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Sonebhadra News: पांच लाख कार्डधारकों की नहीं हो सकी ई-केवाईसी
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जिले के 33 फीसदी कार्डधारकों की ई-केवाईसी अब तक नहीं हो पाई है। शासन की सख्ती के बावजूद ई-केवाईसी न कराने वाले कार्डधारकों के राशन पर रोक लग सकती है। फिलहाल उन्हें कुछ दिनों की मोहलत दी गई है।
ई-केवाईसी से वंचित कार्डधारकों में सबसे ज्यादा वह हैं, जो नेटवर्क एरिया में रहते हैं। उन्हें दूसरी दुकानों पर जाकर ई-केवाईसी करानी है, मगर वहां कोटेदार भी पहले अपने कार्डधारकों को ही वरीयता दे रहे हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में 396827 लाभार्थी परिवार हैं। इन राशन कार्डों पर 1512981 सदस्यों के नाम दर्ज हैं। वितरण में पारदर्शिता के लिए सरकार का ई-केवाईसी पर जोर है। राशन कार्ड पर अंकित परिवार के प्रत्येक सदस्य की ई-केवाईसी होनी है। अब तक करीब दस लाख लाभार्थियों की ही ई-केवाईसी हो पाई है। यह संख्या कुल कार्डधारकों का तकरीबन 67 फीसदी है। यानि हर तीसरा कार्डधारक अब तक ई-केवाईसी नहीं करा पाया है।
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इसके पीछे एक बड़ी वजह नेटवर्क की समस्या को भी बताई जा रही है। जिले में 44 कोटे की दुकानें नो नेटवर्क एरिया में है। यहां किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं है। फोन पर जरूरी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए भी लोग पेड़ और पहाड़ पर चढ़कर नेटवर्क ढूंढते हैं, मगर ई-केवाईसी के लिए इतनी फजीहत कौन करने जाए।
लिहाजा 33 फीसदी कार्डधारकों के राशन पर ग्रहण लगने की आशंका बनी हुई है।
हालांकि विभाग की ओर से इन कार्डधारकों की सहूलियत के लिए किसी भी कोटे की दुकान पर पहुंचकर ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन दूसरे दुकानों पर पहुंचने के बाद उन्हें उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। कोटेदार अपना आंकड़ा सुधारने के लिए पहले नियमित कार्डधारकों को वरीयता देते हैं।
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ई-केवाईसी से वंचित कार्डधारकों में सबसे ज्यादा वह हैं, जो नेटवर्क एरिया में रहते हैं। उन्हें दूसरी दुकानों पर जाकर ई-केवाईसी करानी है, मगर वहां कोटेदार भी पहले अपने कार्डधारकों को ही वरीयता दे रहे हैं।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में 396827 लाभार्थी परिवार हैं। इन राशन कार्डों पर 1512981 सदस्यों के नाम दर्ज हैं। वितरण में पारदर्शिता के लिए सरकार का ई-केवाईसी पर जोर है। राशन कार्ड पर अंकित परिवार के प्रत्येक सदस्य की ई-केवाईसी होनी है। अब तक करीब दस लाख लाभार्थियों की ही ई-केवाईसी हो पाई है। यह संख्या कुल कार्डधारकों का तकरीबन 67 फीसदी है। यानि हर तीसरा कार्डधारक अब तक ई-केवाईसी नहीं करा पाया है।
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इसके पीछे एक बड़ी वजह नेटवर्क की समस्या को भी बताई जा रही है। जिले में 44 कोटे की दुकानें नो नेटवर्क एरिया में है। यहां किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं है। फोन पर जरूरी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए भी लोग पेड़ और पहाड़ पर चढ़कर नेटवर्क ढूंढते हैं, मगर ई-केवाईसी के लिए इतनी फजीहत कौन करने जाए।
लिहाजा 33 फीसदी कार्डधारकों के राशन पर ग्रहण लगने की आशंका बनी हुई है।
हालांकि विभाग की ओर से इन कार्डधारकों की सहूलियत के लिए किसी भी कोटे की दुकान पर पहुंचकर ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन दूसरे दुकानों पर पहुंचने के बाद उन्हें उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। कोटेदार अपना आंकड़ा सुधारने के लिए पहले नियमित कार्डधारकों को वरीयता देते हैं।