यूपी: अल्ट्रासाउंड के लिए लाइन में खड़े युवक की अचानक बिगड़ी तबियत, चंद मिनट में तोड़ दिया दम; सनसनी
पेट दर्द की शिकायत पर दोपहर करीब 12 बजे बढ़ौली चौक स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचे युवक की अल्ट्रासाउंड के लिए लाइन में खड़े-खड़े अचानक तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही मिनट में उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हालत बिगड़ने के बावजूद सेंटर पर उदासीनता बरती गई। युवक को करीब पांच घंटे तक जांच के लिए इंतजार करना पड़ा।
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सोनभद्र के बढ़ौली चौक स्थित एक प्रतिष्ठित डायग्नोस्टिक सेंटर में अल्ट्रासाउंड के लिए पांच घंटे इंतजार एक युवक के लिए महंगा पड़ गया। रूपनारायण (22) की जब तक बारी आती, तब तक उसकी हालत बिगड़ गई। स्थिति बिगड़ने पर अल्ट्रासाउंड किया गया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई।
नाराज परिवार वालों ने अल्ट्रासाउंड कर्मियों-संचालक पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। दावा किया कि बार-बार मिन्नत के बावजूद जल्दी नहीं दिखाई गई। वहीं सेंटर संचालक ने दावा किया कि युवक लंबे समय से लीवर की बीमारी से पीड़ित था। उनके सेंटर स्तर पर कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
पत्नी पुष्पा के मुताबिक ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी निवासी रूपनारायण को पेट में दर्द की शिकायत थी। वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए दोपहर 12 बजे बढ़ौली चौक स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचा था। आरोप है कि उनकी हालत को देखते हुए वह मौजूद स्टॉफ से बार-बार जल्दी अल्ट्रासाउंड का अनुरोध कर रही थी।
हर बार आधे-आधे घंटे इंतजार की बात कहते हुए टाला जाता रहा। बाद में जब हालत बिगड़ गई तब उसे अल्ट्रासाउंड के लिए ले जाया गया। वह बाहर आया तो उसकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद मौके पर देर तक लोगों में नाराजगी की स्थिति बनी रही। पीड़ित महिला लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग करती रही।
जानकारी पाकर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने पीड़िता से घटना की जानकारी ली और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि परिवार वाले शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी नहीं हुए। देर शाम शव को लेकर वहां से चले गए।
उधर, इस बारे में संबंधित सेंटर के संचालक डाॅ. आरएस सिंह का कहना था कि मरीज लंबे समय से लीवर की बीमारी से पीड़ित था। अगर उसे किसी डॉक्टर ने रेफर किया होता तो इमरजेंसी को देखते हुए तत्काल अल्ट्रासाउंड कर लिया जाता। चूंकि मरीजों की लंबी लाइन थी। इसलिए इंतजार करना पड़ा। उसके परिवार वालों ने खराब स्थिति की जानकारी नहीं दी। जैसे ही जानकारी मिली वैसे ही अल्ट्रासाउंड किया गया। मौत उनके सेंटर से जाने के बाद हुई।
बताते चलें कि मेडिकल कॉलेज में जहां एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती से मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं प्राइवेट सेंटर में भी कई बार मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि मृतक के परिवार वालों से पोस्टमार्टम के लिए कहा गया लेकिन वह तैयार नहीं हुए। सीएमओ डॉ. रमेश कुमार मिश्र का कहना था कि अगर इस मामले में कोई शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।