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Sonebhadra News: प्रैक्टिकल का नंबर देने के लिए कहीं छत पर तो कहीं स्कूल के बाहर मोबाइल नेटवर्क ढूंढ रहे परीक्षक
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सोनभद्र। यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए बदले नियम ने जिले में परीक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है। एप के जरिए केंद्र से ही नंबर अपलोड करने की बाध्यता के चलते परीक्षक जगह-जगह मोबइल का नेटवर्क ढूंढते फिर रहे हैं। किसी को छत पर चढ़ना पड़ रहा है, तो कोई मोबाइल लेकर विद्यालय के बाहर टहल रहा है। आलम यह है कि जितना वक्त परीक्षा लेने में नहीं लग रहा, उससे ज्यादा समय परीक्षक को नंबर अपलोड करने में देना पड़ रहा है।
प्रायोगिक परीक्षाओं में पारदर्शिता के मद्देनजर बोर्ड ने इस वर्ष से व्यवस्था बदल दी है। परीक्षक बिना केंद्र पर गए मनमाने तरीके से अंक नहीं दे पाएंगे। उन्हें परीक्षा के तुरंत बाद उसी लोकेशन से निर्धारित एप से बोर्ड को नंबर भेजने का निर्देश है। जिले में आने वाले परीक्षकों के लिए यह परेशानी का सबब बन गया है। सुदूर इलाकों में स्थित स्कूलों में नेटवर्क की बड़ी समस्या है। कई जगहों पर नेटवर्क नहीं है, तो कहीं इतना ही सिग्नल आता है, जिससे सिर्फ बात हो सके। इन स्थानों पर परीक्षा के बाद नंबर अपलोड करने में दिक्कतें आ रही हैं। अगर परीक्षक लोकेशन से हटते हैं, तो नंबर अपलोड नहीं होगा। निर्धारित लोकेशन पर नेटवर्क कमजोर रहा है। एक फरवरी से शुरू हुई प्रायोगिक परीक्षा में ऐसी कई शिकायतें विभाग तक पहुंची है। कोई विकल्प न होने के कारण विद्यालय की छत या आसपास के ही किसी ऊंचे स्थान पर पहुंचकर नंबर अपलोड कराया जा रहा है।
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इन ब्लॉकों के केंद्रों में है ज्यादा दिक्कत
पूरे जिले में 190 से अधिक माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें से 118 को प्रायोगिक परीक्षा का केंद्र बनाया गया है। नेटवर्क की सबसे ज्यादा समस्या चोपन, म्योरपुर, नगवां और दुद्धी ब्लॉक के विद्यालयों में हैं। सड़क से दूरी बढ़ते ही वहां सिग्नल कमजोर हो जाता है। हालांकि शिक्षा विभाग की दलील है कि उन्हीं विद्यालयों को ही केंद्र बनाया गया है, जहां नेटवर्क ठीक है। फिर भी कई जगहों पर ऐसी समस्या आ रही है।
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केस 1:
अनपरा के एनसीएल ककरी परियोजना के आवासीय परिसर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में तीन फरवरी को भूगोल की प्रायोगिक परीक्षा थी। परीक्षा के अंक चढ़ाने में खूब फजीहत हुई। नेटवर्क कमजोर होने के चलते कई बार नंबर सबमिट नहीं हो रहा था। परीक्षक की परेशानी को देखते हुए प्रधानाचार्य ने डीआईओएस से संपर्क साधा। तब विद्यालय की छत पर पहुंचकर नंबर अपलोड किया गया।
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केस 2:
जुगैल का क्षेत्र नो नेटवर्क एरिया में है। यहां इंटर की प्रायोगिक परीक्षा के दौरान भी एप से नंबर चढ़ाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ ऐसी ही स्थिति नगवां व चतरा ब्लॉक के कुछ सेंटरों पर आई। हालांकि उच्चाधिकारियों से वार्ता कर लोकेशन आईडी में थोड़ा बदलाव कर किसी तरह नंबर अपलोड किए गए।
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वर्जन...
