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आतिथ्य सत्कार और धर्म को नहीं छोड़ना चाहिए

Thu, 18 Mar 2021 11:13 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 11:13 PM IST
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Hospitality and religion should not be abandoned
केकराही। किसान सेवा सहकारी संघ परिसर में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन साध्वी ऋचा शुक्ला ने श्रोताओं को शिव कथा सुनाया। कहा कि भगवान शिव कैलाश से कुंभज ऋषि के आश्रम सती जी के साथ राम कथा सुनने गए। शिव जी ने तो कथा सुनी लेकिन माता सती ने कथा नहीं सुनी। शिव जी ने कथा सुनी तो उन्हें राम जी से स्नेह हुआ और सती ने नहीं सुनी तो उन्हें संदेह हुआ। कथा सम्राट ध्रुव ने कहा कि हमें दो चीजें नहीं छोड़ना चाहिए, पहला आतिथ्य सत्कार, दूसरा अपना धर्म। क्योंकि जब विश्वामित्र पधारे थे तो अयोध्या के राजा दशरथ ने उनका भव्य सत्कार किया था। जहां तक धर्म की बात आती है तो दशरथ के वंशज रहे हरिश्चंद्र ने अपने धर्म की रक्षा के लिए खुद को डोम के हाथों बेच कर श्मसान घाट की रखवाली की। इसके बाद अभिषेकात्मक रुद्र महायज्ञ की आरती गायन अभिषेकात्मक रुद्र महायज्ञ के यज्ञाचार्य प्रशांत त्रिपाठी, हरिराम मिश्र ने कराई। आरती पूजन यजमान पूर्व प्रधान राजू केशरी और पत्नी आशा देवी ने किया।
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