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Sonebhadra News: एक साल बाद भी नए विद्यालयों काे नहीं मिले शिक्षक-शिक्षामित्र

Thu, 22 May 2025 11:10 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 22 May 2025 11:10 PM IST
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Even after one year, new schools did not get teachers and Shikshamitras
सोनभद्र। पिछले सत्र में शुरू जिले के 14 नए परिषदीय स्कूलों में अब तक संसाधन पूरे नहीं हो पाए हैं। इन स्कूलों को विभाग स्थायी शिक्षक और शिक्षा मित्र भी उपलब्ध नहीं करा सका है।
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बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले में 2061 परिषदीय विद्यालयों का संचालन होता रहा है। आदिवासी बहुल जिले में कई ऐसे इलाके थे, जहां स्कूल न होने से बच्चों को पढ़ने के लिए दूर जाना पड़ता था। ऐसे में विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च कर जिले में कुल 14 नए स्कूलों का निर्माण कराया। इसमें म्योरपुर में पांच, बभनी में एक, कोन-दुद्धी में दो-दो राबर्ट्सगंज, घोरावल, चोपन और नगवां में एक-एक स्कूल शामिल हैं। इनके निर्माण के बाद सत्र 2024-25 में इनका संचालन अधूरी तैयारी और जुगाड़ की व्यवस्था के सहारे शुरू हुआ। यहां बुनियादी स्तर पर काफी कमियां हैं, जिसकी वजह से इन स्कूलों पर शासन की योजनाएं ठीक से संचालित नहीं हो पा रही हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की नए सिरे से स्थायी तैनाती नहीं हो सकी। आस-पास के स्कूलों से कहीं शिक्षा मित्र तो कहीं शिक्षक संबद्ध किए गए हैं। इससे इन स्कूलों के साथ ही संबद्ध किए गए शिक्षकों के स्कूल में व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में पेयजल की समस्या बनी है। घोरावल ब्लॉक के तेंदुहार में पिछले सत्र में प्राथमिक विद्यालय सरईहवा का संचालन शुरू किया गया। इस विद्यालय में 21 बच्चों का नामांकन हैं, मगर शिक्षक या शिक्षामित्र की नियुक्ति नहीं हुई है। दुद्धी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय करिवाखुटरा में 15 बच्चों का नामांकन है। प्राथमिक विद्यालय धाम टोला 20 बच्चों का नामांकन हुआ है। इनमें कोई शिक्षक नहीं है। नगवां ब्लॉक के ढ़ोसरा ग्राम पंचायत के राजस्व गांव दुआरी विद्यालय का संचालन प्राथमिक विद्यालय लोढ़ा के प्रधानाचार्य के भरोसे है। राबर्ट्सगंज के मरकरी में संचालित स्कूल में शिक्षक न होने से नई बाजार के शिक्षामित्र को यहां भेजा गया है। इसी तरह म्योरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय खरवारी टोला किरबिल,परनी द्वितीय, सरतान टोला,बरटोला और रजनी में संचालित नये स्कूलों को भी स्थायी शिक्षक या शिक्षामित्र नहीं मिले। यहां व्यवस्था जुगाड़ के भरोसे है।
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नए विद्यालयों का संचालन आस-पास के स्कूलों के जरिये कराया जा रहा है। इससे यहां बेहतर सेवाएं मिल रही हैं। अगर किसी विद्यालय में कोई समस्या है तो उसे भी दूर कराया जाएगा। -मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए
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