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Sonebhadra News: खेत-खलिहान में घूम रहे गुरुजी, फिर भी नहीं मिल रहे बच्चे
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सोनभद्र। शिक्षण सत्र का पहला महीना बीत चुका है। परिषदीय विद्यालयों से आठवीं की पढ़ाई पूरी करने वाले हजारों बच्चों का अभी भी नौवीं में दाखिला नहीं हो पाए है। ड्रॉप आउट रोकने के लिए शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों को ढूंढ रहे हैं, लेकिन वहां भी उनका पता नहीं हैं। कोई अपने अभिभावकों के साथ दूसरे जिलों में गेहूं कटाई के लिए चला गया है तो कोई शादी-विवाह में शामिल होने रिश्तेदार के घर गया है। ऐसे में माध्यमिक स्कूलों में नामांकन की गति काफी सुस्त है।
शिक्षण सत्र 2024-25 में जिले के परिषदीय विद्यालयों से 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने आठवीं कक्षा पास की है। इन सभी का नौंवीं में दाखिला कराया जाना है। इसके लिए एक अप्रैल को नए सत्र की शुरुआत के पहले दिन से ही कवायद शुरू हो गई थी। सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों से संपर्क कर आठवीं पास करने वाले बच्चों की सूची लें और उनके घर जाकर नामांकन के लिए प्रेरित करें। शिक्षक यह प्रयास कर भी रहे हैं, लेकिन इसका कोई खास असर अब तक नहीं दिख रहा है। हाल यह है कि नए सत्र का पहला महीना बीतने के बाद भी 30 फीसदी बच्चों का नामांकन भी नौवीं कक्षा में नहीं हो पाया है। शिक्षकों की दलील है कि वह बच्चों की तलाश में घर-घर जा रहे हैं, लेकिन बच्चे वहां मौजूद ही नहीं है। कोई अपने माता-पिता के साथ गेहूं की कटाई के लिए आसपास के अन्य जिलों में गया है तो कोई रिश्तेदारियों में हो रही शादी में शिरकत करने पहुंचा है। इसके अलावा बहुत से अभिभावक राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के न होने से भी अपने बच्चों का दाखिला वहां कराने से कतरा रहे हैं।
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पिछले साल सिर्फ 68 फीसदी हुआ था नामांकन
आठवीं पास करने वाले विद्यार्थियों का नौवीं में राजकीय विद्यालयों में नामांकन की दर अच्छी नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2023-24 में 42748 बच्चों ने परिषदीय विद्यालयों से आठवीं कक्षा पास की थी। इसमें सिर्फ 29 हजार का दाखिला ही राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में हुआ था। शेष बच्चे वित्तविहीन विद्यालयों में चले गए या पढ़ाई छोड़ दिए। इस मामले में सबसे खराब स्थिति बभनी और नगवां की रही, जहां महज 42 प्रतिशत ही बच्चाें ने नौंवीं में प्रवेश लिया। इसके पीछे इन इलाकों में स्कूलों की दूरी भी वजह रही थी। हालांकि इस बार बच्चों की सहूलियत के लिए छह नए राजकीय हाईस्कूल भी संचालित किए गए हैं, जिससे पढ़ाई के लिए किसी को दूर न जाना पड़े।
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टीसी और रिजल्ट का इंतजार भी वजह
शिक्षकों की मानें तो नौंवीं में नामांकन की गति कम होने की वजह आठवीं कक्षा पास करने वाले बच्चों का विद्यालय से टीसी और रिजल्ट समय से उपलब्ध न हो पाना है। बीजपुर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय में शिक्षकों की खींचतान के चलते काफी समय तक बच्चे टीसी और रिजल्ट के लिए भटकते रहे। कई बार मामला अधिकारियों तक भी पहुंचा। कुछ ऐसी ही स्थिति म्योरपुर, चोपन और कोन ब्लॉक के कई विद्यालयों की भी है।
