत को कम करने के सुझाव लगातार आते रहते हैं। इसमें चोपन सीएचसी का नाम सबसे ऊपर है।
ओबरा विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड ने इसे गोद भी लिया है, बावजूद यहां कोई ऐसी सुविधा नहीं है, जिससे किसी घायल की जान बच सके। सिर्फ प्राथमिक उपचार ही हो पाता है। यहां सात डॉक्टरों के पद हैं, जबकि तैनाती सिर्फ दो की है। संविदा चिकित्सकों के भरोसे जैसे-तैसे अस्पताल चल रहा है। रेडियोलॉजिस्ट व टेक्निशियन के अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच ठप है। ऐसे में मरीज जिला अस्पताल रेफर हो जाते हैं। व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जैन का कहना है कि चोपन सीएचसी में पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो तो यह आदिवासी क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ा मददगार हो सकता है।
चोपन सीएचसी को गोद लेने के बाद वहां बुनियादी सुविधाओं के साथ डॉक्टरों की व्यवस्था सुदृढ़ की गई है। सीएचसी के ही डाॅक्टरों को जुगैल व गुरमुरा के अस्पतालों से संबद्ध किए जाने से दिक्कत रहती है। इसे जल्द ही दूर किया जाएगा। पिछले एक साल में दो-तीन बार अस्पताल का निरीक्षण किया हूं। जल्द ही फिर निरीक्षण कर जो कमियां होंगी उसे दूर करूंगा। हाईवे का अस्पताल होने के कारण यहां ट्रामा सुविधाओं का भी विस्तार कराया जाएगा। -संजीव सिंह गोंड, समाज कल्याण राज्य मंत्री
दुद्धी सीएचसी : नहीं बढ़ सका बेड, गैलरी और बरामदे में भर्ती होते हैं मरीज
झारखंड और छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित दुद्धी सीएचसी को पूर्व विधायक रामदुलार गोंड ने गोद लिया था। अस्पताल में मरीजों की भीड़ को देखते हुए यहां 20 बेड अतिरिक्त लगाकर क्षमता 50 बेड करने के लिए सीएमओ, डिप्टी सीएम सहित अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा था। दुष्कर्म के मामले में पूर्व विधायक के जेल जाने के बाद सीएचसी को उसके हाल पर छोड़ दिया गया।
करीब डेढ़ साल बाद भी बेड नहीं बढ़ सके हैं। ऐसे में मरीजों को अक्सर गैलरी व बरामदे में स्ट्रेचर पर लेटाकर उपचार करना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टर-कर्मचारियों की कमी है। सफाई कर्मी भी नहीं है। इससे अक्सर गंदगी पसरा रहता है। परिसर के पिछले हिस्से में गंदगी की भरमार है। अल्ट्रासाउंड सेवा यहां भी उपलब्ध नहीं है, जिसका लाभ निजी केंद्र संचालक उठा रहे हैं।
अधीक्षक डॉ. शाह आलम ने बताया कि बेड बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। डॉक्टर भी पहले से बढ़े हैं। कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए पत्र नियमित भेजा जा रहा है।