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Sonebhadra News: फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर लगाकर एमपी के चार युवकों ने यूपी पुलिस में पाई नौकरी
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घोरावल। पुलिस विभाग में नौकरी पाने के लिए फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी हासिल करने का खेल सामने आया है। मध्यप्रदेश के चार युवकों ने उत्तर प्रदेश निवासी और अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाकर पुलिस विभाग में आरक्षी नागरिक पुलिस की भर्ती 2023 में चयन करा लिया था। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रभारी निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा के मुताबिक, आरोपी उमेश कुमार, राकेश सिंह, दीपक कुमार और विजय कुमार, चारों मूल रूप से सिंगरौली, मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। भर्ती के दौरान आरोपियों ने खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी बताते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र लगाया और आरक्षण का लाभ लिया। सत्यापन के दौरान पता चला कि ये सभी बैसवार/वैश्य जाति के हैं जो मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल है। जांच में सामने आया कि उमेश कुमार वैश्य ने अपने आवेदन पत्र में घोरावल का पता दिखाकर तहसीलदार से जारी जाति प्रमाणपत्र संलग्न किया था। हकीकत में वह सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील के मझिगवा गांव का निवासी है। बाकी तीनों आरोपी के पते भी मध्यप्रदेश के निकले। प्रभारी निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा ने बताया कि चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है।
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प्रभारी निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा के मुताबिक, आरोपी उमेश कुमार, राकेश सिंह, दीपक कुमार और विजय कुमार, चारों मूल रूप से सिंगरौली, मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। भर्ती के दौरान आरोपियों ने खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी बताते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र लगाया और आरक्षण का लाभ लिया। सत्यापन के दौरान पता चला कि ये सभी बैसवार/वैश्य जाति के हैं जो मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल है। जांच में सामने आया कि उमेश कुमार वैश्य ने अपने आवेदन पत्र में घोरावल का पता दिखाकर तहसीलदार से जारी जाति प्रमाणपत्र संलग्न किया था। हकीकत में वह सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील के मझिगवा गांव का निवासी है। बाकी तीनों आरोपी के पते भी मध्यप्रदेश के निकले। प्रभारी निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा ने बताया कि चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है।
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