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शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही सरकार : लालबिहारी
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अनपरा। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और शिक्षक एमएलसी लालबिहारी यादव ने शुक्रवार को क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया। यहां वित्तविहीन शिक्षकों से मिलकर समस्याएं सुनीं। पठन-पाठन की समस्याओं को भी जाना। कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है।
शुक्रवार को उन्होंने शक्तिनगर जीआईसी, अनपरा के अवधूत भगवान राम महाविद्यालय, सुभाष इंटरमीडिएट कॉलेज, सुभाष महाविद्यालय का भ्रमण किया। वित्तविहीन शिक्षकों ने मानदेय की मांग की। एमएलसी लाल बिहारी यादव ने बताया कि कई विद्यालयों में वित्तविहीन शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्हें सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जाता है। इसके लिए सदन में आवाज उठाई जाएगी। क्षेत्र में कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है। शिक्षक किसी तरह सुदूर इलाकों में जाकर बच्चाें को पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार शिक्षकाें की पुरानी पेंशन बहाल नहीं कर रही है। पहले विद्यालय खोलने के लिए 17 बिस्वा जमीन और 38 हजार में हाईस्कूल की मान्यता मिल जाती थी। नई शिक्षा नीति के तहत 52 बिस्वा जमीन और 11 लाख रुपये में विद्यालय की मान्यता मिल रही है। आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राजकीय और छोटे निजी विद्यालयों को बंद कर पूंजीपतियों के हाथ में विद्यालयों को देना चाहती है। शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सरकार की प्राथमिकता में होती है, लेकिन सरकार सभी में फेल है। शिक्षकों की समस्याओं और विद्यालयों की स्थितियों को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा। इस दौरान सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय यादव के साथ अन्य मौजूद रहे।
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शुक्रवार को उन्होंने शक्तिनगर जीआईसी, अनपरा के अवधूत भगवान राम महाविद्यालय, सुभाष इंटरमीडिएट कॉलेज, सुभाष महाविद्यालय का भ्रमण किया। वित्तविहीन शिक्षकों ने मानदेय की मांग की। एमएलसी लाल बिहारी यादव ने बताया कि कई विद्यालयों में वित्तविहीन शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्हें सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जाता है। इसके लिए सदन में आवाज उठाई जाएगी। क्षेत्र में कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है। शिक्षक किसी तरह सुदूर इलाकों में जाकर बच्चाें को पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार शिक्षकाें की पुरानी पेंशन बहाल नहीं कर रही है। पहले विद्यालय खोलने के लिए 17 बिस्वा जमीन और 38 हजार में हाईस्कूल की मान्यता मिल जाती थी। नई शिक्षा नीति के तहत 52 बिस्वा जमीन और 11 लाख रुपये में विद्यालय की मान्यता मिल रही है। आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राजकीय और छोटे निजी विद्यालयों को बंद कर पूंजीपतियों के हाथ में विद्यालयों को देना चाहती है। शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सरकार की प्राथमिकता में होती है, लेकिन सरकार सभी में फेल है। शिक्षकों की समस्याओं और विद्यालयों की स्थितियों को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा। इस दौरान सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय यादव के साथ अन्य मौजूद रहे।
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