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Sonebhadra News: लोक सेवक के खिलाफ एफआईआर से पहले सरकार की अनुमति जरूरी
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सोनभद्र। किसी लोकसेवक के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है। शनिवार को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी आबिद शमीम की अदालत ने दो इंस्पेक्टरों सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर के लिए दाखिल अर्जी खारिज कर दी। सदर तहसील में तैनात संग्रह अमीन की पत्नी ने कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट ने पीड़िता को सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की छूट दी है।
रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के जैत गांव निवासी व सदर तहसील में संग्रह अमीन के रूप में तैनात अवधेश कुमार की पत्नी उर्मिला देवी की तरफ से तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक क्राइम ब्रांच संजीव सिंह, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रॉबर्ट्सगंज सतेंद्र राय, पुलिसकर्मी अमर सिंह, जगदीश मौर्या, रितेश पटेल, प्रेम प्रकाश, बृजेश दुबे के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। अवगत कराया गया था कि उसके पति के खिलाफ राॅबर्ट्सगंज पुलिस और काइम ब्रांच ने 25 अक्तूबर 2023 को गलत तरीके से गैंगस्टर एक्ट का केस दर्ज किया गया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय ने कार्रवाई को विधि विरुद्ध पाते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज की गई एफआईआर को 22 नवंबर 2023 को खारिज कर दिया। आरोप लगाया गया था कि इससे खफा होकर दो निरीक्षक और पुलिसकर्मी 13 जनवरी 2024 की दोपहर उसके घर पहुंचे और सार्वजनिक तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया। 20 अक्तूबर 2024 की दोपहर पहुंचकर तोड़फोड़ की गई। उसे, उसके परिवार वालों को धमकियां दी गई। मामले की जानकारी पुलिस के उच्चाधिकारियों को दी गई। मदद न मिलने पर न्यायालय की शरण ली गई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि आरोपी बताए जा रहे लोग पुलिस कर्मचारी और अधिकारी हैं जो लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं। धारा 218 बीएनएसएस के अनुसार किसी लोक सेवक के विरुद्ध कोई अभियोग पंजीकृत कराए जाने से पूर्व राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है लेकिन पत्रावली में ऐसा कोई प्रपत्र दाखिल नहीं है।
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रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के जैत गांव निवासी व सदर तहसील में संग्रह अमीन के रूप में तैनात अवधेश कुमार की पत्नी उर्मिला देवी की तरफ से तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक क्राइम ब्रांच संजीव सिंह, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रॉबर्ट्सगंज सतेंद्र राय, पुलिसकर्मी अमर सिंह, जगदीश मौर्या, रितेश पटेल, प्रेम प्रकाश, बृजेश दुबे के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। अवगत कराया गया था कि उसके पति के खिलाफ राॅबर्ट्सगंज पुलिस और काइम ब्रांच ने 25 अक्तूबर 2023 को गलत तरीके से गैंगस्टर एक्ट का केस दर्ज किया गया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय ने कार्रवाई को विधि विरुद्ध पाते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज की गई एफआईआर को 22 नवंबर 2023 को खारिज कर दिया। आरोप लगाया गया था कि इससे खफा होकर दो निरीक्षक और पुलिसकर्मी 13 जनवरी 2024 की दोपहर उसके घर पहुंचे और सार्वजनिक तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया। 20 अक्तूबर 2024 की दोपहर पहुंचकर तोड़फोड़ की गई। उसे, उसके परिवार वालों को धमकियां दी गई। मामले की जानकारी पुलिस के उच्चाधिकारियों को दी गई। मदद न मिलने पर न्यायालय की शरण ली गई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि आरोपी बताए जा रहे लोग पुलिस कर्मचारी और अधिकारी हैं जो लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं। धारा 218 बीएनएसएस के अनुसार किसी लोक सेवक के विरुद्ध कोई अभियोग पंजीकृत कराए जाने से पूर्व राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है लेकिन पत्रावली में ऐसा कोई प्रपत्र दाखिल नहीं है।
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