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आखिर एसटीएफ की गिरफ्त में आया डीएनएन ग्रुप
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कोयला उत्पादक कंपनी से देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी तक पावर प्लांटों का लिंकेज कोयला पहुंचाने में सक्रिय डीएनएन ग्रुप तक एसटीएफ के हाथ पहुंच गए हैं। शुक्रवार को एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने मिर्जापुर जिले के अदलहाट से डीएनएन ग्रुप के अहम किरदार धनंजय को गिरफ्तार कर लिया। इसी डीएनएन ग्रुप के इशारे पर लिंकेज कोयला मंडी तक पहुंचाने की खबर अमर उजाला ने 24 जनवरी को ही प्रकाशित की थी। करीब साढ़े तीन माह बाद एसटीएफ की कार्रवाई से इसकी पुष्टि भी हुई है। हालांकि अब भी ग्रुप के कई सदस्य एसटीएफ की रडार पर हैं। कई अन्य गिरोहों पर भी निगाह रखी जा रही है।
जनवरी में पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सिंगरौली में करीब 42 हजार टन अवैध कोयला भंडारण का मामला सामने आया था। इसके बाद अमर उजाला ने 17 जनवरी के अंक में कई प्रदेशों से जुड़े कोयले के काले कारोबार के तार शीर्षक से खबर दिया था। इसमें डीएनएन ग्रुप की सक्रियता का उल्लेख था। कौन है डीएनएन ग्रुप... इसी के इशारे पर गाड़ियां होती थीं पास... शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते धनंजय नारायण नायडू (डीएनएन) ग्रुप की करतूतें सार्वजनिक की थीं। इससे पहले पुलिस की कार्रवाई में जिले के कई थानों में कोयला भरे 22 ट्रक पकड़े गए थे। इस मामले में भी ग्रुप का नाम आया था। यह सब होने के बावजूद सरगना धनंजय सिंह तक एसटीएफ को पहुंचने में इतना वक्त कैसे लगा अब इसी की चर्चा है। लिंकेज के रियायती कोयले को मंडी पहुंचाने में ट्रांसपोर्टरों, कोयला व पावर कंपनियों के जिम्मेदारों की भूमिका शुरू से संदेह के घेरे में है। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ के रडार पर वह अफसर भी हैं, जो कोयला प्रेषण व्यवस्था से जुड़े हैं।
अनपरा से होता है मार्ग परिवर्तन
एनसीएल की खड़िया, बीना, कृष्णशिला कोयला क्षेत्रों से निकलने वाले कोयले को ट्रक टेलरों के जरिए पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सिंगरौली व महदेईया रेलवे साइडिंग पहुंचाने की व्यवस्था है। इसके लिए शक्तिनगर से अनपरा होते हुए ट्रक ट्रेलरों को मध्यप्रदेश के सिंगरौली में प्रवेश के लिए मार्ग निर्धारित किया गया है। अनपरा से यह ट्रक ट्रेलर सिंगरौली के बजाए चंदासी मंडी की राह पकड़ लेते हैं।
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एसटीएफ से पहले पुलिस ने पकड़ा फिर छोड़ा
लिंकेज कोयला को मंडी पहुंचाए जाने की सूचना पुलिस को थी। बताया जा रहा है कि पिपरी व हाथीनाला थाना क्षेत्र में पुलिस ने मंगलवार व बुधवार को कई ट्रकों को जांच के लिए खड़ा करा दिया था। इसके बाद कारोबारियों में खलबली मच गई। जांच में क्या सामने आया यह स्पष्ट नहीं हुआ लेकिन पुलिस ने कुछ घंटे बाद ट्रकों को छोड़ दिया। इस पर सवाल भी उठे। बाद में इन्हीं ट्रकों में से कुछ को एसटीएफ ने अदलहाट क्षेत्र में पकड़ा।
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जनवरी में पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सिंगरौली में करीब 42 हजार टन अवैध कोयला भंडारण का मामला सामने आया था। इसके बाद अमर उजाला ने 17 जनवरी के अंक में कई प्रदेशों से जुड़े कोयले के काले कारोबार के तार शीर्षक से खबर दिया था। इसमें डीएनएन ग्रुप की सक्रियता का उल्लेख था। कौन है डीएनएन ग्रुप... इसी के इशारे पर गाड़ियां होती थीं पास... शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते धनंजय नारायण नायडू (डीएनएन) ग्रुप की करतूतें सार्वजनिक की थीं। इससे पहले पुलिस की कार्रवाई में जिले के कई थानों में कोयला भरे 22 ट्रक पकड़े गए थे। इस मामले में भी ग्रुप का नाम आया था। यह सब होने के बावजूद सरगना धनंजय सिंह तक एसटीएफ को पहुंचने में इतना वक्त कैसे लगा अब इसी की चर्चा है। लिंकेज के रियायती कोयले को मंडी पहुंचाने में ट्रांसपोर्टरों, कोयला व पावर कंपनियों के जिम्मेदारों की भूमिका शुरू से संदेह के घेरे में है। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ के रडार पर वह अफसर भी हैं, जो कोयला प्रेषण व्यवस्था से जुड़े हैं।
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अनपरा से होता है मार्ग परिवर्तन
एनसीएल की खड़िया, बीना, कृष्णशिला कोयला क्षेत्रों से निकलने वाले कोयले को ट्रक टेलरों के जरिए पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सिंगरौली व महदेईया रेलवे साइडिंग पहुंचाने की व्यवस्था है। इसके लिए शक्तिनगर से अनपरा होते हुए ट्रक ट्रेलरों को मध्यप्रदेश के सिंगरौली में प्रवेश के लिए मार्ग निर्धारित किया गया है। अनपरा से यह ट्रक ट्रेलर सिंगरौली के बजाए चंदासी मंडी की राह पकड़ लेते हैं।
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एसटीएफ से पहले पुलिस ने पकड़ा फिर छोड़ा
लिंकेज कोयला को मंडी पहुंचाए जाने की सूचना पुलिस को थी। बताया जा रहा है कि पिपरी व हाथीनाला थाना क्षेत्र में पुलिस ने मंगलवार व बुधवार को कई ट्रकों को जांच के लिए खड़ा करा दिया था। इसके बाद कारोबारियों में खलबली मच गई। जांच में क्या सामने आया यह स्पष्ट नहीं हुआ लेकिन पुलिस ने कुछ घंटे बाद ट्रकों को छोड़ दिया। इस पर सवाल भी उठे। बाद में इन्हीं ट्रकों में से कुछ को एसटीएफ ने अदलहाट क्षेत्र में पकड़ा।