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फ्लोरा प्रोजेक्ट की बनी योजना
संवाददाता अमर उजाला सोनभद्र
Updated Sun, 30 Nov 2014 11:06 PM IST
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कोयला खनन क्षेत्र में पर्यावरण का स्तर बेहतर बनाए रखने के लिए एनसीएल की ओर से कृष्णशिला और निगाही कोल परियोजना में फ्लोरा प्रोजेक्ट (पौधरोपण परियोजना) की योजना बनाई गई है।
फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिकों के निर्देशन में दोनों परियोजनाओं में इसके लिए स्थल चयन का काम पूरा कर लिया गया है। इसी तरह निगाही और झिंगुरदा परियोजना क्षेत्र में इको पार्क की स्थापना की कार्ययोजना बनाई गई है।
खदान क्षेत्र में पर्यावरण का स्तर खराब होने की बात सामने आती रहती है। इसको देखते हुए कोल इंडिया के निर्देशन में एनसीएल स्तर से कोल परियोजनाओं में फ्लोरा प्रोजेक्ट पर कार्य करने का निर्णय लिया गया है।
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प्रथम चरण में इसके लिए जनपद की कृष्णशिला और सिंगरौली जिले की निगाही परियोजना में कोयला खदान क्षेत्र के भीतर पांच-पांच हेक्टेअर जमीन के चयन का काम पूरा कर लिया गया है।
कार्य पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हो और इस प्रोजेक्ट के तहत चयनित स्थल पर लगने वाले पौधे पर्यावरण को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचा सके, इसके लिए उत्तरांचल के देहरादून स्थित फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की सहायता ली जा रही है।
इसी तरह निगाही और झिंगुरदा कोयला क्षेत्र में इको पार्क (पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप) स्थापना का निर्णय लिया गया है। इसके लिए जरूरी कवायद पूरी कर ली गई है। सूत्रों की मानें तो चार दिन पूर्व एनसीएल मुख्यालय पर पर्यावरण संबंधी बैठक में योजना को अमलीजामा पहनाने पर चर्चा की गई। दो-तीन माह के भीतर कार्ययोजना के मूर्तरूप ले लेने की उम्मीद है।
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फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिकों के निर्देशन में दोनों परियोजनाओं में इसके लिए स्थल चयन का काम पूरा कर लिया गया है। इसी तरह निगाही और झिंगुरदा परियोजना क्षेत्र में इको पार्क की स्थापना की कार्ययोजना बनाई गई है।
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खदान क्षेत्र में पर्यावरण का स्तर खराब होने की बात सामने आती रहती है। इसको देखते हुए कोल इंडिया के निर्देशन में एनसीएल स्तर से कोल परियोजनाओं में फ्लोरा प्रोजेक्ट पर कार्य करने का निर्णय लिया गया है।
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प्रथम चरण में इसके लिए जनपद की कृष्णशिला और सिंगरौली जिले की निगाही परियोजना में कोयला खदान क्षेत्र के भीतर पांच-पांच हेक्टेअर जमीन के चयन का काम पूरा कर लिया गया है।
कार्य पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हो और इस प्रोजेक्ट के तहत चयनित स्थल पर लगने वाले पौधे पर्यावरण को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचा सके, इसके लिए उत्तरांचल के देहरादून स्थित फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की सहायता ली जा रही है।
इसी तरह निगाही और झिंगुरदा कोयला क्षेत्र में इको पार्क (पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप) स्थापना का निर्णय लिया गया है। इसके लिए जरूरी कवायद पूरी कर ली गई है। सूत्रों की मानें तो चार दिन पूर्व एनसीएल मुख्यालय पर पर्यावरण संबंधी बैठक में योजना को अमलीजामा पहनाने पर चर्चा की गई। दो-तीन माह के भीतर कार्ययोजना के मूर्तरूप ले लेने की उम्मीद है।