सोनभद्र। सत्संग यानी सत्य का संग। सत्संग ही मानव जीवन का आधार है और परमार्थ का सूत्रधार भी। सत्य का संग पूरे यत्न के साथ करना चाहिए। सत्संग से बढ़कर जीवन में कुछ भी नहीं। सत्संग से लोक-परलोक दोनों सुधर जाते हैं। ये बातें आचार्य सत्येंद्र कुमार सरस्वती ने कहीं। वे कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ब्रह्मनगर स्थित श्रीसत्य साहित्य कुटीर पर आयोजित वार्षिक संत समागम में भक्तजनों को आशीवर्चन प्रदान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। अपने निज रूप को भूलकर नश्वर देह और भौतिक सुख संसाधनों को अपना मान लेना अहंकार है। इस अहंकार की वजह अविद्या और अज्ञानता है। जब किसी सच्चे सद्गुरु से सत्य का ज्ञान होता है तब यह अविद्या और अज्ञानता स्वत: मिट जाती है और अहंकार समाप्त हो जाता है। इसके बाद भंडारा का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर सत्संग परिवार के जिला प्रमुख तारकेश्वर देव पांडेय, केशव सिंह, अनिल मिश्र, बावन साव, राममूर्ति यादव, सियाराम, मंगला प्रसाद, कौशल दुबे, रामचंद्र दुबे, वीरेंद्र शंकर सिंह एडवोकेट, चंद्रबली पांडेय, राजेश कुमार, संतोष सिंह टुन्नू आदि रहे।