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Sonebhadra News: 17 दिन बाद भी 72 में से 45 क्रय केंद्रों पर नहीं हुई बोहनी, बोरे की कमी बनी वजह

Fri, 17 Apr 2026 11:20 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:20 PM IST
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Even after 17 days, no sales have been recorded at 45 out of the 72 procurement centers; a shortage of gunny bags is the reason.
चोपन बी-पैक्स पर गेहूं खरीद का निरीक्षण करते एडीसीओ अवधेश सिंह। स्रोत स्वयं
सोनभद्र। गेहूं खरीद की व्यवस्था जिले में ध्वस्त हो चुकी है। सरकारी तंत्र की सुस्ती से अन्नदाता पस्त हैं और बिचौलिए मस्त हैं। किसान उपज बेचने के लिए परेशान हैं, मगर सरकारी केंद्रों पर खरीद नहीं हो पा रही। बोरों का अभाव बताकर उन्हें लौटाया जा रहा है।
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हाल यह है कि खरीद शुरू होने के 17 दिन बाद भी पंजीकृत 4501 किसानों में से सिर्फ 155 का ही गेहूं खरीदा जा सका है। सिर्फ 27 पर ही खरीद शुरू हो पाई है, जबकि 72 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। 45 केंद्रों पर बोहनी न होने के पीछे बोरे की कमी बड़ी वजह बनी है। क्रय केंद्रों की इस अव्यवस्था से मजबूर होकर किसान औने-पौने दाम पर उपज बेच रहे हैं।
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जिले के रॉबर्ट्सगंज, करमा, घोरावल, चतरा और नगवां ब्लॉक में गेहूं की पैदावार अच्छी होती है। यही वह समय है, जब किसान कटाई कर गेहूं बेचने क्रय केंद्रों पर पहुंचते हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने का दावा करते हुए एक अप्रैल से ही 72 क्रय केंद्र पूरे जिले में स्थापित कर दिए गए थे, लेकिन कहीं भी बोरे की व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा जब किसान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं तो उन्हें इंतजार करने की बात कह लौटा दिया जा रहा। गेहूं की पैदावार ही यहां किसानों की आमदनी का मुख्य स्रोत है। इसी फसल को बेचकर वह शादी-विवाह, दवाई, पढ़ाई का खर्च जुटाते हैं। वर्तमान में लगन शुरू हो चुका है, मगर उपज न बेचने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। ऐसे में उन्हें बाजार में 2100-2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेचना पड़ रहा है, जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर दाम 2400 से भी अधिक है।
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नई-नई व्यवस्थाएं परेशानी का सबब बन रही हैं। पहले सत्यापन क्रय केंद्र प्रभारी को ही दिया गया था, जिनके पास कोई राजस्व रिकाॅर्ड नहीं है। फिर राजस्व विभाग को खतौनी सत्यापन के लिए आदेशित किया गया जहां आवेदन सप्ताह बाद भी नहीं हो पा रहा है और खरीद अवरुद्ध है। -अशोक कुमार, किसान।
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खतौनी सत्यापन तहसील में रुकी हुई है और क्रय केंद्र पर बोरा भी उपलब्ध नहीं है। जब तक बोरा नहीं उपलब्ध होता लगता है, सत्यापन भी रुका रहेगा। ऐसे में जिन्हें जरूरी होगा, वह बाजार में सस्ते दाम पर गेहूं बेचने के लिए मजबूर ही होंगे। यह एक तरह से जानबूझकर बिचौलियों काे लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। -प्रेम प्रकाश, किसान।
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सत्यापन के लिए कई दिनों से प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी नहीं हो पाया है। क्रय केंद्र अघोषित रूप से बंद ही है। किसान तहसील और क्रय केंद्र का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। यह लगन का सीजन है। गेहूं बिकता तो शादी-विवाह के काम होते। देरी से मुश्किल बढ़ रही है। -कमलेश कुशवाहा, किसान।

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वर्जन...
कोटेदारों से बोरे की व्यवस्था कराकर 27 केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू करा दी गई है। अब तक 155 किसानों से 895 एमटी गेहूं खरीदा गया है। अन्य केंद्रों पर भी जल्द ही खरीद शुरू होगी। 238 गांठ बोरा शीघ्र उपलब्ध होने वाला है। -अमित चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।
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