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Sonebhadra News: गांवों में पीने के पानी की बढ़ने लगी समस्या, टैंकर संचालन के लिए नहीं मिले प्रस्ताव
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नगवां ब्लॉक के सोमा गांव में एक निजी सबमर्सिबल पंप से पानी भरते ग्रामीण। संवाद
सोनभद्र। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एक ओर भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर टैंकर संचालन को लेकर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि कई गांवों में लोग बांध, नदी और नालों से चुआड़ का पानी पीने को मजबूर हैं। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि बीते सीजन में अच्छी बारिश होने की वजह से अभी ग्राम पंचायतों में पानी की समस्या नहीं है और अभी तक न ही टैंकर चलाने के लिए प्रस्ताव आया है।
सर्वाधिक पहाड़ी इलाके वाले जिला सोनभद्र में 619 ग्राम पंचायत हैं। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1440 राजस्व गांव हैं। जल निगम ग्रामीण क्षेत्र की तरफ से दावा किया जा रहा है कि जिले के 364 गांवों में हर घर नल जल योजना केे तहत नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर हैंडपंप सूख चुके हैं और पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति भी बाधित है। नगवां ब्लॉक के सोमा गांव में निजी सबमर्सिबल पंप से ग्रामीण पानी भरने को विवश हैं। सुबह-शाम पानी भरने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ लगी रहती है। इसी तरह महुली गांव में कुंए से पानी भरते हुए ग्रामीणों को देखा जा सकता है। सोमा, महुली और बड़ैला समेत अन्य गांवों में हर घर नल जल योजना का पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे इन गांवों में पीने के पानी के लिए लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। गोंगा गांव केे लोग नगवां बांध से पानी से प्यास बुझाने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या बढ़ने के बाद कार्रवाई के बजाय पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि गर्मी के चरम समय में लोगों को राहत मिल सके। इधर, जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी भी क्षेत्र से टैंकर चलाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण भूगर्भ जल स्तर सामान्य बना हुआ है, इसलिए व्यापक स्तर पर टैंकर की आवश्यकता महसूस नहीं की गई है। यदि कहीं दिक्कत होगी तो टैंकर से पानी की सप्लाई शुरू की जाएगी।
पिछले साल 113 ग्राम पंचायतों में चलने लगे थे 150 टैंकर
पिछले वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही जिले के 113 ग्राम पंचायतों में टैंकर से पानी आपूर्ति शुरू होने लगी थी। पंचायत राज विभाग की तरफ से 113 ग्राम पंचायतों में 150 टैंकर से पानी की आपूर्ति शुरू कराई गई थी। अप्रैल में घोरावल और म्योरपुर ब्लॉक के सर्वाधिक गांवों में पीने के पानी की समस्या देखी गई थी। हालांकि इस वर्ष अब तक किसी ग्राम पंचायत में टैंकर से पानी आपूर्ति के लिए प्रस्ताव नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि बीते सीजन में अच्छी बारिश होने तथा भूजल स्तर ऊपर होने की वजह से पानी की उपलब्धता लोगों को हो जा रही है। हालांकि कुछ पठारी गांवों में अब धीरे-धीरे पानी की समस्या होने लगी है।
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अभी किसी ग्राम पंचायत में पानी की समस्या नहीं है। जहां कहीं भी पेयजल की गंभीर समस्या सामने आएगी और प्रस्ताव प्राप्त होगा, वहां तत्काल टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी। -राजेश सिंह, एडीपीआरओ।
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सर्वाधिक पहाड़ी इलाके वाले जिला सोनभद्र में 619 ग्राम पंचायत हैं। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1440 राजस्व गांव हैं। जल निगम ग्रामीण क्षेत्र की तरफ से दावा किया जा रहा है कि जिले के 364 गांवों में हर घर नल जल योजना केे तहत नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर हैंडपंप सूख चुके हैं और पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति भी बाधित है। नगवां ब्लॉक के सोमा गांव में निजी सबमर्सिबल पंप से ग्रामीण पानी भरने को विवश हैं। सुबह-शाम पानी भरने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ लगी रहती है। इसी तरह महुली गांव में कुंए से पानी भरते हुए ग्रामीणों को देखा जा सकता है। सोमा, महुली और बड़ैला समेत अन्य गांवों में हर घर नल जल योजना का पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे इन गांवों में पीने के पानी के लिए लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। गोंगा गांव केे लोग नगवां बांध से पानी से प्यास बुझाने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या बढ़ने के बाद कार्रवाई के बजाय पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि गर्मी के चरम समय में लोगों को राहत मिल सके। इधर, जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी भी क्षेत्र से टैंकर चलाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण भूगर्भ जल स्तर सामान्य बना हुआ है, इसलिए व्यापक स्तर पर टैंकर की आवश्यकता महसूस नहीं की गई है। यदि कहीं दिक्कत होगी तो टैंकर से पानी की सप्लाई शुरू की जाएगी।
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पिछले साल 113 ग्राम पंचायतों में चलने लगे थे 150 टैंकर
पिछले वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही जिले के 113 ग्राम पंचायतों में टैंकर से पानी आपूर्ति शुरू होने लगी थी। पंचायत राज विभाग की तरफ से 113 ग्राम पंचायतों में 150 टैंकर से पानी की आपूर्ति शुरू कराई गई थी। अप्रैल में घोरावल और म्योरपुर ब्लॉक के सर्वाधिक गांवों में पीने के पानी की समस्या देखी गई थी। हालांकि इस वर्ष अब तक किसी ग्राम पंचायत में टैंकर से पानी आपूर्ति के लिए प्रस्ताव नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि बीते सीजन में अच्छी बारिश होने तथा भूजल स्तर ऊपर होने की वजह से पानी की उपलब्धता लोगों को हो जा रही है। हालांकि कुछ पठारी गांवों में अब धीरे-धीरे पानी की समस्या होने लगी है।
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अभी किसी ग्राम पंचायत में पानी की समस्या नहीं है। जहां कहीं भी पेयजल की गंभीर समस्या सामने आएगी और प्रस्ताव प्राप्त होगा, वहां तत्काल टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी। -राजेश सिंह, एडीपीआरओ।