सभी शिक्षकों को नामांकन बढ़ाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। आठवीं पास एक-एक बच्चों के घर जाकर शिक्षक संपर्क भी कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में बच्चों के घर पर मौजूद न होने के कारण नामांकन में दिक्कत की बात सामने आई है। अन्य जो भी कारण हैं, उस पर विचार कर समाधान कराया जा रहा है। इस बार नामांकन बढ़ेगा। -जयराम सिंह, डीआईओएस।
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शिक्षण सत्र 2024-25 में जिले के परिषदीय विद्यालयों से 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने आठवीं कक्षा पास की है। इन सभी का नौंवीं में दाखिला कराया जाना है। इसके लिए एक अप्रैल को नए सत्र की शुरुआत के पहले दिन से ही कवायद शुरू हो गई थी। सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों से संपर्क कर आठवीं पास करने वाले बच्चों की सूची लें और उनके घर जाकर नामांकन के लिए प्रेरित करें। शिक्षक यह प्रयास कर भी रहे हैं, लेकिन इसका कोई खास असर अब तक नहीं दिख रहा है। हाल यह है कि नए सत्र का पहला महीना बीतने के बाद भी 30 फीसदी बच्चों का नामांकन भी नौवीं कक्षा में नहीं हो पाया है। शिक्षकों की दलील है कि वह बच्चों की तलाश में घर-घर जा रहे हैं, लेकिन बच्चे वहां मौजूद ही नहीं है। कोई अपने माता-पिता के साथ गेहूं की कटाई के लिए आसपास के अन्य जिलों में गया है तो कोई रिश्तेदारियों में हो रही शादी में शिरकत करने पहुंचा है। इसके अलावा बहुत से अभिभावक राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के न होने से भी अपने बच्चों का दाखिला वहां कराने से कतरा रहे हैं।
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पिछले साल सिर्फ 68 फीसदी हुआ था नामांकन
आठवीं पास करने वाले विद्यार्थियों का नौवीं में राजकीय विद्यालयों में नामांकन की दर अच्छी नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2023-24 में 42748 बच्चों ने परिषदीय विद्यालयों से आठवीं कक्षा पास की थी। इसमें सिर्फ 29 हजार का दाखिला ही राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में हुआ था। शेष बच्चे वित्तविहीन विद्यालयों में चले गए या पढ़ाई छोड़ दिए। इस मामले में सबसे खराब स्थिति बभनी और नगवां की रही, जहां महज 42 प्रतिशत ही बच्चाें ने नौंवीं में प्रवेश लिया। इसके पीछे इन इलाकों में स्कूलों की दूरी भी वजह रही थी। हालांकि इस बार बच्चों की सहूलियत के लिए छह नए राजकीय हाईस्कूल भी संचालित किए गए हैं, जिससे पढ़ाई के लिए किसी को दूर न जाना पड़े।
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टीसी और रिजल्ट का इंतजार भी वजह
शिक्षकों की मानें तो नौंवीं में नामांकन की गति कम होने की वजह आठवीं कक्षा पास करने वाले बच्चों का विद्यालय से टीसी और रिजल्ट समय से उपलब्ध न हो पाना है। बीजपुर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय में शिक्षकों की खींचतान के चलते काफी समय तक बच्चे टीसी और रिजल्ट के लिए भटकते रहे। कई बार मामला अधिकारियों तक भी पहुंचा। कुछ ऐसी ही स्थिति म्योरपुर, चोपन और कोन ब्लॉक के कई विद्यालयों की भी है।
सभी शिक्षकों को नामांकन बढ़ाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। आठवीं पास एक-एक बच्चों के घर जाकर शिक्षक संपर्क भी कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में बच्चों के घर पर मौजूद न होने के कारण नामांकन में दिक्कत की बात सामने आई है। अन्य जो भी कारण हैं, उस पर विचार कर समाधान कराया जा रहा है। इस बार नामांकन बढ़ेगा। -जयराम सिंह, डीआईओएस।