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एस्मा से सरकार का श्रमिक विरोधी चेहरा उजागर, कर्मचारी संगठनों ने बताया तानाशाही

Thu, 26 Nov 2020 11:08 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 11:08 PM IST
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ESMA exposes government anti labor face, Employees' organizations report dictatorship
सोनभद्र। प्रदेश सरकार ने सूबे में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों की हड़ताल को प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार ने छह माह के लिए एस्मा लागू किया है। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया है। इसकी निंदा करते हुए इसे सरकार का तानाशाही रवैया करार दिया है।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष शिवनारायण सिंह ने कहा कि सरकार की कमजोरी और हठवादिता कानून का दुरुपयोग एस्मा के रूप में फिर सामने आया है। हर उचित माध्यम और मंचों पर कर्मचारी हित में संघर्ष जारी रहेगा। श्रम संगठनो द्वारा श्रमिक और कर्मचारी हित में आवाज बुलंद करने के रुप में होने वाले धरना-प्रदर्शन का हम पूर्ण समर्थन करते हैं। एस्मा के निर्णय की घोर निंदा करते हुए कहा कि इससे सरकारों का कर्मचारी और श्रमिक विरोधी चेहरा उजागर होता है।
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विद्युत संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक इं. एसके सिंह ने कहा कि सरकार के किसी भी निर्णय पर उन्हें बोलने का अधिकार नहीं है। बिजली आवश्यक सेवा में आती है। इसलिए विभाग से जुड़े संगठन बगैर नोटिस दिये हड़ताल आदि का कोई कार्य नहीं करते।
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अटेवा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रंजना सिंह का कहना है कि लोकतंत्र में कर्मचारी हित में आवाज उठाने का अधिकार है। लेकिन सरकार इस अधिकार को भी छीन रही है। सरकार को अधिकारियों, कर्मचारियों की समस्या को समझना चाहिए। अटेवा पुरानी पेंशन बहाली की मांग की सशक्त आवाज है और यह आवाज दबेगी नहीं।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संयोजक अशोक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि एस्मा लगाना सरकार का तानाशाही रवैया है। यह मूल अधिकारों का हनन है। कर्मचारी को अपनी बात कहने का मंच देना और सुनना नियोक्ता का काम है लेकिन सरकार अपने इस कर्तव्य को भूल कर तानाशाही रवैया अपना कर दमनात्मक रूप सामने ला रही है। इसका संगठन घोर विरोध करता है।
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