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घोरावल में जननी सुरक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Mon, 09 Feb 2015 11:23 PM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल क्षेत्र में राष्ट्रीय जननी सुरक्षा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना के लाभार्थियों को चेकों को उनके खातों में न भेज कर, सीधे एएनएम के खातों में भेजा गया है।
इस मामले की जांच उप मुख्य चिकित्साधिकारी कर रहे हैं। केंद्र सरकार संस्थागत प्रसव बढ़ाने, मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए जननी सुरक्षा योजना चला रही है।
इसके तहत संस्थागत प्रसव कराने पर लाभार्थी के साथ ही एएनएम को भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है। नियम है कि लाभार्थियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खाते में भेजी जाएगी।
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लेकिन घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में ऐसा नहीं हुआ। यहां प्रसव के लिए आई महिलाओं की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में न भेजकर सीधे एएनएम के खाते में भेज दी जा रही थी।
सीएचसी में यह फर्जीवाड़ा काफी दिनों से चल रहा था। अगस्त 2014 में स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक का चार्ज लेने के बाद यह मामला डा. सुभाषचंद्र सिंह के संज्ञान में आया।
उन्होंने पहले अपने स्तर से इसकी जांच शुरू कराई। जांच में पाया गया कि सात एएनएम के खाते में लाभार्थियों को रुपये भेजे गए हैं। हालांकि उन्होंने एएनएम और लाभार्थियों का नाम बताने से यह कहकर इनकार कर दिया कि मामला सीएमओ के संज्ञान में दे दिया गया है।
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इस मामले की जांच उप मुख्य चिकित्साधिकारी कर रहे हैं। केंद्र सरकार संस्थागत प्रसव बढ़ाने, मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए जननी सुरक्षा योजना चला रही है।
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इसके तहत संस्थागत प्रसव कराने पर लाभार्थी के साथ ही एएनएम को भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है। नियम है कि लाभार्थियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खाते में भेजी जाएगी।
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लेकिन घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में ऐसा नहीं हुआ। यहां प्रसव के लिए आई महिलाओं की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में न भेजकर सीधे एएनएम के खाते में भेज दी जा रही थी।
सीएचसी में यह फर्जीवाड़ा काफी दिनों से चल रहा था। अगस्त 2014 में स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक का चार्ज लेने के बाद यह मामला डा. सुभाषचंद्र सिंह के संज्ञान में आया।
उन्होंने पहले अपने स्तर से इसकी जांच शुरू कराई। जांच में पाया गया कि सात एएनएम के खाते में लाभार्थियों को रुपये भेजे गए हैं। हालांकि उन्होंने एएनएम और लाभार्थियों का नाम बताने से यह कहकर इनकार कर दिया कि मामला सीएमओ के संज्ञान में दे दिया गया है।