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Sonebhadra News: शराब तस्करी के लिए जालसाजों ने बनवाए थे फर्जी दस्तावेज, कई जिलों की पुलिस को दिया चकमा

Mon, 31 Mar 2025 11:29 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 31 Mar 2025 11:29 PM IST
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Fraudsters had prepared fake documents for liquor smuggling and fooled the police of many districts
गैस टैंकर में छिपाकर शराब की तस्करी का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस सकते में है। तस्करी में संलिप्त जालसाजों ने जांच से बचने के लिए आवश्यक वस्तु सेवा से जुड़े गैस टैंकर का ही इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि आईओसीएल के जाली दस्तावेज भी बनवाए।
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इसी दस्तावेज के आधार पर वह पंजाब से निकलकर यूपी के कई जिलों को पार करते हुए सोनभद्र तक पहुंच आए थे। सोनभद्र में पुलिस की चौकसी के चलते बिहार बॉर्डर से महज कुछ किमी पहले तस्करी का भंडाफोड़ हो गया। हालांकि पुलिस यह छानबीन में लगी है कि इस तरीके का इस्तेमाल कर तस्कर कहीं पहले भी तो शराब नहीं पहुंचा चुके हैं।
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रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने शनिवार की रात सुकृत से हिंदुआरी मार्ग पर चेकिंग के दौरान इंडियन आयल गैस लिखे राजस्थान नंबर के एक टैंकर को रोका था। चालक ने पुलिस को जो इन्वायस दिखाए, वह आईओसीएल जालंधर से जारी था।
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इसके अनुसार टैंकर जालंधर से झांसी गैस एजेंसी के लिए रवाना किया गया था, जबकि वह करीब पांच सौ किमी दूर बिहार बॉर्डर के पास सोनभद्र पहुंच गया था। शक के आधार पर पुलिस ने तलाशी ली तो टैंक के अंदर छिपाकर रखी गई अंग्रेजी शराब की 898 पेटियां देख दंग रह गई।
इसके बाद जब चालक को गिरफ्तार कर कड़ाई से पूछताछ शुरू की गई तो उसने शराब तस्करी की कहानी बयां की। मामले में सोमवार को एक और खुलासा हुआ। इंडियन आयल का नाम व लोगो लगाकर दौड़ रहा टैंकर का कंपनी में कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
चालक की ओर से जो इन्वायस पेश की गई थी, वह भी फर्जी है। पुलिस को चकमा देने के लिए जालसाजों ने इंडियन ऑयल के नाम पर जाली इन्वायस तैयार किया था। पंजाब से सोनभद्र तक सभी जगह वह इसी आधार पर आगे बढ़ते जा रहे थे। गैस टैंकर होने के कारण अमूमन उसकी जांच नहीं होती थी और अगर किसी ने रोका भी तो फर्जी इन्वायस दिखाकर चालक आगे बढ़ जाता था।
तस्करी के पीछे बड़े गिरोह के संलिप्तता की आशंका है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन छानबीन कर रही है। इसके लिए सर्विलांस सेल को लगाया गया है। एएसपी त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि गैस टैंकर को खोलकर जांच करना खतरनाक होता है।
इसका लाभ तस्करों ने उठाया। हमारे पास सटीक सूचना थी, जिसके आधार पर जांच की गई। बताया कि वाहन चालक और रिसीवर के बीच व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत हो रही थी। दोनों नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है।


इंडियल आयल से अनुबंधित नहीं है टैंकर
टैंकर चालक ने भले ही पुलिस को इंडियन आयल कॉर्पोरेशन जालंधर से जारी इन्वाइस दिखाए थे, जबकि यह टैंकर इंडियन ऑयल से अनुबंधित ही नहीं है। आईओसीएल के उप महाप्रबंधक कॉपोरेट संचार धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने जिस टैंकर को पकड़ा है, वह कंपनी से अनुबंधित नहीं है। इससे संबंधित पकड़े या दिखाए गए कोई भी कागजात आधिकारिक नहीं हैं। ऐसे में जाहिर है कि गैर कानूनी कार्यों के लिए इन कागजातों को फर्जी तरीके बनाया गया होगा।
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