परीक्षा केंद्र से ही प्रायोगिक नंबर एप के जरिए सीधे बोर्ड को भेजे जाने हैं। एप में अक्षांश, देशांतर के साथ लोकेशन दर्ज होता है। इसमें अंतर आने पर नंबर फीड नहीं हो पाएगा। कई केंद्रों पर नेटवर्क के कारण नंबर दर्ज करने में दिक्कत की शिकायत मिली है। बोर्ड के अधिकारियों से संपर्क कर इसका समाधान कराया जा रहा है।
-जयराम सिंह, डीआईओएस।
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प्रायोगिक परीक्षाओं में पारदर्शिता के मद्देनजर बोर्ड ने इस वर्ष से व्यवस्था बदल दी है। परीक्षक बिना केंद्र पर गए मनमाने तरीके से अंक नहीं दे पाएंगे। उन्हें परीक्षा के तुरंत बाद उसी लोकेशन से निर्धारित एप से बोर्ड को नंबर भेजने का निर्देश है। जिले में आने वाले परीक्षकों के लिए यह परेशानी का सबब बन गया है। सुदूर इलाकों में स्थित स्कूलों में नेटवर्क की बड़ी समस्या है। कई जगहों पर नेटवर्क नहीं है, तो कहीं इतना ही सिग्नल आता है, जिससे सिर्फ बात हो सके। इन स्थानों पर परीक्षा के बाद नंबर अपलोड करने में दिक्कतें आ रही हैं। अगर परीक्षक लोकेशन से हटते हैं, तो नंबर अपलोड नहीं होगा। निर्धारित लोकेशन पर नेटवर्क कमजोर रहा है। एक फरवरी से शुरू हुई प्रायोगिक परीक्षा में ऐसी कई शिकायतें विभाग तक पहुंची है। कोई विकल्प न होने के कारण विद्यालय की छत या आसपास के ही किसी ऊंचे स्थान पर पहुंचकर नंबर अपलोड कराया जा रहा है।
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इन ब्लॉकों के केंद्रों में है ज्यादा दिक्कत
पूरे जिले में 190 से अधिक माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें से 118 को प्रायोगिक परीक्षा का केंद्र बनाया गया है। नेटवर्क की सबसे ज्यादा समस्या चोपन, म्योरपुर, नगवां और दुद्धी ब्लॉक के विद्यालयों में हैं। सड़क से दूरी बढ़ते ही वहां सिग्नल कमजोर हो जाता है। हालांकि शिक्षा विभाग की दलील है कि उन्हीं विद्यालयों को ही केंद्र बनाया गया है, जहां नेटवर्क ठीक है। फिर भी कई जगहों पर ऐसी समस्या आ रही है।
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केस 1:
अनपरा के एनसीएल ककरी परियोजना के आवासीय परिसर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में तीन फरवरी को भूगोल की प्रायोगिक परीक्षा थी। परीक्षा के अंक चढ़ाने में खूब फजीहत हुई। नेटवर्क कमजोर होने के चलते कई बार नंबर सबमिट नहीं हो रहा था। परीक्षक की परेशानी को देखते हुए प्रधानाचार्य ने डीआईओएस से संपर्क साधा। तब विद्यालय की छत पर पहुंचकर नंबर अपलोड किया गया।
केस 2:
जुगैल का क्षेत्र नो नेटवर्क एरिया में है। यहां इंटर की प्रायोगिक परीक्षा के दौरान भी एप से नंबर चढ़ाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ ऐसी ही स्थिति नगवां व चतरा ब्लॉक के कुछ सेंटरों पर आई। हालांकि उच्चाधिकारियों से वार्ता कर लोकेशन आईडी में थोड़ा बदलाव कर किसी तरह नंबर अपलोड किए गए।
वर्जन...
परीक्षा केंद्र से ही प्रायोगिक नंबर एप के जरिए सीधे बोर्ड को भेजे जाने हैं। एप में अक्षांश, देशांतर के साथ लोकेशन दर्ज होता है। इसमें अंतर आने पर नंबर फीड नहीं हो पाएगा। कई केंद्रों पर नेटवर्क के कारण नंबर दर्ज करने में दिक्कत की शिकायत मिली है। बोर्ड के अधिकारियों से संपर्क कर इसका समाधान कराया जा रहा है।
-जयराम सिंह, डीआईओएस।